क्या मुख्य सचिव से नाराज हैं सीएम

क्या मुख्य सचिव से नाराज हैं सीएम सिविल सर्विस-डे से लेकर समाधान तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार नौकरशाही पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। नौकरशाही यह
क्या मुख्य सचिव से नाराज हैं सीएम सिविल सर्विस-डे से लेकर समाधान तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार नौकरशाही पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। नौकरशाही यह

क्या मुख्य सचिव से नाराज हैं सीएम

सिविल सर्विस-डे से लेकर समाधान तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार नौकरशाही पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। नौकरशाही यह समझ नहीं पा रही है कि मुख्यमंत्री आखिर किस बात पर इतने नाराज हैं। अफसरों के मुताबिक प्रदेश में सभी कुछ ठीकठाक चल रहा है। आनंद का दौर है। मुख्यमंत्री की आनंद यात्रा में अफसर भी शामिल हैं। यह आनंद यात्रा तीसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने के साथ ही शुरू हो गई थी। शपथ लेते ही आनंद के माहौल में ही सरकार लोकसभा चुनाव में लग गई थी। उसके बाद से सिंहस्थ सरकार की प्राथमिकता में आ गया।

सिंहस्थ में सरकार यानि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जैसा चाहा वैसा ही हुआ। प्रशासनिक मशीनरी ने सरकारी आयोजन का जमकर संघी और भाजपाईकरण किया। सिंहस्थ निपटा तो परिणाम आनंद विभाग के गठन के रूप में सामने आया। सरकार फिर आनंद में डूब गई। नेकी की दीवार से लेकर गुल्ली-डंडा तक सरकार ने खेला। आनंद ही आनंद बरसा। इसके बाद सरकार नर्मदा यात्रा में व्यस्त हो गई।

इस यात्रा के समापन के बाद सरकार के एजेंडा में अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव हो जाएंगे। प्रशासन को देखने की फुर्सत है किसे? जो देख रहे हैं उन्हें सिर्फ हरा ही हरा दिख रहा है। खैर ये तो नजर का फर्क है। हम यहां बात कर रहे थे कि मुख्यमंत्री नारज किससे हैं? क्या मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह की प्रशासनिक सूझबूझ से मुख्यमंत्री का तालमेल नहीं हो पा रहा है। प्रशासन के मुखिया बसंत प्रताप सिंह ही हैं।

यदि कोई अधिकारी गड़बड़ी कर रहा है तो कार्यवाही भी उन्हें ही करना है। लेकिन, वे कर कुछ नहीं पा रहे। उनकी स्थिति तो अनचाहे बच्चे की तरह है। भू-तल से लेकर पांचवी मंजिल तक ऐसे कई अफसर हैं जो बसंत प्रताप सिंह की सत्ता और उनके निर्देशों को स्वीकार करने के लिए ही तैयार नहीं हैं?

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