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दिनेश गुप्ता

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लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं पावर गैलरी पत्रिका के मुख्य संपादक है. संपर्क- 9425014193

मीन राशि वालों के लिए आर्थिक समृद्धि वाला दिन

rashifal

मेष राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं और भविष्य को लेकर चिंता सता सकती है। नए लोगों से मुलाकात हो सकती है, जिनके सहयोग से कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। मानसिक उथल-पुथल पर काबू रखने का प्रयास करें, अन्यथा डिप्रेशन में जा सकते हैं। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और परिजनों का सहयोग मिलेगा। शुभ अंक – 8 और शुभ रंग – पीला है।

वृषभ राशि के लोगों के कार्यक्षेत्र में परेशानी का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन अपने प्रयासों से कार्यों में सफलता मिलेगी। अधिकारी वर्ग आपके काम से प्रसन्न रह सकते हैं। कार्यभार की अधिकता रहेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सनिध्य प्राप्त हो सकता है। समय व्यवसाय में लाभ वृद्धि के संकेत दे रहा है। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेगा। सेहत को लेकर सावधान रहें। धार्मिक कार्यों में रूची ले सकते हैं। शुभ अंक – 1 और शुभ रंग – गुलाबी है।

मिथुन राशि के लोगों के का दिन मिलाजुला रहेगा। कारोबार में छोटी-छोटी परेशानियां आ सकती हैं। कार्यक्षेत्र में काम की अधिकता रहेगी, लेकिन कठिन परिश्रम से कार्यों में सफलता मिलेगी। भागदौड़ की स्थिति रहने से थकान का अनुभव कर सकते हैं। मानसिक रूप से तनाव भी बना रह सकता है। धार्मिक और सामाजिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। सेहत खराब हो सकती है। खान-पान का ध्यान रखें और क्रोध करने से बचें। शुभ अंक – 4 और शुभ रंग – भूरा है।

कर्क राशि के लोगों के का दिन अच्छा रहेगा। कारोबार अच्छा चलेगा और कामकाज विस्तार की नई योजनाएं शुरू कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में अनुकूलता बनी रहेगी। अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। काम की अधिकता रहेगी, लेकिन कठिन परिश्रम से सभी कार्य सफल होंगे। राजनीतिक क्षेत्र में आपका प्रभाव बढ़ सकता है। धार्मिक कार्य में मन लग सकता है। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। सेहत को लेकर सावधान रहना होगा। शुभ अंक – 5 और शुभ रंग – ग्रे है।

सिंह राशि के लोगों का आज का दिन शुभ फलदायक रहेगा। कारोबार में आकस्मिक धन लाभ और नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के सहयोग से सभी कार्य सफल होंगे और आर्थिक लाभ की स्थिति रहेगी। प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में निवेश की योजना बना सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा है और प्रतियोगिताओं में सफलता मिलेगी। परिवार का माहौल आनंदमय रहेगा। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। शुभ अंक – 9 और शुभ रंग – महरून है।

कन्या राशि का :आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में छोटी-छोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन कड़ी मेहनत से कार्यों में सफलता मिलेगी। कार्यभार अधिक रहेगा, जिससे मानसिक और शारीरिक थकान का अनुभव कर सकते हैं। वाणी पर संयम और क्रोध पर नियंत्रण रखें, अन्यथा विवाद में फंस सकते हैं। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा, लेकिन ध्यान रखें कि आपकी बातों से किसी परिजन को ठेस न पहुंचे। खानपान का ध्यान रखें। शुभ अंक – 2 और शुभ रंग – आसमानी है।

तुला राशि के लोगों का आज का दिन मिलाजुला रहेगा। कार्यक्षेत्र में प्रतिकूलता का माहौल रहेगा। प्रयासों के बाद भी कार्यों में सफलता नहीं मिलने से निराश हो सकते हैं। नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी। क्रोध की अधिकता रहेगी, इसलिए वाद-विवाद से बचना होगा। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेगा और परिजनों की भरपूर मदद मिलेगी। परिजनों के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। धार्मिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। शुभ अंक – 7 और शुभ रंग – संतरी है।

वृश्चिक राशि के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। कारोबार में आर्थिक लाभ मिलने के योग हैं। अटके हुए कार्य बन सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है, जो कि लाभ दायक रहेगी। परिवार के साथ दिन प्रसन्नतापूर्वक बीतेगा। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा है। मेहनत के सार्थक परिणाम मिल सकते हैं। सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भाग ले सकते हैं। सेहत को लेकर सतर्क रहें। शुभ अंक – 3 और शुभ रंग – हरा है।

धनु राशि के लिए आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। कारोबार विस्तार की योजनाएं बना सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को स्थान परिवर्तन के साथ तरक्की के अवसर मिलेंगे और धनलाभ की स्थिति रहेगी। सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे, जिससे समाज में सम्मान बढ़ेगा। परिवार का माहौल आनंदमय रहेगा। विद्यार्थियों को परीक्षाओं में सफलता मिलेगी। खान-पान का ध्यान रखें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ अंक – 8 और शुभ रंग – श्वेत है।

मकर राशि वालों का आज का दिन मिलाजुला रहेगा। कारोबार अच्छा चलेगा, लेकिन कार्यक्षेत्र में कुछ परेशानी आ सकती है। परिश्रम की अधिकता रहेगी, जिससे कार्यों में सफलता मिलेगी और व्यावसायिक लाभ की स्थिति रहेगी। धार्मिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जा सकते हैं। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। वाणी पर संयम रखें, अन्यथा किसी से विवाद हो सकता है। सेहत को लेकर सावधानी रखें। शुभ अंक – 1 और शुभ रंग – स्लेटी है।

कुंभ राशि वालों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। मन में स्फूर्ति का अहसास होगा और नये कार्य नई ऊर्जा के साथ शुरू कर सकेंगे। सहकर्मियों और परिजनों का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विरोधी शांत रह सकते हैं। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। यात्रा को टालने का प्रयास करें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें और खानपान का ध्यान रखें। शुभ अंक – 6 और शुभ रंग – केसरी है।

मीन राशि वालों के लिए आज का दिन आपके लिए शक्तिवर्धक रह सकता है। घर में धार्मिक कार्य हो सकते है। पढ़ाई लिखाई में रुचि बढ़ सकती है। कारोबार में आकस्मिक धन लाभ और नौकरी में पदोन्नति के योग बन रहे हैं। आय में वृद्धि से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जमीन-जायदाद और वाहन की खरीदी होने की संभावना रहेगी। परिवार का माहौल सुखमय रहेगा। सेहत भी अच्छी बनी रहेगी, लेकिन परिजनों से विवाद करने से बचना होगा। शुभ अंक – 4 और शुभ रंग – नीला है।

