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दिनेश गुप्ता

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लेखक वरिष्ट पत्रकार एवं पावर गैलरी पत्रिका के मुख्य संपादक है. संपर्क- 9425014193

वरिष्ठ विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाने की परंपरा से हटी कमलनाथ सरकार

मध्यप्रदेश विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों को कांगे्रस विधायक दीपक सक्सेना प्रोटेम स्पीकर के तौर पर शपथ ग्रहण कराएंगे। विधानसभा का सत्र सात जनवरी को शुरू हो रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने आज छिंदवाड़ा के विधायक दीपक सक्सेना को प्रोटेम स्पीकर के तौर पर शपथ दिलाई। दीपक सक्सेना चौथी बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा की परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी उस विधायक को दी जाती है, जो कि सबसे अधिक बार निर्वाचित हुआ है। मौजूदा पंद्रहवीं विधानसभा में गोपाल भार्गव एक मात्र ऐसे सदस्य हैं जो लगातार आठवीं बार निर्वाचित हुए हैं। श्री भार्गव वर्ष 1985 से विधानसभा के सदस्य हैं।

क्या विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भाजपा को मिल पाएगा


कांगे्स ने जिस तरह से परंपरा से हटकर प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की है, उसके बाद यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि भाजपा को विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी नहीं दिया जाएगा? राज्य में विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देने की परंपरा है। पिछली विधानसभा में डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह विधानसभा उपाध्यक्ष थे।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ कैबिनेट तैयार, 28 मंत्रियों ने ली शपथ

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की कैबिनेट तैयार हो चुकी है। मध्य प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार के 28 मंत्रियों को मंगलवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में शपथ दिलाई। कमलनाथ कैबिनेट में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने और क्षत्रपों को संतुष्ट करने पर खास ध्यान दिया गया है। कैबिनेट में दो महिलाओं और एक मुस्लिम और एक निर्दलीय नेता को जगह दी गई है। शपथ लेते समय डबरा विधायक इमरती देवी चार बार अटकीं। कैबिनेट गठन के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार शाम को कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक बुलाई है।

इन 28 मंत्रियों ने ली शपथ,

विजय लक्ष्मी साधौ, महेश्वर
सज्जन सिंह वर्मा, सोनकच्छ
हुकुम सिंह कराड़ा, शाजापुर
डॉ. गोविंद सिंह, लहार
बाला बच्चन, राजपुर
आरिफ अकील, भोपाल उत्तर
बृजेंद्र सिंह राठौर, पृथ्वीपुर
प्रदीप जायसवाल, वारा सिवनी
लाखन सिंह यादव, भितरवार
तुलसी राम सिलावट, सांवेर
गोविंद सिंह राजपूत, सुर्खी
इमरती देवी, डबरा
ओमकार सिंह मरकाम, डिंडौरी
डॉ. प्रभुराम चौधरी, सांची
प्रियव्रत सिंह, खिलचीपुर
सुखदेव पांसे, मुलताई
उमंग सिंघार, गंधवानी
एडवोकेट हर्ष यादव, देवरी
जयवर्द्धन सिंह, राघौगढ़
जीतू पटवारी, राऊ
कमलेश्वर पटेल, सिंहावल
लखन घनघोरिया, जबलपुर पूर्व
महेंद्र सिंह सिसोदिया, बमोरी
पीसी शर्मा, भोपाल दक्षिण-पश्चिम
प्रद्युम्न सिंह तोमर, ग्वालियर
सचिन सुभाष यादव, कसरावद
सुरेंद्र सिंह बघेल, कुक्षी
तरुण भानोट, जबलपुर पश्चिम

भूपेश बंघेल के कुनबे में नौ नए मंत्री:शपथ के बाद विभागों का इंतजार

शपथ ग्रहण कार्यक्रम रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में हुआ

राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री व दो मंत्रियों ने शपथ ली थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ मंत्री टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू ने शपथ ली थी। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 13 मंत्री के पद हैं। अब तक 12 मंत्रियों ने शपथ ली है, वहीं एक पद अभी भी खाली है।
यह पहला मौका है जब मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण का स्थान परिवर्तित हुआ है। इससे पहले मंत्रिमंडल राजभवन में ही शपथ ग्रहण किया करता था।  शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने सभी मंत्रियों को शुभकामनाएं दी। 

