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उन्नाव ,कठुआ की घटनाओं पर 49 पूर्व नौकरशाहों ने श्री मोदी को लिखा पत्र !

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कुछ पूर्व नौकरशाहों ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू कश्मीर के कठुआ में लड़कियों के साथ दुष्कर्म की वारदात के बाद सरकार के अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि वह दोनों पीड़िताओं के परिवारों के पास जाकर देशवासियों की ओर से माफी मांगेंं।

देश के 49 पूर्व नौकरशाहों ने श्री मोदी को लिखे खुले पत्र में कहा है कि कठुआ और उन्नाव में दिल दहला देने वाली घटनाआें के बावजूद सरकार अपनी मूलभूत जिम्मेदारी निभाने में विफल रही। पत्र में कहा गया ,’एक राष्ट्र आैर समाज के तौर पर हम भी नाकाम साबित हुए हैं जिसे कभी अपने नैतिक ,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर तथा सहिष्णुता एवं दयालुता के मूल्यों पर गर्व हुआ करता था। ‘

आठ वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या में जिस तरह की हैवानियत दिखायी गयी उससे पता लगता है कि हमारा कितना पतन हाे चुका है। आजाद भारत का यह सबसे काला दौर है लेकिन सरकार और राजनीतिक दलों के नेताआें का जवाब बहुत की कमजोर और अपर्याप्त रहा। उन्होंने कहा ,’हमें अंधेरी सुरंग के दूसरे छोर पर कोई रोशनी नहीं दिखायी दे रही है और हमारा सिर शर्म से झुक गया है।’

उन्होंने लिखा ,’प्रधानमंत्री जी कठुआ और उन्नाव दोनों ही मामले जिन राज्यों में हुए हैं ,वहां आपकी पार्टी की सरकारें हैं । पार्टी में आपके प्रभुत्व काे देखते हुए यह भयावह स्थिति पैदा होने के लिए और कोई नहीं आप जिम्मेदार हैं।’
इन पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने लिखा,’ प्रधानमंत्री जी हमने आपसे सिर्फ अपनी सामूहिक शर्म की भावना जाहिर करने तथा क्षोभ व्यक्त करने एवं अपनी सभ्यता के मूल्यों की समाप्ति पर दुख व्यक्त करने के लिए यह पत्र नहीं लिखा है बल्कि इसके जरिये हम अपना आक्रोश व्यक्त करना चाहते हैं। ‘

उन्होंने श्री मोदी से अनुरोध किया कि वे कठुआ और उन्नाव की घटना की पीड़ितों के परिजनों के पास जाकर उन सबकी ओर से माफी मांगे। उन्होंने कठुआ मामले के आरोपियों की सुनवाई त्वरित गति से करने तथा उन्नाव मामले में न्यायालय की निगरानी में गठित विशेष जांच दल से अविलंब जांच कराने का अनुरोध किया।

उन्होंने श्री मोदी से दलिताें ,मुसलमानों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदाय और महिलाओं एवं बच्चों को विशेष सुरक्षा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त करने का भी आग्रह किया ताकि उन्हें अपने जीवन और स्वतंत्रता पर खतरे की चिंता न हो। उन्होंने सरकार में मौजूद ऐसे हर व्यक्ति को हटाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया जाे घृणा जनित अपराध और घृणा फैलाने वाले बयान देते हैं।
पूर्व नाैकरशाहों ने घृणा जनित अपराधों से सामाजिक,राजनीतिक और प्रशासनिक ताैर पर निपटने के तौर -तरीकों पर विचार -विमर्श करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी अपील की ।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में वजाहत हबीबुल्ला,हर्षमंदर,नरेश्वर दयाल,पी अार पार्थसारथी,जुलिया रिबेरियो,अरूणा राय और एन सी सक्सेना आदि शामिल हैं।

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