आज वृश्चिक राशि वालों के लिए क्या है मंशापूरण उपाय

!!🍒!! राशिफल !!🍒!!
☀️ मेष राशि :- आज मन परेशान हो सकता है, संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध एवं वाद-विवाद से बचें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। विदेश यात्रा के अवसर मिल सकते हैं। माता-पिता का सानिध्य मिलेगा। परिवार के साथ यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी। खर्च अधिक होंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा। धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। धन की प्राप्ति हो सकती है। शुभ अंक – 2 और शुभ रंग – हरा है।
☀️ वृष राशि :- आज वाणी में मधुरता रहेगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। लेखनादि-बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। बौद्धिक कार्यों से आय में वृद्धि होगी। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कार्यभार में भी वृद्धि होगी। किसी दूसरे स्थान पर जाना पड़ सकता है। परिवार एवं भाइयों के साथ किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जा सकते हैं। खर्चों की अधिकता रहेगी। स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। शुभ अंक – 6 और शुभ रंग – श्वेत है।
☀️ मिथुन राशि :- आज मानसिक शान्ति रहेगी। व्यर्थ के विवादों से बचें। कार्यक्षेत्र में परिश्रम अधिक रहेगा। कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। खर्च अधिक रहेंगे। वाणी में सौम्यता रहेगी। फिर भी आत्मसंयत रहें। माता का सानिध्य मिलेगा। अचानक धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की उम्मीद भी है। अफसरों से वैचारिक मतभदे हो सकते हैं। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। शुभ अंक – 9 और शुभ रंग – स्लेटी है।
☀️ कर्क राशि :- आज कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ सकता है। कारोबार का विस्तार हो सकता है। पिता से आर्थिक सहयोग मिल सकता है। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के मनोभाव रहेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। धैर्यशीलता में कमी आएगी। बातचीत में संयत रहें। वाणी में कठोरता का प्रभाव हो सकता है। नौकरी में विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। किसी बुजुर्ग से धन की प्राप्ति हो सकती है। शुभ अंक – 7 और शुभ रंग – केसरी है।
☀️ सिंह राशि :- आज आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। मानसिक शान्ति रहेगी। कुटुम्ब-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्रों पर खर्च बढ़ सकते हैं। कारोबार से धन लाभ में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर मिलेंगे। किसी पुराने मित्र से भेंट हो सकती है। संचित धन में कमी आ सकती है। भाई-बहनों के सहयोग से किसी पैतृक कारोबार का विस्तार हो सकता है। सुस्वादु खान-पान में रुचि बढ़ सकती है। तनाव से बचें। शुभ अंक – 5 और शुभ रंग – नीला है।
☀️ कन्या राशि :- आज मन शान्त रहेगा। आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। खर्चों की अधिकता से परेशान हो सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। शैक्षिक कार्यों के लिए यात्रा पर जा सकते हैं। किसी राजनेता से भेंट हो सकती है। जीवन-साथी के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। आशा-निराशा के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं। वाहन सुख की प्राप्ति हो सकती है। शुभ अंक – 6 और शुभ रंग – पीला है।
☀️ तुला राशि :- आज आशा-निराशा के भाव मन में हो सकते हैं। जीवन-साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कारोबार में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक शान्ति रहेगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। कला एवं संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। भवन सुख का विस्तार होगा। खर्चों की अधिकता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। शुभ अंक – 3 और शुभ रंग – गुलाबी है।
☀️ वृश्चिक राशि :- आज आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परन्तु अतिउत्साही होने से बचें। नौकरी में अफसरों से व्यर्थ के वाद-विवाद हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयां आ सकती हैं। कारोबार में वृद्धि होगी, परन्तु कुछ समस्याओं के लिए भी तैयार रहें। भाइयों का सहयोग मिलेगा। परिश्रम अधिक रहेगा। जीवन-साथी का साथ मिलेगा। शैक्षिक कार्यों में सफलता के योग बन रहे हैं। विदेश यात्रा पर भी जाना हो सकता है। शुभ अंक – 1 और शुभ रंग – भूरा है।
☀️ धनु राशि :- आज मानसिक शान्ति रहेगी, परन्तु नकारात्मक विचारों से बचें। सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शैक्षिक कार्यों के लिए विदेश जा सकते हैं। शासन-सत्ता का सहयोग मिलेगा। भवन सुख में वृद्धि होगी। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। आलस्य की अधिकता रहेगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ सकते हैं। शुभ अंक – 8 और शुभ रंग – ग्रे है।
☀️ मकर राशि :- आज आत्मविश्वास बहुत रहेगा, परन्तु धैर्यशीलता में कमी रहेगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। आय के साधन बन सकते हैं। अपनी भावनाओं को वश में रखें। मन में निराशा एवं असन्तोष के भाव रहेंगे। वाहन सुख में वृद्धि के योग बन रहे हैं। खर्चों की अधिकता से परेशान हो सकते हैं। भवन के रखरखाव एवं साज-सज्जा के कार्यों पर खर्च बढ़ सकते हैं। शुभ अंक – 6 और शुभ रंग – महरून है।
☀️ कुंभ राशि :- आज मन परेशान रहेगा। धैर्यशीलता बनाये रखने के प्रयास करें। किसी मित्र के सहयोग से आय वृद्धि के साधन बन सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। नौकरी में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। धर्म के प्रति श्रद्धाभाव रहेगा। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा। उच्चपद की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य को लेकर चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकती है। शुभ अंक – 7 और शुभ रंग – आसमानी है।
☀️ मीन राशि :- आज किसी रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबार में बढ़ोतरी होगी। आय के नए स्रोत विकसित होंगे। सन्तान की ओर से सुखद समाचार मिल सकते हैं। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। क्रोध एवं आवेश की अधिकता रहेगी। आत्मसंयत रहें। किसी पैतृक सम्पत्ति से धनार्जन के स्रोत विकसित हो सकते हैं। परिवार में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा। शुभ अंक – 4 और शुभ रंग – संतरी है।*
!!🥀!! सुविचार !!🥀!!
”सत्यमेव व्रतं यस्य दया दीनेषु सर्वदा।
कामक्रोधौ वशे यस्य स साधुः – कथ्यते बुधैः॥”
अर्थात :- ‘केवल सत्य’ ऐसा जिसका व्रत है, जो सदा दीन की सेवा करता है, काम-क्रोध जिसके वश में है, उसी को ज्ञानी लोग ‘साधु’ कहते हैं। प्रभु आप सभी का सर्व-मङ्गल करें।
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शिवराज सिंह चौहान ने बाढ के हालात का जायजा लिया 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास से प्रोफ़ेसर कॉलोनी पहुंचकर अति वर्षा से उत्पन्न स्थितियों का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री से चौहान इस समय किलोल पार्क चौराहे के पास सिविल लाइंस क्षेत्र का जायजा ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विद्युत मंडल के कर्मचारियों द्वारा अति वर्षा से उत्पन्न विद्युत समस्याओं को हल करने के लिए तत्परता से की जा रही कार्यवाही का सिविल लाइंस क्षेत्र में अवलोकन किया।

विद्युत मंडल के कर्मचारियों की भूमिका की सराहना

शहर के विभिन्न स्थानों पर इस तरह की विद्युत समस्याओं के सुधार के लिए विद्युत मंडल के कर्मचारी निरंतर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान को प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री संजय दुबे ने भोपाल शहर और प्रदेश के अन्य स्थानों पर विद्युत कंपनियों के स्टाफ की ओर से की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव जल संसाधन ने बताया कि वे भी कलेक्टर से चर्चा कर रहे हैं। जिलों में स्थिति नियंत्रण में है। एक 2 जिलों में यदि स्थिति ज्यादा गंभीर है तो वहां आवश्यक राहत के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल राजगढ़, रायसेन और विदिशा में 130 और 140 मिलीमीटर से अधिक पानी गिरा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के दल जरूरत के अनुसार आवश्यक स्थानों पर पहुंचेंगे।इसके निर्देश दिए गए हैं ।विदिशा जिले के ग्रामों से निरंतर संपर्क बना हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान को प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री संजय दुबे ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर अति वर्षा से उत्पन्न परिस्थितियों और विद्युत समस्याओं के सुधार की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा रात्रि में एक बजे स्टेट सिचुएशन रूम वल्लभ भवन में प्रदेश में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए विभिन्न कलेक्टरों से चर्चा की और उन्हें निर्देश दिए।

श्री चौहान ने सिचुएशन रूम को कार्य करते रहने के निर्देश दिए हैं। यहां अधिकारी दल जिलों की जानकारी प्राप्त करते रहेंगे। जब तक वर्षा का यह सिस्टम कार्य कर रहा है जिलों की आवश्यकता पर तत्काल राहत के कदम उठाए जाएंगे।

रेमडेसिविर इंजेक्शन चोरी न होने की कहानी आखिर किन चेहरों को बचाने के लिए रची गई

Remdesivir, the only drug cleared to treat Covid-19. It is a generic drug and not a brand name. Fake lable created by photographer.

