भाजपा की प्राथमिकता में आए दलित वोटर, संघ का मिजाज बदला

कांग्रेस मुक्त भारत के एजेंडे पर चली रही भारतीय जनता पार्टी ने दलित वोटरों का लुभाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में भुवनेश्वर में शनिवार से शुरू होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक स्थल का नामकरण दलित कवि भीमा भोई के नाम पर रखा गया है। इस बैठक से पूर्व दलितों के प्रति राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के रवैये में भी बदलाव देखने को मिला। संघ के पदाधिकारियों ने बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उडीस में वर्ष 2019 में विधानसभा के चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी ने अभी से ही उडीसा को अपनी प्राथमिकता में ले लिया है। उडीसा में पार्टी अपनी जीत की संभावनएं दलित वोटरों में देख रही है। ओडिशा के 147 विधानसभा क्षेत्रों में से 23 सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, जबकि इसकी 21 लोकसभा सीटों में से तीन दलित समुदाय के लिए आरक्षित हैं । पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 23 सीटों में से महज दो पर जीत मिली थी जबकि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित तीनों लोकसभा सीट पर उसे हार का सामना करना पडा था ।
पार्टी अब दलित वोटों पर ध्यान दे रही है, जो परंपरागत तौर पर कांग्रेस के साथ रही लेकिन अब बीजद की तरफ खिसक गई हैं ।
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, ओडिशा में दलितों की आबादी 71,48,463 है, जो कि कुल आबादी का लगभग 17 प्रतिशत है। राज्य में हाल में हुए नगर निकायों के चुनाव में भाजपा ने पहली बार बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था जिससे पार्टी में उत्साह है। पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं की नजर अब ओडिशा की राजनीति पर है जहां वर्ष 2000 से बीजू जनता दल सरकार सत्तारूढ है । भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ओडिशा में 20 साल बाद बैठक हो रही है। इससे पहले 1997 में भुवनेश्वर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हुई थी। उसके बाद राज्य में भाजपा और बीजेडी के बीच गठबंधन हुआ था । बीजेडी न सिर्फ वाजपेयी सरकार में शामिल हुयी थी बल्कि राज्य में भी गठबंधन की सरकार ही बनी थी लेकिन बाद में यह गठबंधन टूट गया था । पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के लिए ओडिशा का चयन रणनीतिक तौर पर किया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह पहली बैठक है। जिसमें देश की राजनीति , आर्थिक स्थिति के साथ-साथ ओडिशा में पार्टी को मजबूत बनाने की रणनीति पर भी चर्चा की जायेगी।
दो दिवसीय इस बैठक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सफल रणनीति को दूसरे राज्यों में अपनाने पर भी विचार किये जाने की उम्मीद है । बैठक में गरीबों के कल्याण के लिए चलायी जा रही मोदी सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाने के तौर तरीको पर भी पर भी विचार किया जायेगा । पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , भाजपा अध्यक्ष अमित शाह , पार्टी मार्ग दर्शक मंडल के नेताओं , गृह मंत्री राजनाथ सिंह , शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू , वित्त मंत्री अरुण जेटली , केन्द्रीय मंत्रियों , भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों , पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्षों तथा कार्यकारिणी के सभी सदस्य हिस्सा लेगें । बैठक में श्री मोदी और श्री शाह के संम्बोधन के अलावा राजनीतिक और अर्थिक स्थिति को लेकर कई प्रस्ताव भी पारित किये जायेंगे श्री मोदी खुद ओडिशा को कितना महत्व देते हैं ये इस बात से साफ हो जाता है प्रधानमंत्री बनने के बाद वह 2015 में एक बार, 2016 में तीन बार औरÞ अब ओडिशा जा रहे हैं । पार्टी सूत्रों ने कहा, कि प्रधानमंत्री हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन देने के लिए राज्य के लोगों को धन्यवाद देंगे ।

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