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मुख्यमंत्री कमल नाथ : मंत्रालय से नहीं पंचायतों से चलती है सरकार

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मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि सरकार मंत्रालय से नहीं, पंचायतों से चलती है। पंचायत व्यवस्था योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की धुरी है। अच्छी योजनाओं का क्रियान्वयन भी अच्छा होना चाहिये, अन्यथा वे सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रभावी बनाने के लिये योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया की समीक्षा  की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने  जिला एवं जनपद-पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा कि वे वर्तमान समय के संदर्भ में योजनाओं के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों की समीक्षा कर अपने सुझाव दें। सरकार के सहभागी नहीं, सहयोगी बनें। श्री नाथ आज प्रशासन अकादमी में जिला एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि हमारे देश और प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था गाँव से जुड़ी है। इसलिये फोकस ग्रामीण क्षेत्र पर है। पंचायत राज इसकी धुरी है । सरकार की योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी जिला जनपद पंचायत के सीईओ और पंचायत सचिव की है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएँ ऐसी हैं, जो पन्द्रह से बीस साल पहले बनीं। उनका क्रियान्वयन आज वैसा ही नहीं हो सकता है। उसमें परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इन योजनाओं के निर्माण से स्वत: जुड़े हैं। यूपीए सरकार में जब ये योजनाएँ बनी थीं, तब इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सुधार करवाये थे। उन्होंने कहा कि समय बदला है, तो सरकार को यह भी बतायें कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया में कौन से परिवर्तन करना है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ मिले।

लक्ष्य उत्कृष्ट क्रियान्वयन का बनाये

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की क्रियान्वयन व्यवस्थाओं की समीक्षा और सर्वे कराया जायेगा। पुरानी योजनाओं में क्या परिवर्तन कर सकते हैं, उनके जरिए और अधिक लोगों को कैसे लाभ पहुँचा सकते हैं, ये तथ्य सर्वे का आधार होंगे। उन्होंने जिला और जनपद पंचायत के सीईओ को जनता और सरकार के बीच की कड़ी बताते हुए कहा कि क्रियान्वयन में बदलाव हो, इसकी जिम्मेदारी भी उनकी है।

बेहतर उपयोग हो ग्रामीण क्षेत्रों के बजट का

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे देश का हो चाहे प्रदेश का, बजट का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च होता है। ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख व्यवसाय खेती-किसानी है। किसानों की क्रय शक्ति किस तरह बढ़ायें, इस पर भी हमें सोचना होगा। उन्होंने कहा कि कर्ज माफी स्थाई समाधान नहीं है, यह एक राहत है । इसके आगे यह सोचना होगा कि किसानों के अधिक उत्पादन का कैसे उपयोग करें, क्योंकि इससे ही उनकी आय को दोगुना कर सकते हैं, उनकी क्रय शक्ति को बढ़ा सकते हैं। किसानों की क्रय शक्ति से ही हमारी बहुत सी छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियाँ जुड़ी हैं, जो लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाती हैं। इस चुनौती को हम कैसे सफलता में बदलें, इसमें आप सभी को महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करना है।

जल-संरक्षण बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में पानी की उपलब्धता हमारे लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी।  इसके लिये हमें विशेष प्रयास करने की जरूरत है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा।

सड़क से सिर्फ आवागमन ही नहीं, निवेश भी आता है

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों से सिर्फ आवागमन की सुविधा नहीं होती। सड़क निर्माण से कई प्रकार का निवेश भी आता है, जो लोगों के रोजगार का माध्यम बनता है। हमें इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिये।

सरकार में सहयोगी बनें

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश की शासन व्यवस्था बदली है। हम नई सोच, नई दृष्टि के साथ एक विकासोन्मुखी-जनोन्मुखी प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना करने जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि इस प्रदेश में हर व्यक्ति को भोजन, पानी, आवास के साथ एक बेहतर जीवन जीने का वातावरण मिले।  इस नई  व्यवस्था में आपको साथ चलना है। मध्यप्रदेश के विकास का एक नया नक्शा बनाना हमारा संकल्प है। इसमें न केवल आप भागीदारी करें बल्कि सहयोगी भी बनें।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी के चहुँमुखी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिला एवं जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की है। विकास की एक सुनियोजित अवधारणा जमीन पर क्रियान्वित होना चाहिये। इस दिशा में प्रभावी तरीके से काम करने की आवश्यकता है।