तीन दिन पहले भोपाल के हमीदिया अस्पताल के दवा स्टोर से 863 रेमडेसिविर इंजेक्शन के

चोरी होने की रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी।

रेमडेसिविर इंजेक्शन। इसका नाम आज देश का हर व्यक्ति उस तरह ही जानता है,

जिस तरह सिरदर्द की दवा के रूप में डिस्प्रीन का नाम जानता है।

रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन की ओर से दर्ज कराई गई थी।

अब अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इंजेक्शन चोरी नहीं हुए थे। इंजेक्शन का रिकार्ड ठीक से नहीं रखा गया था।

इस ताजा खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

माना यह जा रहा है कि सरकार बदनामी से बचने के लिए रिकार्ड अपडेट न होने की आड ले रही है।

जांच के दौरान पुलिस ने एक डायरी जब्त की थी,

जिसमें इंजेक्शन की मांग करने वाले डॉक्टर का नाम लिखा हुआ था।

बताया जाता है कि कतिपय मंत्री और आईएएस अफसरों ने अपने करीबियों के लिए

अस्पताल से इंजेक्शन मौखिक आदेश से इश्यू कराए थे। इंजेक्शन दिल्ली भेजे जाने का खुलासा भी पुलिस ने ही किया था।

भोपाल के सबसे बड़ा अस्पताल है हमीदिया

ऊँगली इजेक्शन चोरी होने की घटना सामने आने के बाद डिवीजनल कमिश्नर कवीन्द्र कियावत ने

डॉक्टर आईडी चौरसिया से अस्पताल अधीक्षक के पद का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया।

डॉ.चौरसिया गांधी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक न्यूरो सर्जरी के पद पर कार्यरत हैं।

चौरसिया के स्थान पर डॉ.लोकेन्द्र दवे को अस्पताल का अधीक्षक बनाया गया है। भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज स्वशासी है।

इसके चेयरमेन डिवीजन कमिश्नर हैं। अस्पताल मेडिकल कॉलेज का ही हिस्सा है।

अस्पताल के स्टोर से रेमडेसिविर के गायब होने की एफआइआर रविवार को दर्ज कराई गई थी।

भोपाल में कोरोना संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर है।

पिछले एक सप्ताह से हर दिन सौ ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट और कब्रिस्तान में हो रहा है।

रेमडेसिविर को कोरोना मरीज के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन के तौर पर प्रचार मिला है।

इसके कारण हर गंभीर मरीज के परिजन इंजेक्शन के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं।

हमीदिया अस्पताल को इंजेक्शन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल के कारण उपलब्ध हो सके।


इंजेक्शन देने में नहीं किया प्रक्रिया का पालन

इंजेक्शन चेारी होने की जांच भोपाल क्राइम ब्रांच कर रही है।

क्राइम ब्रांच ने दावा किया कि कथित तौर चोरी गए

इंजेकशन में चार सौ  इंजेक्शन की जानकारी मिल गई है। गफलत रिकार्ड में इंट्री न करने के कारण हुई।

इस खुलासे से पहले पुलिस ने पूर्व अस्पताल अधीक्षक डॉ.चौरसिया से लंबी पूछताछ की और उनके बयान रिकार्ड पर लिए।

स्टोर की जिम्मेदारी डॉ. संजीव जयंत के पास है। संजीव जयंत की आशंका के आधार पर डिविजनल कमिश्नर ने

मामले की एफआईआर दर्ज कराए जाने के आदेश दिए थे।

दिलचस्प यह है कि पुलिस ने जब घटना स्थल का मुआयना किया था

तब मीडिया को बताया कि चोरी जाली काटकर हुई है।

सीसीटीव्ही फुटेज को भी पुलिस ने जांच में लिया है।

फुटेज में क्या दिखाई दिया,इस बात का खुलासा नहीं किया गया है।

अस्पताल प्रबंधन अथवा सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि

हमीदिया अस्पताल के स्टॉक में कुल कितने रेमडेसिविर इंजेक्शन आए थे। कितने इंजेक्शन मरीजों को लगाए गए।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह दावा किया गया था कि अस्पताल के

डॉक्टरों ने जिन मरीजों के नाम इंजेक्शन लगाना बताए गए हैं,उसमें कई मर चुके हैं।

इंजेक्शन इष्यू करने के लिए सरकार की ओर से तय गाइड लाइन का पालन भी अस्पताल प्रबंधन ने नहीं किया।

इंजेक्शन को लेकर जब हायतौबा मची तो ग्यारह अप्रैल को

स्वास्थ्य विभाग ने इंजेकशन को लेकर एक गाइड लाइन जरी की।

इस गाइड लाइन के अनुसार डॉक्टर की अनुशंसा मंजूरी के लिए सिविल सर्जन के पास भेजा जाना थी।

सिविल सर्जन मरीज की रिपोर्ट देखकर इंजेक्शन के उपयोग की मंजूरी के लिए अधिकृत थे।

सभी सरकारी अस्पतालों को इंजेक्शन का रिकार्ड विधिवत रखने के लिए कहा गया था।

रेमडेसिविर इंजेक्शन चोरी:  अस्पताल अधीक्षक बदलने से प्रवंधन पर उठी

क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल धाकड़ के कहते हैं कि

अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि इंजेक्शन का गलत वितरण किया गया।

पुलिस मामले की झ्­ाूठी रिपोर्ट दर्ज कराने पर डॉ. संजीव जयंत पर एफआईआर करने पर विचार कर रही है।

सरकारी स्तर पर लगातार यह प्रचारित किया जा रहा था

कि रेमडेसिविर गंभीर कोरोना मरीज की जान बचा ले,यह जरूरी नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि

दस प्रतिशत मरीजों पर ही इस दवा का असर देखा गया है।

रेमडेसिविर शोधात्मक औषधि है। मेडिकल की भाषा में कहा जाता है कि क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

मंत्रियों और अफसरों के कहने पर हुई इंजेक्शनों की बंदरबांट

देश में जिस तरह कोरोना की दूसरी लहर में जान बचाने को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है,

उसमें रेमडेसिविर की मांग सबसे ज्यादा है।

जबकि भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि

जो गंभीर रूप से प्रभावित नहीं है,उन पर इसका उपयोग न किया जाए। इसके बाद भी भोपाल में दवा ब्लैक में बिकी।

इंजेक्शन न मिलने के कारण कई परिवार हताशा और अवसाद में चले गए।

दूसरी और सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल के प्रबंधन ने इंजेक्शन किसे दिए,इसका प्रमाणित रिकार्ड भी नहीं है।

क्राइम ब्रांच को अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि कुछ इंजेक्शन

स्टोर रूम रिकार्ड में चढ़े बगैर बाहर से ही अन्य सरकारी अस्पतालों को दे दिए गए।

अस्पताल प्रबंधन का यह दावा बेहद हास्यास्पद है।

जब स्टोर तक इंजेक्शन आया ही नहीं तो चोरी हेाने की आशंका किस आधार पर व्यक्त की गई।