मंत्री के रूप में डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, रवींद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, शिवकुमार डहरिया, अनिला भेड़िया, जय सिंह अग्रवाल, गुरु रुद्र कुमार और उमेश पटेल ने शपथ ली। उमेश पटेल प्रदेश के प्रथम गृहमंत्री नंदकुमार पटेल के सुपुत्र हैं। नंदकुमार पटेल झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ शहीद हुए थे।


मध्यप्रदेश में कांग्रेस को याद आए सरदार पटेल, विवेकानंद और देवी अहिल्या बाई

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने वचन पत्र में भी अपने मित्र संजय गांधी को याद रखा है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपेक्षा को लेकर लगातार कांग्रेस पर किए जा रहे हमलों के बाद कांग्रेस अभी पूरी तरह से गांधी-नेहरू से बाहर तो नहीं निकल पाई है लेकिन, उसने पटेल के अलावा देवी अहिल्या बाई, स्वामी विवेकानंद, और टंटया भील जैसे नामों को भी अपनाना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता पर खास तौर पर जोर दिया गया है।

कांग्रेस  ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को वचन पत्र का नाम दिया है। इस वचन पत्र में प्रदेश
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने मित्र संजय गांधी को भी जगह दी है। संजय गांधी की विधवा मेनका गांधी के साथ इंदिरा गांधी का घर छोड़ दिए जाने के बाद कांग्रेस ने भी संजय गांधी का नाम लेना बंद कर दिया था। वचन पत्र में विधानसभा की कार्यवाही को हंगामे से बचाने के लिए कार्यबाधित होने पर सदस्यों को उस दिन का भत्ता न देने प्रावधान लागू करने की घोषणा की गई है। जनता भी विधानसभा में मंत्रियों से सीधे सवाल पूछ सके,इसके लिए जनता प्रहर शुरू करने का एलान किया गया है।

किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज ही माफ होंगे

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिवाजी नगर स्थित कार्यालय में चुनाव का वचन पत्र जारी करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे। चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस वचन पत्र पर कहा कि इसमें दर्ज एक-एक अक्षर घोषणा नहीं है, कांग्रेस का वचन है। हर वचन को सरकार बनने के बाद समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। वचन पत्र में कांग्रेस ने किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज माफ करने का वादा किया है। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश भर में घूम-घूमकर अपनी सभाओं में किसानों का पूरा कर्जा दस दिन में माफ करने की बात कह रहे हैं। राहुल गांधी की इस मंशा के अनुरूप ही छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। दस दिन का वादा भी किया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के वचन पत्र में दस दिन की समय-सीमा का उल्लेख भी नहीं किया गया है। यद्यपि उस कर्ज को भी माफ करने का वचन कांग्रेस ने दिया है, जो कालातीत हो चुका है। किसानों का बिजली का बिल आधा किए जाने के लिए दस हॉर्सपावर की सीमा निर्धारित की गई है। लगभग डेढ़ दर्जन फसलों के अलावा दूध पर भी पांच रूपए प्रति लीटर का बोनस दिए जाने का वचन दिया गया है। किसानों को फसल बीमा का लाभ ग्रामसभा की अनुशंसा पर दिलाए जाने का वचन भी दिया गया है। राज्य कृषि विकास आयोग का गठन किए जाने का उल्लेख भी किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसानोंे को उनकी उपज को मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने दिया जाएगा।

