इस नाग पंचमी पर विधि विधान से पूजन से खुल सकते हैं भाग्य के द्वार

shri vishnu
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नाग पंचमी का त्यौहार इस बार 25 मार्च दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन नाग मंत्र का जप कर जीवन में आ रहीं तमाम बाधाओं को दूर किया जा सकता है। यद्यपि शास्त्रों में काल सर्प दोष का कोई उल्लेख नहीं है। इसके बाद भी कतिपय ज्योतिष और पंडित कुंडली में काल सर्प दोष बताकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। शास्त्रों में राहू को एशर्वय देने वाला भी बताया गया है। सनातन परंपरा में तीज-त्यौहारों पर होने वाली पूजा-पाठ बुरे ग्रहों के प्रभावों को कम करने में मदद करती है। त्यौहारों पर विशेष पूजन के जरिए गंभीर दुष्प्रभावों को कम करने का जतन किया जाता है। किसी व्यक्ति को यदि स्वपन में लगातार सांप दिखाई देते हैं रोज नाग मंत्र बोलना चाहिए। कम से कम पांच बार मंत्र पढ़ने से सपनों सांप दिखाई देना बंद होने लगता है।

नाग पंचमी पर इस मंत्र का जप से होंगी सभी बाधाएं दूर

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि अर्थात नागपंचमी को लेकर ऐसी मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नागदेवता का पूजन करता है उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता। इस दिन विधि विधान के अनुसार नागदेवता की पूजा की जाना चाहिए। नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें। इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा (सोने, चांदी या तांबे से निर्मित हो सकती है) के सामने यह मंत्र बोलें-
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत।।

नाग गायत्री मंत्र और सर्प सूक्त होगा मददगार

इसके बाद पूजा व उपवास का संकल्प लें। नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, फूल, धूप, दीप से पूजा करें व सफेद मिठाई का भोग लगाएं। यह प्रार्थना करें-
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित पृथिवीतले।।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
प्रार्थना के बाद नाग गायत्री मंत्र का जप करें-
ऊँ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।
इसके बाद सर्प सूक्त का पाठ करें
ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
अंत में नागदेवता की आरती करें और प्रसाद बांट दें। इस प्रकार पूजा करने से नागदेवता प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते है।

आज का पंचांग

दिनांक 24 जुलाई 2020
दिन – शुक्रवार
विक्रम संवत – 2077 (गुजरात – 2076)
शक संवत – 1942
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – वर्षा
मास – श्रावण
पक्ष – शुक्ल
तिथि – चतुर्थी दोपहर 02:34 तक तत्पश्चात पंचमी
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी शाम 04:03 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी
योग – वरीयान् सुबह 08:59 तक तत्पश्चात परिघ
राहुकाल – सुबह 10:54 से दोपहर 12:33 तक
सूर्योदय – 06:10
सूर्यास्त – 19:19
दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण – विनायक-दुर्वा गणपति चतुर्थी
विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

नाग चंद्रेश्वर मंदिर में तीन सौ साल पहली बार श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं
विस्तृत पढ़ने के लिए देखे :- http://powergallery.in/news/cover-

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