स्टोर में आता तो स्टॉक रजिस्टर में चढ़ता।

मांग के अनुसार रिलीज किए जाने का रिकार्ड भी रखा जाता।

इंजेक्शन का हिसाब-किताब स्टोर कीपर की कच्ची डायरी में है।

डॉक्टर के वाट्सअप रिकार्ड में है। किसके कहने पर कितने इंजेक्शन स्टोर से निकले।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर भोपाल कलेक्ट्रेट के अधिकारियों के संदेश पर इंजेक्शन स्टोर से बाहर निकले।

जिन हाथों में यह इंजेक्शन दिए गए उन्होंने क्या किया कोई नहीं जानता।

कुछ प्रायवेट अस्पतालों को भी हमीदिया के स्टोर रूम से इंजेक्शन दिए गए हैं।

कई प्रभावशाली नाम सामने आने के बाद मामले को ठंडा किया जा रहा है।

विस्तृत के लिए देखें http://powergallery.in/

डेथ ऑडिट से कैसे छुप सकती हैं कोरोना से हुई मौतें: सर्टिफिकेट का सच

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर
भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर जलती चिंताएं

डेथ ऑडिट अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यह प्रावधान नियमों में भी है। आखिर डेथ ऑडिट किया क्यों जाता है? इलाज के दौरान किसी मरीज की मौत हो जाने को चिकित्सा जगत भी गंभीरता से लेता है। रेमडेसिविर इंजेक्शन यदि डॉक्टर के द्वारा लिखा जा रहा है तो वह निश्चित तौर पर एक अंतिम कोशिश अपने मरीज को बचाने के लिए कर रहा होता है।पिछले साल कोरोना आने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। इसके पहले एक दिन जनता कर्फ्यू भी लगाया गया। लौटा-थाली भी लोगों ने बजाई थी। देश के पहले लॉकडाउन की काफी आलोचना हुई। पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन कारणों का उल्लेख किया,जिनके कारण लॉकडाउन करना पड़ा था। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियें से कहा कि गत वर्ष इन दिनों में हमारे हाल क्या थे। हमारे पास टेस्टिंग लैब ((testing lab)) नहीं थे। यहां तक कि मास्­क कहां से मिलेंगे भी चिंता का विषय था, पीपीई कि­ट नहीं थे। और उस समय हमारे लिए बचने का एकमात्र साधन बचा था लॉकडाउन, ताकि हम व्­यवस्­थाओं को एकदम से जितना तेजी से बढ़ा सकें और वो हमारी strategy काम आई। हम व्­यवस्­थाओं को बना सके, संसाधन खड़े कर पाए, हमारी अपनीcapability बढ़ाई। दुनिया से जहां से प्राप्­त कर सकते थे, कर पाए और लॉक­डाउन के समय का हमने उपयोग किया। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार- आज जो स्थिति है, आज जब हमारे पास सब संसाधन हैं तो हमारा बल और ये हमारी गवर्नेंस की कसौटी है, हमारा बल Micro Contentment Zone पर होना चाहिए। छोटे-छोटे Contentment Zone पर सबसे ज्­यादा होना चाहिए।

The Prime Minister, Shri Narendra Modi
The Prime Minister, Shri Narendra Modi


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसी थ्योरी पर चलते हुए लॉकडाउन से बचते दिखाई दे रहे हैं। यद्यपि राज्य के अधिकांश जिलों में सारी गतिविधियां रूक गईं हैं। ऑक्सीजन और रेमेडिसिविर इंजेक्शन की कमी ने लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है। संक्रमण जिस दर से बढ़ रहा है,उसके हिसाब से सरकार सिर्फ अनुमान लगा सकती है कि आने वाले दिनों में उसे कितने ऑक्सीजन बेड की आवश्यकता होगी? तैयारियां अनुमान आधारित करना होगीं। सरकार को संक्रमण रोकने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। जो तैयारियां सरकार अब कर रही है,वह मार्च के पहले सप्ताह में ही शुरू कर देना चाहिए थी।संक्रमण से सैकड़ों लोग रोज मर रहे हैं। सरकार आधिकारिक तौर पर इन मौतों की पुष्टि नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सफाई देते हैं कि मौत का ऑडिट किया जाता है। इसकी रिपोर्ट आने में समय लगता है। सरकार कह रही है इस कारण ही कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की संख्या नहीं बताई जा रही है। जो लोग स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं,उनके लिए मुख्यमंत्री का यह बयान हैरान कर रहा है। हर अस्पताल में डेथ ऑडिट अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यह प्रावधान नियमों में भी है। आखिर डेथ ऑडिट किया क्यों जाता है? इलाज के दौरान किसी मरीज की मौत हो जाने को चिकित्सा जगत भी गंभीरता से लेता है। रेमडेसिविर इंजेक्शन यदि डॉक्टर के द्वारा लिखा जा रहा है तो वह निश्चित तौर पर एक अंतिम कोशिश अपने मरीज को बचाने के लिए कर रहा होता है। डॉक्टर पर अपने पेशे का नैतिक दबाव भी होता है। मरीज के परिजनों का रूदन भी दबाव बढ़ाता है। डेथ ऑडिट की धारणा उन कारणों को तलाश करने के लिए विकसित की गई है,जिसमें यह पता लग सके कि मरीज को बचाने में संसाधनों की कमी थी,इलाज में लापरवाही थी अथवा इलाज समय पर नहीं मिला आदि-आदि। यह प्रक्रिया अस्पताल की आंतरिक प्रक्रिया है। लेकिन वर्तमान में जो मौत हो रही हैं,उसमें अस्पताल यह सर्टीफिकेट दे रहे हैं कि मृतक कोरोना संक्रमित था। इसी आधार पर अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है।

भोपाल के भदभदा श्मशान घाट कर जो तस्वीर सामने आई वह पत्थर दिल इंसान को भी झकझोर कर रख देगी। सरकार को मौत के आकंडे छुपाने से क्या फायदा है। सत्ताधारी दल भाजपा के कार्यकत्र्ता बचाव में इस तरह का सवाल करते सुनाई दे जाएंगे। सरकार नकारात्मक आकंडों के जरिए जनता में अपनी छवि नाकरा की नहीं बनाना चाहती। जिन के परिजन बिछड़ गए हैं। वे भी कुछ दिनों में आपदा को सिर्फ किस्सों में याद रखेंगे। मध्यप्रदेश में भाजपा के राज करने का इतिहास लंबा होता जा रहा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर चार बैठने का रिकार्ड भी बन चुका है। कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की तुलना में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ज्यादा मजबूत रही है। 2005 के बाद भाजपा को राज्य में मुख्यमंत्री नहीं बदलना पड़ा। पार्टी ने फैसले भी चौहान की मर्जी से ही लिए हैं। चाहे अनंत कुमार प्रभारी हो या फिर विनय सहस्त्रबुद्धे। शिवराज सिंह चौहान के पास मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने का सबसे ज्यादा अनुभव है। अनुभव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले नंबर हैं। ज्योति बसु की तरह की शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में अपनी पकड़ को बेहद मजबूत रखा। राज्य की नौकरशाही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। नौकरशाही के कारण ही वे वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में गच्चा खाए थे। अब कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए नौकरशाही के पास कोई जादुई पुडिया नहीं है। संसाधनों की कमी से हो रहीं मौतें आक्रोश की वजह बनती जा रही हैं

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नरेन्द्र मोदी के कोरोना माइक्रो कंटेनमेंट झोन फार्मूले पर कितना अमल किया?