सरकारी नौकरयों में नहीं घुस सकेंगे दूसरे राज्यों के बेरोजगार

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में युवाओं को नौकरी न दिला पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का कोई सीधा वादा नहीं किया है। युवाओं को उद्योगों में रोजगार मिल सके इसके लिए उद्योगपतियों को वेतन अनुदान दिए जाने की योजना का एलान किया गया है। इस योजना का लाभ उन उद्योगपतियों को दिया जाएगा, जो पचास करोड़ के निवेश से नया उद्योग लगाएगें अथवा उद्योग का विस्तार कर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देंगे। सरकार रोजगार के एवज में वेतन का पच्चीस प्रतिशत अथवा दस हजार रूपए प्रतिमाह, जो भी कम उद्योगपति को देगी। सरकारी नौकरियों में राज्य के बाहर के उम्मीदवारों का चयन रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा है कि वे ही लोग शासकीय अथवा सार्वजनिक उपक्रमों में नौकरी के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने दसवीं अथवा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा मध्यप्रदेश से उत्तीण की हो। कांग्रेस ने व्यापमं को बंद कर इसके स्थान पर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के गठन का एलान किया है। परिवार की छह लाख से कम बार्षिक आय होने पर चयन परीक्षा शुल्क से छूट देने का वादा किया गया है। अधिकतम आयु सीमा में दो साल की वृद्धि देने का भी उल्लेख वचन पत्र में है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागी रहे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी न दे पाने की स्थिति में हर माह पंद्रह हजार रूपए सम्मान निधि देने का उल्लेख भी वचन पत्र में है।

लड़कियों की पीएचड़ी तक की शिक्षा मुफ्त

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों के लिए चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं के जवाब में कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में एक लाइन में लिखा है कि कन्याओं को स्कूल से पीएचड़ी तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। कॉलेज जाने वाली छात्राओं को दो पहिया वाहन के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण दिलाए जाने का भी वचन दिया गया है। महिला अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ ठोस कानून बनाने की बात कही गई है। ज्ञातव्य है कि महिला अपराधों के मामले में देश में मध्यप्रदेश का पहला नंबर होने पर कांग्रेस लगातार शिवराज सिंह चौहान पर हमले कर रही है। महिला अपराधों को कांग्रेस ने चुनाव का मुद्दा भी बनाया है। कांग्रेस का वचन पत्र 75 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित है। इसमें रामपथ गमन का निर्माण और पंचायत स्तर पर गौशालाएं खोलना भी शामिल है। सपाक्स की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने सरकार में आने पर सामान्य वर्ग आयोग के गठन का भी एलान किया है। राज्य के असंतुष्ट कांग्रेस ी नेताओं को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर विधान परिषद के गठन का कार्ड खेला है। डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस सस्ता करने का वचन भी दिया गया है।

वचन पत्र में नेहरू नहीं संजय गांधी का उल्लेख है

कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस भवन में टंगी तस्वीरों में भी बदलाव देखा गया था। इंदिरा-राजीव के साथ-साथ कमलनाथ ने संजय गांधी की तस्वीर को भी कांग्रेस के दफ्तर में जगह दी है। कांग्रेस के वचन पत्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू के उल्लेख कहीं नहीं है। लेकिन, इंदिरा-राजीव के साथ संजय गांधी का उल्लेख किया गया है। संजय गांधी के नाम पर पर्यावरण मिशन शुरू करने की बात वचन पत्र में कही गई है। समग्र सामाजिक सुरक्षा परिवार कार्यक्रम को वैधानिक मान्यता हेतु राजीव गांधी स्व निराकरण सेवा नाम से अधिनियम बनाया जाएगा। राजीव गांधी स्मार्टकार्ड देने की योजना भी प्रस्तावित है। इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत सौ यूनिट तक बिजली सौ रूपए प्रतिमाह की दर पर दिए जाने की घोषणा की गई है। वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान की सरकार दो सौ रूपए प्रतिमाह की निश्चित दर पर एक हजार वॉट पर बिजली दे रही है। घोषणा पत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर किसान पुत्र स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है। विवेकानंद के नाम पर युवा शक्ति निर्माण मिशन शुरू करने की घोषणा है। देवी अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर लड़कियों की नि:शुल्क शिक्षा योजना शुरू की जाएगी। रानी दुर्गावती के नाम से महिला पुलिस बटालियन बनाने की घोषणा की गई है।

विधायकों ने रोकी सदन की कार्यवाही तो नहीं मिलेगा भत्ता

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे महत्वपूर्ण पहल सदन को जवाबदेह बनाने की दिशा में की है। सदन की कार्यवाही बिना बाधा के चले इसके लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि विधायकों द्वारा सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने की स्थिति में उस दिन का भत्ता सदस्यों को नहीं दिया जाएगा। देश में कहीं भी अब तक इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। राज्यसभा और लोकसभा में भी कार्यवाही बाधित होने पर भी भत्ता नहीं रोका जाता। विधायकों एवं मंत्रियों को प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण पटल पर रखना होगा। विधानसभा में जनता सीधे मंत्रियों से सवाल पूछ सके इसके लिए जनता पहर की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई है। इस तरह की व्यवस्था भी देश में कहीं भी प्रचलन में नहीं है।