श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की स्पष्ट सोच है कि सरकार आम जनता के हित के लिये बनी है। इसलिये पंचायत से जुड़ी सभी संस्थाओं का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं का अपने ही स्तर पर निदान करें ताकि हमारे ग्रामीण भाइयों को भटकना न पड़े। उन्होंने योजनाओं और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा। श्री पटेल ने कहा कि सरकार त्रि-स्तरीय पंचायत राज को सुदृढ़ बनाने के लिये काम कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री की पहल पर पंचायत पदाधिकारियों की स्वेच्छानुदान राशि में वृद्धि के आदेश जारी भी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाये।

अपर मुख्य सचिव श्रीमती गौरी सिंह ने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दी। जिला एवं जनपद के सीईओ ने अपने-अपने क्षेत्र में ग्रामीण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की जानकारी भी दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने नदी पुनर्जीवन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन भी किया।

कर्जमाफी के लिए 50 लाख से अधिक लोगों ने किया आवेदन

प्रदेश में जय किसान फसल ऋण माफी योजना में 15 जनवरी से पाँच फरवरी 2019 तक कुल 50 लाख 40 हजार 861 पात्र किसानों द्वारा आवेदन जमा किये गए हैं। जिनमें से 43 लाख 50 हजार आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किए जा चुके थे। वहीं बाकी आवेदन ऑनलाइन दर्ज करने का कार्य निरतंर जारी है।

आवेदन की अंतिम तिथि पाँच फरवरी तक हरे ऋण खाते के 29 लाख 61 हजार 84 में से 26 लाख 23 हजार 423 आवेदन, सफेद ऋण खाते के 26 लाख 628 में से 19 लाख 20 हजार 505 आवेदन तथा चार लाख 96 हजार 933 गुलाबी आवेदन, इस प्रकार 50 लाख 40 हजार 861 आवेदन प्राप्त हुए है। प्रदेश में कुल 55 लाख 61 हजार 712 ऋण खाते हैं। इनमें अपात्रता वाले किसान जैसे आयकरदाता/शासकीय सेवक, जन-प्रतिनिधि (विधायक, सांसद आदि) और जीएसटी पंजीयन वाले किसानों के फसल ऋण खाते भी सम्मिलित हैं। साथ ही जिन कृषकों के अलग-अलग ऋण खातों में 2 लाख रुपये ऋण से ज्यादा की ऋण राशि हैं, उनके द्वारा भी 2 लाख रुपये से ऊपर के अन्य ऋण खातों में आवेदन नहीं किये जाने के कारण कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या 50 लाख 40 हजार 861 रही है।

रोजमर्रा का सामान ले गए मंत्रियों के बंगलों में रहने वालेः पीसी शर्मा

प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार के मंत्रियों को आवंटित बंगलों में रहने वाले लोग बड़े सामान के अलावा रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी निकाल ले गए। इसलिए नए सिरे से बंगलों का रिनोवेशन कराया जा रहा है। बुधवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रियों द्वारा खाली किए गए बंगलों की हालत बेहद खराब है। कुर्सी-टेबल, पंखे, पलंग, इलेक्ट्रानिक सामान के अलावा बाथरूम में लगे सामान भी गायब हैं।
बता दें कि मंत्रियों और विधायकों को विधानसभा द्वारा बंगले आवंटित किए जाते हैं। इनमें लगा सामान भी विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है। जब मंत्री या विधायक को बंगला आवंटित किया जाता है तो उसमें लगे सामान के भौतिक सत्यापन के बाद मंत्री या उसके प्रतिनिधि से हस्ताक्षर कराए जाते हैं। यही तरीका बंगले खाली कराए जाने के दौरान अपनाया जाता है। अगर कोई सामान कम निकलता है तो विधानसभा सचिवालय उसकी वसूली करता है।
सरकार किसी की भी हो मंत्रियों को आवंटित बंगलों में रिनोवेशन उसकी और उसके परिजनों के मुताबिक हर बार काराया जाता है। यहां तक की कई मंत्री तो हर साल अपने घर का फर्नीचर हर साल बदलवाते हैं।