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कोरोना माइक्रो कंटेनमेंट झोन बनाने की सलाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों को दी थी। मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में है जिसने पहले पीक के आंकड़ों को पार कर रेड झोन में लाकर अपने आपको खड़ा कर लिया है।

सलाह थ्री टी सलाह थी। टेस्ट,ट्रेक और ट्रीट। लेकिन तीनों पर कोई अमल मध्यप्रदेश में होता दिखाई नहीं दिया है।

कोरोना की दूसरे पीक में मानवता के मरने के जो रूप सामने आ रहे हैं,वे डरावने हैं। ये रूप सिस्टम की ही उपज हैं।

शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल जब यह कहते हैं कि जिसकी उम्र हो गई है,उसे मरना हैं

तो यह सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैयो को दर्शाता है।सिस्टम की मौत हो चुकी है।

इसके साथ-साथ मानवता भी मर गई है। दुनिया में जो आया है वह जाएगा।

राजा,रंक फकीर। जीवन का दान कोई नहीं दे सकता। आज नहीं तो कल मरना ही है।

यही वो सच है जिसका पता हर जीव को है। दुनिया से जाना कब है यह कोई नहीं जानता। लेकिन,कोई इस कारण जीवन जीना नहीं छोड़ देता कि उसे तो एक दिन मरना है।

तीरथ सिंह रावत और प्रेम सिंह पटेल की सोच समान 

प्रेम सिंह पटेल का यह बयान उसी तरह का है जिस तरह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने लड़कियों के फटी जींस पहनने के बारे में दिया था।।

सरकार ने जिस तरह से सीबीएसई और नीट पीजी की परीक्षाएं स्थगित की हैं,उस तरह से हरिद्वार में कुंभ का आयोजन भी सांकेतिक किया जा सकता था।

क्या किसी आखाड़े का कोई महामंडेलश्वर यह दावा कर सकता है कि उसकी मौत नहीं आना है।

वह संक्रमण की चपटे में नहीं आएगा?

साधु-संत समाज का ही हिस्सा हैं। वे भी सच और आपदा को जानते हैं।

मृत्यु अटल है यह भी जानते हैं। साधु-संतों का भी भरोसा अब सरकार से उठ रहा है।

वे भी मानते हैं कि लोगों की मौत स्वास्थ्य सेवाओं में कमी के कारण हो रही है।

इंसान की यदि स्वभाविक मौत होती है तो कोई सिस्टम को दोष नहीं देता।

जब इलाज के अभाव में लोग मरते हैं तो सवाल सिस्टम पर ही खड़े होते हैं।

हमारी व्यवस्था पर खड़े होते हैं। मुख्यमंत्री की क्षमता पर खड़े होते हैं।

दूसरा पीक हमारी प्रशासनिक ढिलाई के कारण

कोरोना के दूसरे पीक के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से पिछले सप्ताह बात की थी।

उन्होंने जिन बातों पर अमल करने की सलाह दी थी,

उस पर प्रेम सिंह पटेल की सरकार अर्थात शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने कितना अमल किया?

प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा था कि यह दूसरा पीक हमारी प्रशासनिक ढिलाई के कारण आ गया है।

मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में है जिसने पहले पीक के आंकड़ों को पार कर रेड झोन में लाकर अपने आपको खड़ा कर लिया है।

खुद प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश का उल्लेख किया है।

तस्वीर ऐसी नहीं है जिस पर मुख्यमंत्री या उनकी सरकार का कोई नुमांइदा उन बातों को गिनाए,जिसे करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी थी।

क्या सरकार का कोई नुमाइंदा यह बता सकता है कि हमने पंद्रह दिन पहले स्थिति का आकलन कर आवश्यक इंतजामात कर लिए थे।

कोई भी व्यवस्था यदि बेकसूर की जान ले लेती है तो वह अपराधी ही मानी जाएगी।

सिस्टम और मानवता की हत्या होने पर कोई गुनाहगार सिर्फ इसलिए माफ नहीं किया जा सकता क्यों कि वह संवैधानिक पद पर बैठा है।

मौजूदा दौर में फरियादी को आरोपी बनाकर सिस्टम ने खड़ा कर दिया है।
आदमी, आदमी को क्या देगा

जो भी देगा वही खुदा देगा

मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है

क्या मेरे हक में फ़ैसला देगा

जिन्दगी को करीब से देखो

इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा

हमसे पूछो दोस्ती का सिला

दुश्मनों का भी दिल हिला देगा

इश्क का ज़हर पी लिया जिसने

मसीहा भी क्या उसे दवा देगा
(सुदर्शन फकीर)

प्रधानमंत्री ने राज्यों को कोरोना माइक्रो कंटेनमेंट झोन बनाने की सलाह भी दी थी। सलाह थ्री टी सलाह थी।

टेस्ट,ट्रेक और ट्रीट। लेकिन तीनों पर कोई अमल मध्यप्रदेश में होता दिखाई नहीं दिया है।

शायद मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और उसके अफसरों ने प्रधानमंत्री की कोरोना माइक्रो कंटेनमेंट झोन की सलाह को भी जुमला मानकर अनदेखा किया है।

प्रशासनिक ढिलाई के कारण दूसरा पीक

प्रधानमंत्री की सलाह बेहद महत्वपूर्ण थी। उन्होंने सलाह दी कि जो भी व्यक्ति पॉजेटिव आता है,

उसके तीस कॉन्ट्रेक्ट बहत्तर घंटे में तलाश कर लेना चाहिए।

जो भी कंटेनमेंन्ट झोन बने उसमें एक भी व्यक्ति बिना टेस्टिंग के नहीं रहना चाहिए।

माइक्रो कन्टेनमेन्ट झोन बनाने की दियाा में मध्यप्रदेश में समय रहते पहल ही नहीं की गई।

जिसके कारण कोरोना पॉजिटिविटी रेट कम नहीं हो रहा है।

प्रधानमंत्री पॉजेटिवीटी रेट पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य दिया है।

कोरोना संक्रमण रोकने नौकरशाही ने किया क्या?

संक्रमण रोकने के लिए आखिर मध्यप्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व और उसकी प्रतिबद्ध नौकरशाही ने आखिर किया क्या? सायरन बजबाया। सुबह ग्यारह बजे और शाम को सात बजे। इसके अलावा रोज नए स्लोगन दिए।

मास्क लगाने का संदेश देने के लिए। बिना मास्क के बात नहीं होगी,मुख्यमंत्री

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा।

लेकिन,दमोह के विधानसभा उप चुनाव के मैदान में वे गर्दन पर मास्क लगाए दिखाई दिए।

शिवराज सिंह चौहान ही नहीं देश का कोई भी राजनेता इस तरह की आपदा के प्रबंधन की कला नहीं जानता।

संसाधन आधारित व्यवस्था में ही कोई तरीका काम करता है।

यदि राज्य में पर्याप्त संसाधन ही नहीं है तो जनता का असमय काल के गाल में समा जाना स्वभाविक है।

कोरोना से हो रही मौतों के लिए सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।

सरकार में बैठे लोग भी तो आम नागरिक की तरह ध्वस्त होती व्यवस्था को देखने के लिए मजबूर हैं।

क्या आपको लगता है कि सिस्टम में बैठे किसी मंत्री या नौकरशाह को इन मौतों पर ग्लानि हो रही होगी।

ऐसी उम्मीद करना नहीं चाहिए।

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कोरोना संक्रमण:सरकार के हित में है प्रभावितों का अस्पताल ना आना

कोरोना महामारी से भोपाल में मौतें
भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार किए गए स्टैंड

कोरोना संक्रमण की स्थिति मध्यप्रदेश में भयावह है। इंफ्रास्ट्रक्चर का सौ प्रतिशत उपयोग हो चुका है।

सरकार के पास इस बात के अतिरिक्त कोई चारा नहीं है कि वह संक्रमण के शिकार लोगों को अस्पताल आने से रोके। अस्पतालों में न तो बिस्तर है और न जीवन रक्षक अन्य संसाधन ही पर्याप्त हैं।