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

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सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

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पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

कांग्रेस के मोदी विरोधी सुर में चंद्रबाबू का राग: कहा खतरे में है लोकतंत्र

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तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख एवं आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस के मोदी विरोधी सुर में अपना राग भी जोड़ दिया है। नायडू ने कहा कि आयकर विभाग तेलगुदेशम पार्टी के नेताओं और करीबी उद्योगपतियों को निशाना बना रही है। आयकर विभाग की 19 टीमें पांच अक्टूबर को आंध्रपदेश भेजी गईं। नायडू ने कहा कि देश में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता खतरे में है।

साढ़े चार साल तक मोदी का समर्थन करते रहे हैं चंद्रबाबू

आंध्रपदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कुछ माह पहले तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए का हिस्सा थे। आंध्रप्रदेश को स्पेशल पैकेज के मुद्दे पर नायडू ने अपने आपको एनडीए से अलग कर लिया था। नायडू का आरोप है कि एनडीए से अलग होने के बाद ही केन्द्र सरकार की विभिन्न जांच एजेंसियां आंध्रप्रदेश में सक्रिय हो गईं हैं।

नायडू ने सवाल किया कि क्या इससे पहले आंध्रप्रदेश में कर चोरी नहीं होती थी। केन्द्र से समर्थन वापस लेने के बाद ही क्या कर चोरी होने लगी? तेदेपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने हर राज्य में यही नीति अपनायी है। वह विपक्षी नेताओं के साथ विपक्षी दलों को चंदा देने वाले उद्योगपतियों को भी निशाना बना रही है। उन्होंने सवाल किया – क्या यह लोकतंत्र है? सीबीआई में शीर्ष स्तर पर जारी संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने संस्थानों को धराशायी कर दिया है। अधिकतर महत्वपूर्ण संस्थानों के प्रमुख गुजरात या गुजरात कैडर के हैं।

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अशोक गहलोत ने पुराने कांग्रेसियों से की पार्टी में लौट आने की अपील

चंद्रबाबू नायडू के बयान के साथ ही एक बयान कांग्रेस मुख्यालय से भी आया। यह बयान कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत का है। इस बयान में गहलोत ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। गहलोत ने पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं से अपील की है कि वे कांग्रेस पार्टी में अब वापस लौट आएं। तारिक अनवर की वापसी के बाद कांग्रेस यह उम्मीद कर रही है कि कुछ और लोग पार्टी में वापस आ सकते हैं।

गहलोत ने कहा कि देश गहरे संकट में हैं इसलिये सभी को आपसी मतभेद भूलकर एकजुट हो जाना चाहिए। सभी नेताओं को आपसी मतभेदों को भुलाकर देश सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों का लोकतंत्र, लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संविधान में कोई यकीन नहीं है इसलिये ये आवश्यक है कि समय-समय पर विभिन्न कारणों से कांग्रेस से अलग हुए लोग वापस आयें और देश को बचायें। सीबीआई का उदाहरण देते हुए गहलोत बोले सत्ता में ऐसे लोग काबिज हो गये हैं जो संवैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करने मे जुटे हैं और उनकी स्वायत्तता खत्म कर रहे हैं।

दतिया में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस को नहीं मिल रहा दमदार उम्मीदवार

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पटखनी देने वाला उम्मीदवार कांग्रेस को अब तक नहीं मिला है। दिल्ली में जब कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनाने का काम कर रही थी, ठीक उसी वक्त दतिया में कांग्रेस आस्तीनें चढ़ा पेराशूट नेताओं का विरोध कर रहे थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा दतिया जिले के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक हरियाण के विधायक उदयभान जाटव को नेताओं की आपसी लड़ाई देखकर कहना पड़ा कि सीट जीतोगे सरकार तब ही बन पाएगी। आपस में लड़ने सरकार नहीं बन सकती।

