ईव्हीएम छेड़छाड़ हो सकती है: आरटीआई में सामने आए तथ्य :महाराष्ट्र का मामला

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ईव्हीएम की सुरक्षा को लेकर किए गए कथित दावों महाराष्ट्र में पोल खुल गई है। राजनीतिक दल भले ही ईव्हीएम से छेड़छाड़ साबित करने में सफल नहीं हो पाए हों, पर महाराष्ट्र के परिषद चुनाव में छेड़छाड़ होने के पुख्ता सबूत सामने आए हैं। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ कि ईव्हीएम से छोड़छाड़ हो सकती है।। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बताया कि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हाल ही में हुए परिषद चुनाव के दौरान लोणार के सुल्तानपुर गांव में मतदान के दौरान ईवीएम से छेड़छाड़ की बात सामने आई। गलगली ने बताया कि मतदाता जब भी एक प्रत्याशी को आवंटित चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाते तो भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिह्न कमल के सामने वाला एलईडी बल्ब जल उठता। निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी, जिसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ।

16 फरवरी के मतदान में हुई थी गड़बडी

क्षेत्र की निर्दलीय प्रत्याशी आशा अरुण जोरे ने 16 फरवरी को हुए मतदान के दौरान सामने आई इस गड़बड़ी की शिकायत की थी और निर्वाचन अधिकारी से मामले की जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा था, जिसके बाद गलगली ने 16 जून को आरटीआई दाखिल की। गलगली को आरटीआई में मिली जानकारी में निर्वाचन विभाग ने बताया कि लोणार कस्बे के सुल्तानपुर गांव में स्थापित किए गए मतदान केंद्र संख्या-56 पर मतदाता ने जब क्रम संख्या-1 पर मौजूद निर्दलीय प्रत्याशी के चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाया, तो क्रम संख्या-चार पर भाजपा प्रत्याशी के चुनाव चिह्न के सामने वाली बत्ती जली, जिससे कि मत भाजपा प्रत्याशी को चला गया। मतदान केन्द्र अधिकारी प्रारंभ में आशा जोरे की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया था। बाद में मतदाताओं के दबाव के बाद शिकायत को पंजीकृत किया गया।

मतदान अधिकारी ने की गड़बड़ी की पुष्टी

शिकायतों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी मानिकराव बाजद ने शिकायत सही पाया। जिसकी मतदान केंद्र के निर्वाचन प्रभारी रामनारायण सावंत ने पुष्टि की। रामनारायण ने ही लोणार के निर्वाचन अधिकारी को मामले की सूचना दी। लोणार के निर्वाचन अधिकारी के सहायक इसके बाद खुद मतदान केंद्र पहुंचे और शिकायत को सत्य पाया कि एक खास प्रत्याशी के चुनाव चिह्न वाला बटन दबाने पर मत भाजपा प्रत्याशी को जा रहा था। निर्वाचन क्षेत्र से कई निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी के पास शिकायत करने के बाद उस मतदान केंद्र पर मतदान रद्द कर दिया गया, मतदान केंद्र को बंद कर दिया गया, गड़बड़ ईवीएम मशीन को सील कर दिया गया और अतिरिक्त विकल्प के तौर पर रखी गई ईवीएम मशीन को लगाया गया। लेकिन जब कई राजनीतिक दलों ने फिर से मतदान कराए जाने की मांग उठाई तो मतदान पूरी तरह रद्द कर पांच दिन बाद 21 फरवरी को पुनर्मतदान करवाया गया। गलगली ने कहा, इस मामले से साबित हो गया कि ईवीएम में छेड़छाड़ संभव है। एक मतदाता ने पहली बार इस ओर ध्यान दिलाया, जिसके बाद कई मतदाताओं ने इसकी पुष्टि की तथा निर्वाचन अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने शिकायत का सत्यापन कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी। सबसे चौंकाने वाली बात है कि निर्वाचन आयोग लगातार ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना को नकारता रहा है और यहां तक कि राजनीतिक दलों को ईवीएम से छेड़छाड़ की चुनौती भी दी।

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