सरकार यह जताने की कोशिश लगातार कर रही है कि अस्पताल में अभी भी बिस्तर हैं।

साथ ही यह भी कह रही है कि स्थिति गंभीर नहीं है तो घर में ही दवा लेकर कोरोना से लड़े।

ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों की मौत को अस्वीकार करने की स्थिति में सरकार भी नहीं है।

मौतों पर सरकार की चुप्पी उसकी कमजोरी को उजागर करने के लिए पर्याप्त है। संक्रमण बढ़ने के लिए सरकार आम आदमी को दोषी मान रही है और

आम आदमी सरकार को। सरकार कहती है कि जनता समझती नहीं है।

जनता में शायद समझ होती तो वह बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी पर सड़क पर आकर सरकार से जवाब मांग रही होती।

आम आदमी के लिए मुख्यमंत्री ही सरकार है। नौकरशाहों के लिए भी सरकार मुख्यमंत्री ही हैं। सरकार दिखाई नहीं देती। ऐसा सिर्फ कोरोना संक्रमण के मामले में ही नहीं है।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर
भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर जलती चिंताएं

अपने आसपास ऐसे किसी भी विषय को ले लिजिए जिसका संबंध सरकार से है,आपको सरकार दिखाई नहीं देगी।

मध्यप्रदेश में कोरोना का संक्रमण बढ़ा है तो यह किस चूक की ओर इशारा कर रहा है।

चूक मुख्यमंत्री के स्तर पर हुई या फिर नौकरशाही ने अनुभवी मुख्यमंत्री को सिर्फ अच्छा-अच्छा बताया।

नौकरशाही ने अनुभवी मुख्यमंत्री को सिर्फ अच्छा-अच्छा बताया।

तारीफ सुनना इंसान की कमजोरी है। आज के दौर में सिस्टम की निंदा करने से घर-दुकान टूट जाते हैं।

शिवराज सिंह चौहान की सरकार में संवाद की वह खिड़की बंद हो चुकी है,जिसे फांदकर आम आदमी की समस्या मुख्यमंत्री के दिल में उतर जाती थी।

मुख्यमंत्री चौहान की रातों की नींद उड़ा देती थी।

प्रदेश में वर्ष 2005 के बाद ऐसे कई घटनाक्रम हुए हैं,जिसमें शिवराज सिंह चौहान रात-रात भर सो नहीं सके थे।

लेकिन,भोपाल के भदभदा विश्राम घाट से उठती चिताओं की लपटे स्मार्ट रोड और स्मार्ट पार्क की दीवार को पार नहीं कर पा रहीं हैं।

संवेदनशील सरकार और सरकार की जिम्मेदारी दो अलग-अलग विषय हैं। लेकिन, एक-दूसरे से जुडे हुए हैं।

संवेदनशीलता का भाव विषय आधारित नहीं होता। पग-पग पर मुख्यमंत्री को संवेदनशील होना होता है।

क्यों याद आता है भोपाल गैस कांड का मंजर 

भोपाल गैस कांड का वह मंजर लोग कैसे भूल सकते हैं,जब श्मशान घाट लाशों से पट गए थे।

एक साथ सैकड़ों मासूम बच्चों को दफनाने की तस्वीर गैस त्रासदी की सबसे भयावह तस्वीर और पहचान बन गई।

चारों और लाशें देखर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह अपने आंसू नहीं रोक पाए थे।

कोरोना की गति भी मिक गैस की तरह हवा के बहाव के साथ देखी जा सकती है।

दुनिया में कहीं भी इस तरह के भयावह मंजर की कल्पना कर स्वास्थ्य अद्योसंरचना विकसित नहीं की जाती। लेकिन मानकों के अनुसार प्रबंध करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य दो विषय ऐसे हैं,जिन्हें सरकार प्राथमिकता में ऊपर रखना ही नहीं चाहती। कारण

शिक्षित व्यक्ति सवाल तर्क की क्षमता रखता है।

देश को साक्षर बनाने की रफ्तार बेहद धीमी रही है। सोशल मीडिया के कारण सूचनाएं लोगों की पहुंच में हैं।

हुक्मरानों को सबसे तकलीफ सोशल मीडिया ही दे रहा है। लिहाजा इस पर पाबंदियां लगाई जाने लगी हैं।

सूचनाओं को भ्रामक बताने की कोशिश

सोशल मीडिया की विश्वसनीयता को संदिग्ध बनाने में हमारे नेताओं का ही हाथ रहा है।

जो सूचना हमें नुकसान पहुंचाए वह भ्रामक,जो विरोधी को नुकसान पहुंचाए वह तथ्य परक।

मौतों की संख्या को झुठलाना  आसान नहीं है। मौत का कारण विरोधाभासी हो सकता है।

जब सरकार मान रही है कि ऑक्सीजन का संकट है तो फिर मौत की वजह महत्वपूर्ण नहीं रहती।

सिस्टम यदि दम तोड़ चुका हो तो आम आदमी का बचना मुश्किल ही होता है।

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व्यतिपात योग:जप पाठ प्राणायम का लाख गुना फल मिलता है

planetarytransits
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व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका लाख गुना फल मिलता है। 02 अप्रैल 2021 शुक्रवार को प्रातः 02:48 से रात्रि 11:40 तक (यानी 02 अप्रैल, शुक्रवार को पूरा दिन) व्यतिपात योग है।

व्यतिपात योग:वाराह पुराण में ये बात आती है

देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।

बनते बनते बिगड़ जाता है कार्य

अगर दैनिक कार्यो में बाधा आती है या कार्य बनते बनते बिगड़ जाता है या दुकानदार की दुकान से ग्राहक आ कर के बिना कुछ खरीदे वापिस हो जाता है तो ये उपाय जरूर आजमाए – सुबह पूजा के बाद आरती करते समय दीपक में 2 लौंग डाल कर आरती करें या कपूर में दो फूल वाले लौंग डालकर आरती करें। आपके हर काम सुगमता से होंगे और किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी

आज का हिन्दू पंचांग

panchang
panchang

दिनांक 01 अप्रैल 2021
दिन – गुरुवार
विक्रम संवत – 2077
शक संवत – 1942
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वसंत
मास – चैत्र (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार – फाल्गुन)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – चतुर्थी सुबह 10:59 तक तत्पश्चात पंचमी
नक्षत्र – विशाखा सुबह 07:22 तक तत्पश्चात अनुराधा
योग – सिद्धि 02 अप्रैल प्रातः 02:47 तक तत्पश्चात व्यतिपात
राहुकाल – दोपहर 02:15 से शाम 03:58 तक
सूर्योदय – 06:33
सूर्यास्त – 18:52
दिशाशूल – दक्षिण दिशा में
व्रत पर्व विवरण –
विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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होली की रात में चूक न जाना,मंत्र जप से पूरी हो सकती है मनोकामना

holi
Holika dahan

होली का दिन चंद्रमा का प्रागट्य दिन है | जो लोग सदा किसी न किसी दुःख से पीड़ित रहते हो , तो दुःख और शोक दूर करने के लिए विष्णु-धर्मोत्तर ग्रंथ में बताया है कि होली के दिन भगवान के भूधर स्वरुप अर्थात पृथ्वी को धारण करनेवाले भगवान का ध्यान और जप करना चाहिये | मंत्र बोलना चाहिये होली के दिन इनका विशेष माहात्म्य और फायदे है

