नजारा तो सब्जी मंडी का है

नजारा तो सब्जी मंडी का है पंचायत सचिवों की हड़ताल से सरकार की जमकर फजीहत हुई। उसके बाद राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। 108 के कर्मचारियों की हड़ताल ने तो हा
नजारा तो सब्जी मंडी का है पंचायत सचिवों की हड़ताल से सरकार की जमकर फजीहत हुई। उसके बाद राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। 108 के कर्मचारियों की हड़ताल ने तो हा

नजारा तो सब्जी मंडी का है

पंचायत सचिवों की हड़ताल से सरकार की जमकर फजीहत हुई। उसके बाद राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। 108 के कर्मचारियों की हड़ताल ने तो हालात ऐसे बना दिए कि जैसे सब्जी मंडी में होते हैं। हर आदमी ग्राहक को लुभाने के लिए चिल्ला रहा है। तीनों मामले काफी दिलचस्प हैं।
पंचायत सचिवों को यदि हड़ताल पर जाना पड़ा तो इसके लिए जिम्मेदारी विभाग के आवास योजनाओं से जुड़े कतिपय आदेश थे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया का काम करने का अपना अंदाज है। उन्होंने कोई फैसला ले लिया तो बदलाव मुश्किल से ही करते हैं। जुलानिया के कारण सरकार की ओर से कोई मंत्री अथवा मध्यस्थ पंचायत सचिवों की हड़ताल खत्म कराने के लिए आगे नहीं आया।
लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने कदम बढ़ाए तो वार्ता कक्ष में ही विवाद हो गया। स्थिति तू तू-मैं मैं तक जा पहुंची।
राजस्व कर्मचारियों की कहानी भी गौर करने लायक है। आयुक्त भू-अभिलेख ने जमीनों के कम्प्यूटराइजेशन के लिए जो सॉफ्टवेयर उपयोग किया, उसने प्रदेशभर की हजारों एकड़ सरकारी जमीन प्रायवेट कर दी। किसी जमीन किसी के नाम दर्ज हो गई।
राजस्व कर्मचारियों ने जब सरकार के सामने बात रखी को किसी ने ध्यान नहीं दिया। वे हड़ताल पर चले गए। यहां भी सरकार ने समस्या को हल करने में रुचि नहीं दिखाई। सबसे ज्यादा हास्यास्पद स्थिति 108 कर्मचारियों की है। ठेके के इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य विभाग पंगु हो गया। सरकार के किसी भी अधिकारी ने उस कंपनी को नोटिस नहीं दिया, जिसके पास 108 का ठेका है।ये मामले बताते हैं कि दाल कितनी काली हो चुकी है।

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