मीडिया विश्वसनीयता बनाए रखे, आत्ममंथन करे : मोदी

चेन्नई,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मीडिया से विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने और खुद में सुधार लाने के लिए आत्ममंथन करने का आग्रह किया। तमिल दैनिक ‘दिना थांती’ के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मीडिया से राजनीति से अपना ध्यान अलग करने और जनता से संबंधित खबरों के लिए ज्यादा जगह देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “जैसे शिक्षा में अब सीखने के परिणामों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है, वैसे ही सामग्रियों के उपयोग के प्रति हमारा रवैया बदला है। आज, सभी नागरिक विभिन्न श्रोतों से मिली खबरों का विश्लेषण और पुष्टि करने की कोशिश करते हैं। इसलिए, मीडिया को अवश्य ही अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने चाहिए। विश्वसनीय मीडिया संस्थानों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हमारे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी अच्छा है।”

उन्होंने कहा, “विश्वसनीयता पर नए सिरे से जोर देने से हम आत्ममंथन के विषय पर आते हैं। मैं यह विश्वास करता हूं कि जब भी जरूरत होगी, मीडिया में सुधार(रिफार्म) खुद के आत्ममंथन से होगा।”

मोदी ने कहा, “वास्तव में हमने कुछ अवसरों पर आत्ममंथन की प्रक्रिया को देखा है। इसका उदाहरण 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले पर तैयार की गईं रपटों पर विश्लेषण शामिल है। शायद, इसे और ज्यादा होना चाहिए।”

इस समारोह में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त एवं जहाजरानी राज्य मंत्री पोन राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री के पलनीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम मौजूद थे।

मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के एक बयान ‘क्यों लोगों की सफल रिपोर्ट के बारे में लोग नहीं जान पाते हैं’ को याद करते हुए कहा, “आज अधिकतर मीडिया संवाद(डिस्कोर्स) राजनीति के आस-पास घूमता है।”

उन्होंने कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र की थोड़ी चर्चा होनी चाहिए। हालांकि भारत हम राजनीतिज्ञों के अलावा भी बहुत कुछ है। यह 125 करोड़ भारतीय हैं, जो इस देश को भारत बनाते हैं। मुझे यह देखकर ज्यादा खुशी होगी कि मीडिया उनकी(लोगों के) रपटें और उपलब्धियों को ज्यादा प्रकाशित करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस दौर में, मोबाइल फोन के साथ सभी नागरिक आपके सहयोगी हैं। नागरिक रिपोर्टिग लोगों की सफल रपटों को साझा और विस्तार करने में महत्वपूर्ण जरिया हो सकती है। इससे संकट या प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव कार्य में तत्काल मदद मिल सकती है।”

मोदी ने प्राकृतिक आपदा की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये पूरी दुनिया में ज्यादा तीव्रता और आवृत्ति के साथ आ रही है।

उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन हम सभी के लिए एक चुनौती है। क्या मीडिया इसके खिलाफ युद्ध में अगुवाई कर सकता है? क्या मीडिया जलवायु परिवर्तन से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयास के तहत अपने यहां इस बारे में चर्चा या जागरूकता फैलाने के लिए थोड़ी जगह दे सकता है?”

मोदी ने कहा, “मैं इस अवसर का उपयोग मीडिया द्वारा स्वच्छ भारत अभियान को प्रतिक्रिया देने के लिए सराहना के तौर पर करना चाहता हूं। जैसा कि हम वर्ष 2019 तक, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत के लिए प्रतिबद्ध हैं, मैं मीडिया द्वारा जागरूकता फैलाने और जनचेतना के लिए निभाई गई सकारात्मक भूमिका से प्रसन्न हूं। उनलोगों ने इस क्षेत्र में हमारे लक्ष्य को पाने के दावे से पहले बाकी कामों की ओर भी हमारा ध्यान दिलाया।”

मोदी ने कहा, “संपादकीय स्वतंत्रता का उपयोग जनहित में वृहत तौर पर होना चाहिए। उसी तरह लिखने की स्वतंत्रता और यह निर्णय करना कि क्या लिखा जाना चाहिए, का मतलब सही से कम लिखने या तथ्यात्मक रूप से गलत लिखने की स्वतंत्रता नहीं है। जैसा कि महात्मा गांधी ने खुद ही कहा था, ‘प्रेस चौथा स्तंभ कहलाता है। इसके पास निश्चय ही ताकत है, लेकिन इस ताकत का दुरुपयोग अपराध है।”‘

उन्होंने कहा, “भले ही मीडिया प्रतिष्ठान निजी लोगों के स्वामित्व वाले हो सकते हैं, लेकिन वे जनहित के लिए काम कर रहे हैं। जैसा कि विद्वानों ने कहा है, यह(मीडिया) ताकत के बदले शांति से बदलाव स्थापित करने का एक जरिया है।”

इसलिए मीडिया पर चुनी हुई सरकार या न्यायपालिका जैसी जवाबदेही है और इसका व्यवहार ‘बोर्ड’ से उपर होना चाहिए। महान संत तिरुवल्लुवर के शब्दों में, ‘इस विश्व में नीति के अलावा कुछ नहीं है, जो हमें धन और ख्याति दिलाती है।’

मोदी ने याद दिलाया कि किस तरह राजा राममोहन राय के ‘संवाद कौमुदी’, बाल गंगाधर तिलक के ‘केसरी’ और महात्मा गांधी के ‘नवजीवन’ ने औपनिवेशिक काल में जनमत खड़ा करने और स्वतंत्रता संघर्ष के लिए प्रोत्साहित करने का काम किया था।

उन्होंने कहा कि मीडिया के पास लोगों को ‘व्यस्त, जवाबदेह और जागरूक’ नागरिक बनने की एक जन जागरूकता पैदा करने की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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