चंद्रमा को अर्ध्य देने का भी है विशेष महत्व

ॐ भूधराय नम ॐ भूधराय नम: ….. ॐ भूधराय नम:
और नीचे श्लोक एक बार बोलना और भगवान को, गुरु को विशेषरूप से प्रणाम और पूजन कर लें –
धरणीम् च तथा देवीं अशोकेती च कीर्तयेत् |
यथा विशोकाम धरणी कृत्वान्स्त्वां जनार्दन: ||
( हे भगवान जब जब भी पृथ्वी देवी असुरों से पीड़ित होकर आपको पुकारती है , तब तब आप राक्षसों का वध करते है और पृथ्वी को धारण करके उसका शोक दूर कर देते है | ऐसे आप भगवान मेरे भी शोक, दुःख आदि का हरण करे और मुझे धारण करें | ) खाली होली के दिन ये करें |

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full moon

होली को रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिये | जिनके घर मे पैसों की तंगी रहती है, आर्थिक कष्ट सहना पड़ता है |

होली को रात दूध और चावल की खीर बनाकर चंद्रमा को भोग लगाये | पानी, दूध, शक्कर, चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दे , दिया जलाकर दिखायें और थोड़ी देर चंद्रमा की चाँदनी में बैठकर अपने गुरुमंत्र का जप करें |

और प्रार्थना करें हमारे घर का जो आर्थिक संकट है वो टल जायें, कर्जा है तो उतर जाये |

होली की रात फिर बैठकर जप करें बहुत फायदा होगा |

चंद्रमा उदय होने पर चंद्रमा में भगवान विष्णु, लक्ष्मी और सूर्य की भावना करके अर्घ्य देना चाहिये , कि सामने भगवान विष्णु ही बैठे है | भ

गवान ने गीता में कहा ही है कि नक्षत्रों का अधिपति चन्द्रमा मैं ही हूँ |

ये शास्त्रों की बात याद रखे कि दुःख की और कर्जे की ताकत नहीं कि उस आदमी के सिर पर बना रहे |
श्रीर्निषा चन्द्र रुपस्त्वं वासुदेव जगत्पते |
मनोविलसितं देव पूर्यस्व नमो नमः ||
ॐ सोमाय नम:, ॐ नारायणाय नम: , ॐ श्रीं नम:
लक्ष्मीजी का मंत्र – ॐ श्रीं नम: होली की रात घर मे आर्थिक

परेशानी को दूर भगाने वाला ये सरल प्रयोग है |

चांदनी में जप से सिद्ध हो सकते हैं मंत्र

होली की रात्रि

चार पुण्यप्रद महारात्रियों में आती है।

होली की रात्रि का जागरण

और जप बहुत ही फलदायी होता है।
ऋतु-परिवर्तन के 10-20 दिनों में नीम के 15 से 20 कोमल पत्तों के साथ 2 काली मिर्च चबाकर खाने से वर्ष भर आरोग्य दृढ़ रहता है।

बिना नमक का भोजन 15 दिन लेने वाले की आयु और प्रसन्नता में बढ़ोतरी होती है।

होली के बाद खजूर खाना मना है

बाजारू केमिकलों से युक्त रंगों के बदले पलाश के फूलों के रंग से अथवा अन्य प्राकृतिक रंगों से होली खेलनी चाहिए।

इससे सप्तरंगों व सप्तधातुओं का संतुलन बना रहता है।
अन्य कुछ प्राकृतिक रंगः मेंहदी पाऊडर के साथ आँवले का पाऊडर मिलाने से भूरा रंग।

चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी पाऊडर मिलाने से अच्छा पीला रंग बनता है।

बेसन के स्थान पर आटा, मैदा, चावल का आटा, आरारोट या मुलतानी मिट्टी का भी उपयोग किया जा सकता है।
दो चम्मच हल्दी पाउडर दो लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह उबालने से गहरा पीला रंग प्राप्त होता है।
आँवला चूर्ण लोहे के बर्तन में रात भर भिगोने से काला रंग तैयार होता है।

मंत्र साफल्य दिवस : होली

होली के दिन किया हुआ जप लाख गुना फलदायी होता है | यह साफल्य – दिवस है,

घुमक्कड़ों की नाई भटकने का दिन नहीं है | मौन रहना, उपवास पर रहना, फलाहार करना और अपना-अपना गुरुमंत्र जपना |
इस दिन जिस निमित्त से भी जप करोंगे वह सिद्ध होगा |

ईश्वर को पाने के लिए जप करना | नाम –जप की कमाई बढ़ा देना ताकि दुबारा माँ की कोख में उल्टा होकर न टंगना पड़े |

पेशाब के रास्ते से बहकर नाली में गिरना न पड़े | होली के दिन लग जाना लाला- लालियाँ ! आरोग्य मंत की भी कुछ मालाएँ कर लेना |

नामोच्चारणरूप औषधि से तमाम रोग नष्ट हो जाते है

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात |
नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम ||
‘ हे अच्युत ! हे अनंत ! हे गोविंद ! – इस नामोच्चारणरूप औषधि से तमाम रोग नष्ट हो जाते है, यह मैं सत्य कहता हूँ, सत्य कहता हूँ |

’ (धन्वंतरि महाराज)
दोनों नथुनों से श्वास लेकर करीब सवा से डेढ़ मिनट तक रोकते हुए मन–ही–मन दुहराना –
नासै रोग हरै सब पीरा | जपत निरंतर हनुमत बीरा ||
फिर ५० से ६० सेकंड श्वास बाहर रोककर मंत्र दुहराना | इस दिन जप-ध्यान का फायदा उठाना, काम-धंधे तो होते रहेंगे |

अपने-अपने कमरे में गोझरणमिश्रित पानी से पोछा लगाकर थोडा गंगाजल छिडक के बैठ जाना |

हो सके तो इस दिन गोझरण मिला के स्नान कर लेना | लक्ष्मी स्थायी रखने की इच्छा रखनेवाले गाय का दही शरीर पर रगड़के स्नान कर लेना |

लेकिन वास्तविक तत्त्व तो सदा स्थायी है, उसमें अपने ‘मैं’ को मिला दो बस, हो गया काम !
ब्रम्हचर्य-पालन में मदद के लिए “ॐ अर्यमायै नम:” मंत्र का जप बड़ा महत्त्वपूर्ण है|

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शिवराज सिंह चौहान: चौथी पारी,चौदह साल कई वजह से बने बेमिसाल

शिवराज सिंह चौहान अद्वितीय हैं,बेमिसाल हैं। अद्भूत हैं। अतुलनीय हैं। जन नायक हैं। लोकप्रिय हैं। बहनों के भाई और बच्चों के मामा हैं। यही वे वजह नहीं हैं जिनके कारण शिवराज सिंह चौहान अपनी चौथी पारी का पहला कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। बहुत सारे दूसरे कारण भी हैं जिनके चलते शिवराज सिंह चौहान अगंद की तरह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिके हुए हैं। उनका कोई विकल्प नहीं है। 2018 में हुए विधानसभा के आमचुनाव में भाजपा सरकार से बाहर क्यों हुई? इस कारण की तलाश भजपा नेताओं ने भी कभी पूरी गंभीरता से नहीं की। शायद पंद्रह साल लगातार सत्ता में रहने के बाद भाजपा नेता राजनीति के मूल सिद्धांतों को विस्मृत कर चुके हैं।

shivraj singh chouhan
shivraj singh chouhan


वर्ष 2003 में जब उमा भारती ने भाजपा सरकार का नेतृत्व किया था तब शिवराज सिंह चौहान कहां थे? वे विदिशा से सांसद थे। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी शमिल नहीं थे। उमा भारती के विकल्प के तौर भाजपा के पास काबिल और लोेकप्रिय नेताओं की फौज थी। बाबूलाल गौर को हटाकर जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तब भी वे विकल्प हीन नहीं थे। कई विकल्प पार्टी के पास थे। चौहान से वरिष्ठ और बराबरी से बात करने वाले कई नेता थे। गौर मंत्रिमंडल में थे। एक नरेन्द्र सिंह तोमर ने शिवराज सिंह चौहान का हाथ पकडकर राजनीति की तो वे केन्द्र में मंत्री हैं। तोमर का नाम हर बार चौहान के उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आता है। पिछड़ा वर्ग के ही प्रहलाद पटेल को विरोध की क्या कीमत चुकाना पड़ी इसका अनुमान उनकी राजनीति यात्रा के पड़ाव पर नजर डालकर आसानी से लगाया जा सकता है।

