जम्मू -कश्मीर में BJP -PDP गठबंधन टुटा ,तीन साल के गठबंधन को आगे चलाना हुआ अब मुश्किल

जम्मू कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का गंठबंधन खत्म हो गया। भाजपा महासचिव राम माधव ने मंगलवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इसका एलान किया। यह निर्णय जम्मू कश्मीर में संघर्ष विराम केंद्र द्वारा वापस लिये जाने के फैसले के बाद लिया गया है। 17 जून को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संघर्ष विराम का फैसला वापस लिया था, जिससे पीडीपी नाराज थी और दोनों पार्टियों में दरार पड़ गयी थी। अमित शाह से आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सुबह भेंट की थी, जिसके बाद शाह ने जम्मू कश्मीर के भाजपा कोटे के मंत्रियों व प्रमुख नेताओं से चर्चा की।

राम माधव ने कहा कि हमने तीन साल पहले विखंडित जनादेश मिलने के कारण जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनायी थी। लेकिन, इस दौरान राज्य में आतंकवाद बढ़ गया। एक मूर्धन्य पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की गयी, इससे प्रेस की स्वतंत्रता भी खतरे में आ गयी।

राम माधव ने कहा कि सरकार चलाने के दौरान हमें अनुभव हुआ कि जम्मू एवं लद्दाख के लिए पर्याप्त काम नहीं हो पा रहे हैं और दोनों क्षेत्र की जनता को उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि वहां हमारी अकेले की सरकार नहीं थी फिर भी हमारे मंत्रियों ने भरपूर प्रयास किया। उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की थी जिससे स्थिति सुधारने का प्रयास हो। माधव ने कहा कि युद्ध विराम हमारी मजबूरी नहीं थी, लेकिन मुसलिमों के पवित्र रमजान महीने को देखते हुए हमने बड़ा दिल दिखाया व युद्ध विराम किया।

राम माधव ने कहा कि तीन साल में सुरक्षा बलों ने 600 आतंकी मारे हैं। आतंक के खिलाफ हम लड़ते रहेंगे और यह मजबूती से जारी रहेगा। वर्तमान स्थिति को ठीक करने के लिए गवर्नर शासन लगाया जाना चाहिए।

वहीं, जम्मू कश्मीर में भाजपा कोटे से डिप्टी सीएम रहे कवींद्र गुप्ता ने कहा कि हमने राष्ट्रहित में फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि हमने व हमारे मंत्रियों ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा दे दिया है।

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