फर्जी वोटर मामला : कांग्रेस जाँच से संतुष्ट नहीं ,फिर जाएगी चुनाव आयोग

मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओ द्वारा प्रदेश में 60 लाख से अधिक फर्जी वोटर होने की शिकायत की जाँच चुनाव आयोग द्वारा कराई गई थी जाँच में शिकायत को सही नहीं पाया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियो द्वारा की गई इस जाँच पर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि मतदाता सूची की जाँच दो-तीन दिन में किया जाना संभव ही नहीं है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि जनवरी 2018 में जारी की गई सूची की गड़बड़ियों को चुनाव आयोग के अधिकारी स्वीकार कर चुके है और सुधार का दावा भी किया था। कांग्रेस पूरे मामले को नए सिरे से चुनाव आयोग के समक्ष उठाने जा रही है।

क्या है फर्जी वोटर का मामला

मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 03 जून को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कमलनाथ ने बताया था कि हमने 100 विधानभा क्षेत्रों में छानबीन कराई है, जहां 60 लाख फर्जी वोटर की सूची का पता चला है। कमलनाथ ने दावा किया कि यह कैसे संभव है कि पिछले दस साल में मध्यप्रदेश राज्य की जनसंख्या 24% बढ़ी है, लेकिन मतदाताओं की संख्या में 40% इजाफा हुआ है।

कमलनाथ ने ये भी आरोप लगाया कि यूपी से जुड़े क्षेत्रों में कई ऐसे लोग हैं, जिनके नाम दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में है। इसके अलावा कई लोगों के नाम कई अन्य सूचियों में हैं। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों ने लिस्ट की स्क्रूटनी की एक वोटर का नाम 26 जगहों पर दर्ज देखा है। ऐसा नहीं कि इस तरह का केस एक जगह है ऐसे मामले कई विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिले हैं। एक ही फोटो कई सूचियों में पाया गया है। एक ही वोटर का नाम कई अन्य मतदात सूचियों में भी मिला है। इस तरह के आरोप कांग्रेस द्वारा लगाए गए है।

लिस्ट में गड़बड़ी को देखते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि वोटर लिस्ट की फिर से जांच हो। साथ ही कहा है कि जिन अधिकारियों ने ऐसा किया है उन पर कार्रवाई हो।

कांग्रेस की ये थी मांगे
1. वोटर लिस्ट की फिर से जांच हो।
2. हर रिटर्निंग ऑफिसर से सर्टिफिकेट मांगा जाना चाहिए।
3. जिन्होंने फर्जी वोटरों को शामिल किया हो उन पर करवाई की जाए।
4. अगली सूची में भी अगर गड़बड़ी पाई जाती है तो अधिकारी पर कार्रवाई की जाए।
5. ऐसे अधिकारी को 6-10 साल तक किसी भी मतदान कार्य प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाए।

क्या कहती है आयोग की रिपोर्ट

चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दे दिये थे। इसके लिए जांच दलों का गठन किया गया था। भोपाल की नरेला तथा भोजपुर सीट के लिए चार सदस्यों का दल बनाया गया था। इसी तरह से नर्मदापुरम में होशंगाबाद तथा सिवनी मालवा विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी दो-दो सदस्यीय जांच दल बनाया गया था। जांच दलों को सात जून तक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था।

 

रिपोर्ट के अनुसार जांच दल ने होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र की शिकायत में वर्णित 552 मामलों की जांच की जिसमें एक भी मतदाता का नाम मतदाता सूची में अनेक बार दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई। वहीं भोजपुर में शिकायत वाले 36 मामलों की जांच में 29 के नाम सही पाए गए जबकि 7 मामलों को मतदाता सूची दुरुस्त करने की प्रक्रिया के तहत सही कर लिया जायेगा

आयोग ने विस्तृत जांच के आधार पर निष्कर्ष के तौर पर कहा कि इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में एक ही मतदाता का नाम, मतदाता सूची में कई बार दर्ज होने के मामलों की बहुतायत होने की शिकायत सही नहीं है। जबकि एक ही तस्वीर वाले अनेक मतदाता पाए जाने की शिकायत को आयोग ने यह बताते हुए सही नहीं पाया कि यह एक ही मतदाता का सूची में बार-बार जिक्र का मामला नहीं है। बल्कि यह महज एक ही फोटो के अनेक बार उपयोग का मामला है जिसे ठीक करने के लिए कह दिया गया है।

आयोग ने फर्जी मतदाता सूची की शिकायत पर कहा कि मध्यप्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से मतदाताओं की हिस्सेदारी साल 2008 में 52.76 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 61.45 प्रतिशत हो गई है। इसलिए जनसांख्यकीय आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूचियों को अपडेट किया गया है। इस आधार पर इसे फर्जी मतदाता सूची का मामला नहीं माना जा सकता है।

क्या है कांग्रेस की आपत्ति

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ईसी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग ने एक टीम बनाई और उन्होंने 2-3 दिन में भोपाल में बैठकर जांच पूरी कर ली। इतना गंभीर मामला 2-3 दिन में कैसे हो पूरा हो सकता है, मेरा ईसी से अनुरोध है कि इसकी फिर जांच कराई जाए। सिंधिया ने कहा था कि कागजी कार्रवाई से कुछ नहीं होगा, जिस तरह से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी सामने आई है, उसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। आयोग की टीमें घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करें।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की भोपाल में मीडिया से चर्चा –
वोटर लिस्ट वाले मामले में हम चुनाव आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। हम फिर से आयोग के पास प्रमाण के साथ जाकर जाँच करने की की माँग करेंगे।
हमने शिकायत 1 जनवरी 2018 की सूची के आधार पर की थी और अधिकारिओं ने भी ख़ुद स्वीकार किया था कि गड़बड़ हुई है, हम सुधार रहे है। जाँच के बाद वही अधिकारी अब कह रहे है कि सब ठीक है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here