आम चुनाव में मिली हार से लोकप्रियता प्रभावित

भाजपा के नेता व्यक्तिवाद और परिवारवाद का विरोध करते-करते इसका अनुकरण करने लगे हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलता तो मार्च में सरकार की वर्षगांठ मानाने की जरूरत नहीं पड़ती। पिछले दिसंबर में ही शिवराज सिंह चौहान पंद्रह साल मुख्यमंत्री रहने का जश्न मना चुके होते। वो भी शायद जंबूरी मैदान में। पंद्रह माह के बे्रक से चौहान का ट्रैक रिकार्ड भी प्रभावित हुआ है। चुनाव परिणामों ने उनकी लोकप्रियता पर भी सवाल खड़े किए। मार्च की सरकार नरेन्द्र-मोदी-अमित शाह की रणनीति का परिणाम है। एक तरह से यह सरकार चौहान को तौहफे के तौर पर मिली है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके विधायकों के कारण मिली। भाजपा के देवतुल्य कार्यकत्र्ता का कोई योगदान मार्च की सरकार में नहीं है।

शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में यदि दिग्विजय सिंह को चुनौती दी थी तो वर्ष 2004 में कमलनाथ को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में चुनौती देने वाला कौन था? प्रहलाद पटेल ने ही कमलनाथ को चुनौती दी थी। प्रहलाद पटेल, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे। शिवराज सिंह चौहान से काफी आगे। काफी संभावनाएं पटेल के चेहरे में तलाशी जा रहीं थीं। उमा भारती के एक गलत राजनीतिक निर्णय के कारण ही चौहान के सामने कोई विकल्प बन नहीं बन पाया। कैलाश विजयवर्गीय,अनूप मिश्रा,अजय विश्नोई और गौरीशंकर शेजवार जैसे नेता अहम का शिकार होकर हासिए पर चले गए। शिवराज सिंह चौहान पैर में चक्कर और मुंह में शक्कर के सिद्धांत का पालन करते हुए आगे निकल गए।

मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में कोई विकल्प नहीं

uma bharti
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कुशाभाऊ ठाकरे की मंशा के विपरीत जाना अपने राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाने जैसा था। शिवराज सिंह चौहान ने संघर्ष की राह चुनी तो आज मुख्यमंत्री की कुर्सी उनकी है। विक्रम वर्मा कहां हैं? अख्खड़ स्वभाव वाले। वीर भौग्या वसुंधरा। जिस तरह वीर धरा का उपभागे करते हैं उसी तरह मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री या कहें राजा वही बन सकता है जो शक्तिशाली है,समर्थ है और चुनौतियों को स्वीकार कर सकता है। शिवराज सिंह चौहान में चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता है। उनके जीवन का तीसरा ब्रह वाक्य सिर पर बर्फ है। पैर में चक्कर,मुंह में शक्कर और सिर पर बर्फ जो व्यक्ति रखकर चलता है उसकी राह कितनी भी दुर्गम हो, सुगम बन जाती है। यदि ऐसा न होता तो पहले डंपर और फिर व्यापमं मामले के भंवर से वे निकलकर बाहर नहीं आ सकते थे।

नृपस्य चितं ,कृपणस्य वितम;त्रिया चरित्रं ,पुरुषस्य भाग्यम ;देवो न जानाति कुतो मनुष्य:। शिवराज सिंह चौहान कर्मशील हैं,इस कारण भाग्य भी उनका साथ दे रहा है। चौहान से वरिष्ठ,समकालीन और उनसे कनिष्ठ नेताओंं में ऐसे कितने हैं,जिसने प्रदेश भर की सड़कें नापी हो? शायद कोई नहीं। सभी यह मानकर चलते हैं कि राज्याभिषेक पार्टी की मर्जी पर निर्भर है। बाबूलाल गौर पार्टी लाइन पर चलकर भी अपनी कुर्सी नहीं बचा सके। उमा भारती विधायकों की संख्या बल के आधार पर भी दुबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं। शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री हैं। अतुल्य।
यदि आमजन के बीच खड़े होकर देख जाए तो शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाले एक साल में आपको सिर्फ निराशा दिखाई देगी। युवाओं में निराशा। महिलाओं में निराशा। उद्योग -धंधों में निराशा। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निराशा। शिक्षा को लेकर निराशा। खास लोगों की दृष्टि से देखेगों तो चारों और हरियाली और खुशहाली दिखाई देगी। पिछले साल जब कोरोना आया था तब सरकार ने जो प्रतिबंध लोगों पर थोपे वे प्रतिबंध खास लोगों के लिए आपदा में अवसर साबित हुए।

मोदी के चेहरे के बगैर राज्य में भाजपा को मिली जीत

जनता ने पंद्रह माह भाजपा को सरकार से बाहर रखा तो उसका खामियाजा उसे वापसी पर भुगतना पड़ रहा है। राज्य में भ्रष्टाचार का सूचकांक सारे रिकार्ड तोड़ चुका है। सत्ता की राजनीति में सुशासन शब्द को रामबाण की तरह उपयोग किया जा रहा है। सुशासन के लिए जो रीति-नीति सरकार ने बनाई है,उसमें प्रशासन आमजन से दूर होता जा रहा है। सूचना प्रद्यौगिकी के कारण भी प्रशासन की जवाबदेही समाप्त होती जा रही है। सूचना एवं प्रद्यौगिकी ने भ्रष्टाचार के नए तरीके भर ईजाद किए हैं।

भ्रष्टाचार सुनियोजित,संगठित और लोगों को अपराधियों की तरह कटघरे में खड़ा कर किया जा रहा है। माफिया जैसे भारी-भरकम शब्दों के जरिए प्रशासन अपने भ्रष्टाचार और मनमानी को छुपाने का काम भी कर रहा है। अच्छे और सफल मुख्यमंत्री के लिए सुद़ढ सूचना तंत्र भी जरूरी होता है। वह नेता जमीन छोड़ देता है,जिसका सूचना तंत्र कमजोर होता है और संवाद न्यूनतम। चौथी पारी में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर शकुन और चमक दिखाई नहीं देती। टेलीविजन की स्क्रीन पर जब वे भाषण देते दिखाई देते हैंं तो माथे पर की शिकन और चेहरे का तनाव छुपता नहीं है।

लुटिंयंस की दिल्ली रास नहीं आती

कोई न कोई वजह तो है,जिसके कारण शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर उलछन दिखाई दे रही है। हो सकता है कि कोरोना ने उनके पांव बांध रखे हो?संभव है कि सरकारी खजाने की माली हालत उन्हें परेशान कर रही हो। संभव है कि उन्हें नई जिम्मेदारियां देने की बात हो रही हो? शिवराज सिंह चौहान का मन मध्यप्रदेश में ही बसता है। नरेन्द्र मोदी की तरह उन्हें दिल्ली जाना पड़े तो बात दूसरी है। लुटिंयंस की दिल्ली उन्हें रास नहीं आती।

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