हीरा कारोबारी ने दी 125 कर्मचारियों तोहफे को में स्कूटी

सूरत के हीरा कारोबारी लक्ष्मीदास वेकारिया चर्चा में हैं। उनके चर्चा में आने का कारण ये है कि उन्होंने अपने 125 कर्मचारियों को तोहफे में स्कूटी दी है। लक्ष्मीदास ने अपने कर्मचारी के काम से खुश होकर ऐसा उन्हें ये तोहफा दिया है । इस दौरान एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें स्कूटी बांटी गई। हर स्कूटी पर एक तिरंगा भी लगाया गया । आपको बता दें कि वेकारिया ने 2010 मे हीरे तराशने की फैक्ट्री शुरू की थी।
सूरत के हीरा कारोबारी लक्ष्मीदास वेकारिया चर्चा में हैं। उनके चर्चा में आने का कारण ये है कि उन्होंने अपने 125 कर्मचारियों को तोहफे में स्कूटी दी है। लक्ष्मीदास ने अपने कर्मचारी के काम से खुश होकर ऐसा उन्हें ये तोहफा दिया है । इस दौरान एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें स्कूटी बांटी गई। हर स्कूटी पर एक तिरंगा भी लगाया गया । आपको बता दें कि वेकारिया ने 2010 मे हीरे तराशने की फैक्ट्री शुरू की थी।

सूरत के हीरा कारोबारी लक्ष्मीदास वेकारिया चर्चा में हैं। उनके चर्चा में आने का कारण ये है कि उन्होंने अपने 125 कर्मचारियों को तोहफे में स्कूटी दी है। लक्ष्मीदास ने अपने कर्मचारी के काम से खुश होकर ऐसा उन्हें ये तोहफा दिया है ।

इस दौरान एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें स्कूटी बांटी गई। हर स्कूटी पर एक तिरंगा भी लगाया गया । आपको बता दें कि वेकारिया ने 2010 मे हीरे तराशने की फैक्ट्री शुरू की थी।

वेकारिया अकेले नहीं

हालांकि, गुजरात में ऐसा करने वाले वेकारिया अकेले नहीं हैं। वहीं के हीरा कारोबारी सवजी भाई ढोलकिया भी कर्मचारियों को तोहफे देकर सुर्खियों में रहे हैं।

ढोलकिया ने पिछले साल हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स के कर्मचारियों को दिवाली बोनस के तौर पर 400 फ्लैट्स और 1260 कारें गिफ्ट की थीं। इस दौरान कंपनी ने 51 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 56 कर्मचारियों में ज्वेलरी भी बांटी गई थी।

2014 में भी सवजी भाई ने अपनी कंपनी के करीब 1300 वर्कर्स को कारें, मकान और ज्वेलरी दिए थे।

तीन साल पहले सावजीभाई ने शुरू की थी परंपरा

हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स के मालिक सावजीभाई ने 2013 में इस ट्रेंड की शुरुआत की थी जब उन्होंने अपने 1260 कर्मचारियों को गाड़ी गिफ्ट में दी थी। नए साल के बोनस के रुप में कुल 1200 डेटसन रेडी देने का ऐलान किया और डेटसन की ओर से एक दिन में ही 650 गाड़ियों को डिलिवरी कर दी। गिफ्ट की गई गाड़ियों में सभी गाड़ियों के चारों ओर तिरंगे रंग के रंगों से कवर किया गया था।

गुजरात के दुधाला गांव के रहने वाले सवजीभाई ने 1977 में 12.50 रुपये लेकर अमरेली से सूरत आये थे। सूरत में सवजीभाई ने 1977 में बतौर हीराधीश अपनी जिंदगी की शुरुआत की थी। और उस वक्त महीने में उन्हें 169 रुपये पगार के तौर पर मिलते थे। जिस कंपनी में वो काम करते थे उसी कंपनी के मालिक बन गए।

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