तीन सीट,तीन सौ दावेदार

दतिया जिला में विधानसभा की कुल तीन सीटें हैं। दतिया,सेंवढ़ा और भांडेर। तीनों सीटों पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले चुनाव में पेड न्यूज के आरोप के चलते चुनाव आयोग ने मिश्रा को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

पिछले एक दशक में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया अपनी जड़े काफी मजबूत कर ली हैं। कांग्रेस में उन्हें चुनौती देने वाला कोई नेता भी सामने नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्वालियर संभाग की अपनी यात्रा की शुरूआत दतिया के पीतांबरा पीठ के दर्शन कर की थी। राहुल गांधी की इस यात्रा का मकसद दतिया सीट वापस कांग्रेस की झोली में लाने का था। लेकिन, दतिया में कांग्रेस एक नहीं हो पा रहे हैं।

राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा

कांग्रेसियों में समन्वय बैठाने आए उदयभान के सामने प्रदेश कांग्रेस के सदस्य दामोदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अब फटे नोट नहीं चलेंगे। आप पार्टी हाइकमान तक बात पहुंचाईएं जिले की तीनों सीटों पर नए चेहरों को मौका दे तो कार्यकर्ता पूरी मेहनत से कांग्रेस को जिताने के लिए लग जाएगा। चुनाव का समय है और कार्यालय से सभी को सूचनाएं नहीं दी जाती। राजेश दांतरे ने कहा कि हमसे राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा लिया गया। रैली की सफलता का श्रेय एक व्यक्ति को दे दिया। यह गलत है। जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होगा वहां कार्यकर्ता मन से काम नहीं करेगा।

आशोक शर्मा ने सलाह दी कि पर्यवेक्षक दतिया में बैठे रहते हैं 7 अन्य दो विधानसभा सीट पर ध्यान ही नही देते। कार्यकर्त्ताओं से भी राय नहीं ली जाती। शिवकुमार पाठक ने टिकट पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा कि दतिया से ब्राह्ण को ही टिकट देना चाहिए।

शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्णिम को छोड़कर समृद्ध मध्यप्रदेश को क्यों अपनाया ?

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वर्ष 2018 के विधानसभा के आम चुनाव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समृद्ध मध्यप्रदेश की परिकल्पना लेकर वोटरों के बीच जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के भोपाल स्थित मुख्यालय दीनदयाल परिसर से लगभग पचास रथों को राज्य भर में भेजा जा रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। ये रथ पार्टी का प्रचार करेंगे और वोटरों से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने के लिए सुझाव भी लेंगे। शिवराज सिंह चौहान अब तक स्वर्णिम मध्यप्रदेश की बात करते रहे हैं। समृद्ध मध्यप्रदेश का नारा पार्टी बड़े नेताओं के गले भी नहीं उतर रहा है। स्वर्णिम और समृद्ध मध्यप्रदेश का फर्क भी लोग नहीं समझ पा रहे हैं।


वोटरों को लुभाने का नारा भी नहीं दे पाई है भाजपा


मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को पंद्रह साल पूरे हो चुके हैं। पहली बार भारतीय जनता पार्टी इतने लंबे समय से राज्य की सत्ता को संभाल रही है। पंद्रह सालों की सरकार में तेरह साल से शिवराज सिंह चौहान राज्य के मुख्यमंत्री हैं। पार्टी उनके नेतृत्व में तीसरा चुनाव लड़ने जा रही है। तीसरे चुनाव की पूरी तैयारियां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कर रहे हैं। उनके भरोसे के अफसरों और रणनीतिकारों ने इंवेट मेनेजमेंट कंपनियों के जरिए चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर रही है। पंद्रह साल की सरकार के बाद भारतीय जनता पार्टी में ऐसे मुद्दों का अभाव साफ दिखाई दे रहा है,जो कि चौथी बार सरकार बनाने में मदद कर सकें। पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी पूर्व केन्द्रीय मंत्री विक्रम वर्मा को दी है। घोषणा पत्र को पार्टी ने दृष्टि पत्र का नाम दिया है। दृष्टि पत्र में समृद्ध मध्यप्रदेश खाका खींचा जाएगा। राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ उभरे असंतोष के कारण पार्टी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को विशेष तव्वजों देने से बचने की कोशिश भी कर रही है। सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर योजनाओं का लाभ देने का वादा इस दृष्टि पत्र में किया जा सकता है। पिछले पांच सालों में शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में कई नई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें किसानों के लिए शुरू की गई भावातंर योजना प्रमुख है। इसके बाद भी किसान सरकार से नाराज है। कांगे्रस ने किसान वोटरों को लुभाने के लिए कर्ज मुक्ति का कार्ड खेला है।


