ताबूत में आखिरी कील

ताबूत में आखिरी कील

कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के बीच विश्वास का संकट अभी भी बना हुआ है। कमलनाथ के भारतीय जनता पार्टी जाने की अफवाहें इसी अविश्वास पूर्ण माहौल का नतीजा रहा। अफवाह किसने फैलाई यह शायद ही कभी सामने आ सके। लेकिन एक बात साफ है कि अफवाह को परवान चढ़ाने में भाजापाइयों का हाथ रहा। अफवाह हाथों-हाथों ली गई। इस अफवाह के जरिए कमलनाथ की निष्ठा को संदिग्ध करना उद्देश्य रहा होगा।

 

प्रदेश की भाजपा सरकार कमलनाथ को लेकर पूरी खामोशी ओढेÞ हुए हैं। जबकि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता आज भी यह मानते हैं कि खलनायक दिग्विजय सिंह में कांगे्रस संगठन को जीवित करने की क्षमता है। जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा मिस्टर क्लीन का है। इस क्लीन चेहरे को दागदार करने के लिए ही बार-बार मुख्यमंत्री की ओर से सिंधिया पर हमले किए जा रहे हैं। पहले परिवार पर हमला और फिर सीधे ज्योतिरादित्य को निशाने पर लिया गया।

आखिर शिवराज को गुस्सा क्यों आ रहा है?

 

जहां तक सवाल अरूण यादव का है तो भाजपा उन्हें अपने लिए नुकसानदेय नहीं मानती। वहीं अजय सिंह के बारे में यह धारणा है कि वे अपने अकेले दम पर कुछ नहीं कर सकते। अजय सिंह और अरुण यादव के बीच दूरी भी घटती नजर आ रही है। प्रतिपक्ष का नेता बनने के बाद अजय सिंह ने जिस तरह अपने पितृ पीढ़ी के नेताओं का जिक्र करके अरुण यादव और अजय चौरे को साधा था, उसका असर दिखाई देने लगा है।

 

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अरुण यादव अपने दौरे की एक कॉपी अजय सिंह के पास भेजना नहीं भूलते। खैर हम बात ताबूत और कील की कर रहे थे। कांगे्रस के संदर्भ में जब ताबूत का जिक्र आता है तो दिग्विजय सिंह का नाम स्वभाविक तौर पर सामने आ जाता है। भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, व्यापमं मामले में क्लीन चिट का उपयोग दिग्विजय सिंह को घेरने के लिए कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह यदि घर बैठ गए तो कमलनाथ-सिंधिया की जोड़ी तोड़ने की कोशिश होगी।

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