राधेश्याम जुलानिया को आखिर क्यों गंवाना पड़ी बोर्ड ऑफिस की कुर्सी

राधेश्याम जुलानिया 1985 बैच के आईएएस अफसर।कॉडर मध्यप्रदेश

मूल निवासी भी मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के हैं। इसी साल तीस सितंबर को रिटायर होना है।

राधेश्याम जुलानिया का सबसे लंबा कार्यकाल वल्लभ भवन यानि मध्यप्रदेश के मंत्रालय में जल संसाधन विभाग में रहा।

जहां भी रहे कुछ न कुछ विवाद की स्थिति बनी।

शुरू से कैरियर का ग्राफ एक समान बना रहा। ठप्पे से नौकरी करने का।

मध्यप्रदेश विधानसभा
मध्यप्रदेश विधानसभा

राधेश्याम जुलानिया अंग्रेजों के जमाने के नौकरशाहों की तरह काम करने के आदी वे शुरू से ही रहे हैं।

अपर कलेक्टर स्तर पर ही उन्हें फील्ड से बुलाकार समाज कल्याण विभाग में अपर संचालक बना दिया गया था।

तमाम विवादों के बाद भी किसी मुख्यमंत्री ने जुलानिया की सीआर में उनके

अचारण और कार्य व्यवहार को लेकर कोई निगेटिव टीप नहीं लिखी।

यही कारण है कि वे भारत सरकार के सचिव के पद तक पहुंच गए।

लेकिन कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उनकी राज्य में वापस कर दी गई। वे खेल सचिव थे।

कई खेल संगठनों ने गृह मंत्री अमित शाह से जुलानिया के व्यवहार पर आपत्ति प्रकट की थी।

तत्काल केन्द्र सरकार ने रवानगी डाल दी।

केन्द्र सरकार में उनकी प्रतिनियुक्ति लगभग एक साल की रही।

वे फरवरी 2019 में गए थे और अप्रैल 2020 में वापस आ गए।

जुलानिया वर्ष 2010 में जल संसाधन विभाग में आए थे।

ई-टेंडरिंग घोटाले की आंच भी राधेश्याम जुलानिया के दामन पर है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल से उन्हें अचानक क्यों हटाया गया,इसकी कई कहानियां नौकरशाहों के बीच चल रही हैं।

राधेश्याम जुलानिया जहां भी रहे विवाद की स्थिति बनी।

एक कहानी एपल के लैपटॉप की भी है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष के तौर पर लगभग बीस  एपल के लैपटॉप खरीदने का फैसला जुलानिया ने लिया।

इन्हें कुछ मास्टरों को बांटा गया। एक अपने पास रख लिया।

शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरूण शमी ने इसकी रिपोर्ट उच्च स्तर पर दी।

शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचाय।

इससे गंभीर विषय दसवीं बोर्ड की परीक्षा पैटर्न बदलने का था।

शिक्षा नीति से जुडा मामला भी था। जिन मामलों में फैसला सरकार को लेना चाहिए, उसमें मंडल में जो जुलानिया करें वही सही हो रहा था।

खैर राधेश्याम जुलानिया ने तबादला आदेश मिलते ही मंत्रालय में अपनी ज्वाइनिंग दे दी।

अब उन्हें इंतजार काम का है।

मंत्रालय में उन्हें किसी विभाग की जिम्मेदारी दी जाएगी, लगता नहीं है।

कारण बैच के ही इक़बाल सिंह बैंस का मुख्य सचिव होना है।

बैच की वरिष्ठता सूची में जुलानिया के ठीक नीचे बैंस का नाम है।

विस्तृत के लिए देखें http://powergallery.in/

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