बेरोजगारी का मुद्दा भी बड़ा रहा है भाजपा की मुश्किल


एक समद्ध राज्य की कल्पना में समाज के हर वर्ग को खुश होना चाहिए। महिलाओं को सुरक्षा और बेरोजगार को काम दिलाए बगैर समृद्ध राज्य नहीं बन सकता। कांगे्रस किसानों के अलावा बेरोजगारी और महिला सुरक्षा को भी चुनाव में भुनाने की कोशिश में लगी हुई है। राज्य का औद्योगिक विकास भी पंद्रह साल में उतना नहीं हुआ है जितना कि इंवेस्टर समिट में दावा किया गया था। अपवाद स्वरूप कुछ उद्योगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश उद्योगपतियों ने एमओयू करने के बाद भी राज्य की ओर पलट कर नहीं देखा । सरकारी क्षेत्र की भर्तियों से जुड़े व्यापम घोटाले ने बेरोजगारी को समस्या को और भी गंभीर कर दिया था। सरकारी क्षेत्र का भ्रष्टाचार भी शिवराज सिंह चौहान की सरकार के लिए मुसीबत बना हुआ है। मजबूरन मुख्यमंत्री को निगेटिव कैंपेन के जरिए कांगे्रस पर हमला बोलना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार अपने भाषणों में दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल को याद दिला रहे हैं। राज्य में वर्ष 1993 से 2003 तक दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांगे्रस सरकार थी। सड़क,बिजली और पानी की समस्या ने दिग्विजय सिंह को मिस्टर बंटाधार नाम दिला दिया। जबकि दलित एजेंडा के कारण उच्च वर्ग सरकार से नाराज थे। यही हालात अभी भी बने हुए हैं। एट्रोसिटी एक्ट के नए रूप से उच्च वर्ग गुस्से में है। उच्च वर्ग पिछले तीन चुनावों से लगातार भाजपा का साथ दे रहा था। उसकी नाराजगी से भी भाजपा चिंता में है।

Kamal Nath

मुरैना में बसपा बदल रही है उम्मीदवार, हो सकती है बगावत

mayavati, bsp

कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन बनाने में असफल रही बहुजन समाज पार्टी की मैदानी दिक्कतें बढ़ती जा रही है. मध्यप्रदेश में मुरैना की गिनती उन चुनिंदा  जिलों में की जाती है जहाँ बसपा लड़ने और जीतने की स्तिथि में दिखाई देती है.

जिले की मुरैना विधानसभा सीट को लेकर पार्टी में गुटबाजी और खींचतान देखने को मिल रही है. पार्टी ने पिछले दिनों मुरैना विधानसभा सीट से जिला अध्यक्ष रामप्रकाश राजौरिया को उम्मीदवार घोषित किया था. जिसके बाद राजोरिया तेजी से अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे. 

प्रचार शुरू होने के कुछ दिनों बाद अब अचानक उनके स्थान पर नया उम्मीदवार घोषित किये जाने की चर्चाएं तेज हो गई है.

बताया जा रहा है कि दिमनी के विधायक बलवीर दंडोतिया मुरैना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं. बलवीर के साथ ही एक अन्य नाम, शिव सिंह गुर्जर का भी सामने आया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदीप अहिरवार ने कहा की ‘काकी राजोरिया का टिकट बदला जा रहा है या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कह सकते सूची जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी’

पार्टी के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार कहा कि सितंबर में राजोरिया को उम्मीदवार घोषित करने के निर्देश पार्टी मुख्यालय से प्राप्त हुए थे इसलिए उन्हें अधिकृत उम्मीदवार का पत्र दिया गया था अगर पार्टी कोई नया नाम भेजेगी दो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

सूत्रों ने बताया कि मुरैना में चल रहे घमासान के कारण पार्टी ने अपनी सूची को जारी होने से फिलहाल रोक दिया है