कांगे्रस के बैनर तले विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं सिंधिया और कमलनाथ

मध्यप्रदेश कांगे्रस की अंदरूनी राजनीति के चलते महाराजा यानि पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने पूर्व घोषित 72 घंटे के सत्याग्रह आंदोलन की अवधि घटाकर 50 घंटे करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। मंदसौर में किसानों पर पुलिस फायरिंग के बाद राज्य की राजनीति अपने चरम पर है। कांगे्रस के सभी क्षत्रपों में सरकार पर हमला बोलने की होड़ लग गई है। राज्य में अगले साल विधानसभा के आम चुनाव होना है। पार्टी ने अब तक इस चुनाव के लिए किसी चेहरे का नाम आगे नहीं बढ़ाया है। पूर्व मंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मजबूत दावेदार के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। मंदसौर की घटना के विरोध में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भोपाल में 72 घंटे सत्याग्रह में बैठने का एलान किया है। सत्याग्रह आज 14 जून से शुरू हुआ है। 72 घंटे की अवधि सत्रह जून को पूरी होगी। प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष अरूण यादव ने इस अवधि के पूरी होने से पहले ही धार जिले के खालघाट में प्रदर्शन करने की घोषणा कर दी है। किसान महापंचायत का यह आयोजन भारत कृषक समाज के बैनर तले रखा गया है। प्रदेश कांगे्रस कमेटी इसकी आयोजक नहीं है। अरूण यादव खुद भारत कृषक समाज के अध्यक्ष हैं। मध्यप्रदेश कांगे्रस के सभी बड़े नेता इस कार्यक्रम में खलघाट में एकत्रित होंगे। कांगे्रस के सभी बड़े नेताओं के दबाव में सिंधिया 16 जून को ही अपना सत्याग्रह समाप्त कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने कहा है कि कांगे्रस के नेताओं का आंदोलन सत्याग्रह नहीं, सत्ता ग्रह है।

नेतृत्व को लेकर एक मत नहीं हो पा रहे हैं नेता

कांगे्रस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह का एलान कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा के बाद किया था। सिंधिया निजी कारणों से विदेश प्रवास पर होने के कारण राहुल गांधी के साथ मंदसौर नहीं आ पाए थे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उनके साथ थे। प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष अरूण यादव और प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह घटना के अगले ही दिन मंदसौर पहुंच गए थे। सिंधिया की अनुपस्थिति का भारतीय जनता पार्टी और कांगे्रस के कतिपय नेताओं ने जमकर प्रचार किया। सिंधिया को अपना विदेश दौरा बीच में ही छोड़कर वापस आना पड़ा। सिंधिया ने दिल्ली लैंड करने से पूर्व ही सत्याग्रह का कार्यक्रम जारी कर दिया। सिंधिया का यह सत्याग्रह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए गए 27 घंटे के उपवास का जवाब माना जा रहा है। मध्यप्रदेश में सिंधिया ही एक मात्र चेहरा ऐसा है, जिससे भाजपा को चुनाव में चुनौती मिल सकती है। सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग कांग्रेस में लंबे समय से चल रही है। कांगे्रस के अधिकांश बड़े नेता मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा घोषित करने के पक्ष में नहीं हैं। राज्य कांगे्रस की राजनीति का जो वर्तमान परिदृश्य है उसमें कमलनाथ और सिंधिया के अलावा प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह, प्रदेशाध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और आदिवासी नेत कांतिलाल भूरिया भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। सुरेश पचौरी को पार्टी ने बर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में तथा भूरिया को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने मौका दिया था। दोनों ही चुनाव में कांगे्रस सरकार नहीं बना पाई थी।

पहली बार तीन दिन भोपाल में रूक रहे थे सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया कांगे्रस के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के पुत्र हैं। माधवराव सिंधिया की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीति में प्रवेश इस घटना के बाद ही हुआ था। इससे पहले वे सक्रिय राजनीति में नहीं थे। सिंधिया अपनी पारिवारिक परंपरागत सीट गुना-शिवपुरी से सांसद हैं। प्रदेश की राजनीति में कमलनाथ, अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह का समर्थन करते रहे हैं। माधवराव सिंधिया से उनके राजनीतिक रिश्ते कभी भी सहयोगात्मक नहीं रहे। कांगे्रस के राजनीतिक समीकरणों में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। पंद्रह साल के राजनीतिक कैरियर में पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तीन दिन भोपाल में रहने का कार्यक्रम बनाया है। इससे कांगे्रस की राजनीति में हडकंप मच गया। सिंधिया इससे पहले पार्टी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भोपाल आते रहे हैं। लेकिन, वे एक रात से ज्यादा कभी रूके नहीं। यही स्थिति कमलनाथ की रही है। कमलनाथ के पास भोपाल में मुख्यमंत्री निवास से लगा हुआ एक बंगला भी है। यह बंगला खाली पड़ रहता है। पिछले दिनों बंगले में कुछ नवीनीकरण के कुछ कार्य हुए थे। इसके बाद से ही कमलनाथ को राज्य कांगे्रस का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा तेज है। संभवत: यही वजह है कि कमलनाथ सिंधिया के साथ मंच साझा कर अटकलों का रूख मोड़ना नहीं चाहते हैं। मध्यप्रदेश कांगे्रस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने बताया कि 17 जून को खलघाट में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कमलनाथ ने अपनी सहमति दे दी है। कमलनाथ सिंधिया के सत्याग्रह में भोपाल नहीं आ रहे हैं। प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष अरूण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया और सांसद विवेक तन्खा सत्याग्रह में हिस्सा लेगें।

सिंधिया का कार्यक्रम फेल करने के लिए है खलघाट का प्रदर्शन

कांगे्रस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया यदि अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सत्याग्रह जारी रखते हैं तो 72 घंटे की अवधि 17 जून को दोपहर तीन बजे पूरी होती। खलघाट में किसान महापंचायत आयोजित किए जाने का समय सुबह ग्यारह बजे का दिया गया है। आयोजक अरूण यादव प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, इस कारण कांगे्रस के कार्यकर्त्ता और पदाधिकारियों की मजबूरी है कि वे खलघाट पहुंचे। अरूण यादव ने सभी पदाधिकारियों को कार्यकर्त्ताओं के साथ खलघाट पहुंचने के निर्देश दिए हैं। भोपाल में सिंधिया के सत्याग्रह में शामिल होने वाले पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता उसी स्थिति में खलघाट पहुंच सकता है, जब वह 16 जून को दोपहर तक रवाना हो जाए।भोपाल से खलघाट की दूरी लगभग तीन सौ किलोमीटर है। खलघाट मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है। अरूण यादव ने खलघाट के कार्यक्रम की घोषणा, सिंधिया का कार्यक्रम आने के बाद की। बताया जाता है कि सिंधिया ने अरूण यादव से किसान महापंचायत की तारीख आगे बढ़़ाने का अनुरोध भी किया था। अरूण यादव तैयार नहीं हुए। टकराव की स्थिति को टालने के लिए सिंधिया को सत्याग्रह की अवधि 72 से घटाकर 50 घंटे करने का सुझाव दिया गया है। सिंधिया ने अब तक अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया है। मध्यप्रदेश कांगे्रस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि खलघाट का कार्यक्रम सत्याग्रह का ही हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि 14 जून से 72 घंटे तक चलने वाला सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ होकर 17 जून को खरगोन जिले के खलघाट में एक ह्यह्यविशाल किसान महापंचायतह्णह्ण के रूप में समाप्त होगा।

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