छिपकली की वजह से कार डिवाइडर से टकराई एक की मौत,तीन घायल

उत्तर प्रदेश: के उन्नाव जिले के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के तकिया गांव के पास रविवार दोपहर तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराई जिससे कार पलट गई। हादसे में डीएड छात्रा की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी बहन समेत तीन लोग घायल हुए है। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहा उनका इलाज चल रहा है

मैनपुरी जनपद के भटपुरा बेवर निवासी दीक्षा (23) पुत्री पंकज मिश्रा लखनऊ के मोहान रोड स्थित शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में डीएड(डिप्लोमा इन एजुकेशन) में प्रथम वर्ष की छात्रा थी। लखनऊ के बुद्धेश्वर चौराहा स्थित एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। कुछ दिन पहले वह छुट्टी लेकर घर आई थीरविवार को दीक्षा बहन मानसी (20) व बेवर मैनपुरी के श्यामपुर निवासी शरद सिंह चौहान (25) पुत्र जितेंद्र सिंह के साथ लखनऊ जाने के लिए घर से निकली थी। मानसी के अनुसार एक्सप्रेस-वे पर उन्होंने आगरा से लखनऊ जा रही कार में लिफ्ट ली थी। कार सीतापुर के वजीरनगर निवासी मो. सईद चला रहा था।

दोपहर करीब एक बजे कार जैसे ही बांगरमऊ के तकिया गांव के पास पहुंची तभी अचानक मो. सईद की सीट के पास एक छिपकली आ गई थी। कार चलाते हुए सईद ने कई बार उसे हाथ से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान कार अनियंत्रित हुई और डिवाइडर से टकराकर पलट गई।हादसे में दीक्षा कार से बाहर निकल सड़क किनारे सुरक्षा के लिए लगी लोहे की रेलिंग से टकरा गई। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मानसी, शरद व कार चला रहे मो. सईद घायल हो गए। घटना की सूचना पर पहुंची यूपीडा की एंबुलेंस ने घायलों को लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद दीक्षा और शरद को जिला अस्पताल व मो. सईद को ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया .

पश्चिम बंगाल में अब योगी आदित्यनाथ को हेलिकॉप्टर उतारने की इजाजत नहीं

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कोलकाताः पश्चिम बंगाल में रविवार को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की होने वाली रैली रद्द हो गई है। कारण, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस रैली के लिए इजाजत नहीं दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बिना किसी नोटिस के रैली की इजाजत खारिज कर दी गई है। वहीं भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने ममता सरकार के इस फैसले के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश में 100 से ज्यादा रैली करने वाली है इसी कड़ी में रविवार को योगी बांकुरा और पुरुलिया में दो रैली करने वाले थे। इसके अतिरिक्त 5 फरवरी को उनका रायगंज और दिनाजपुर जिले के बालूरघाट में रैली को संबोधित करने का कार्यक्रम भी है।

 

मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बताया कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का भाजपा का बढ़ता असर है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हेलीकॉप्टर लैंडिंग की इजाजत नहीं दी। पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता मुकुल रॉय ने बंगाल सरकार के इस फैसला को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक बताया है।

गौरतलब है कि इससे पहले झारग्राम में भाजपा अध्यक्ष के हेलिकॉप्टर को उतारने की इजाजत नहीं दी गई थी।यह दूसरी बार है। इससे पहले मालदा में भी ऐसा ही हुआ था।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी का मानना है कि सभी राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम आयोजित करने का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। त्रिपाठी की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भाजपा को राज्य में रथ यात्रा निकालने की अनुमति नहीं दिए जाने के संदर्भ में आयी है।

पश्चिम बंगाल में कभी भी राष्ट्रपति शासन लगाने का विचार मन में आने के संबंध में सवाल करने पर त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा कि वह अपने पास उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपने विचार तय करते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी वह विचार समुचित प्राधिकार को बताया जाना है। यह गोपनीय होगा।

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कुम्भ मेले के संगम में बड़ा हादसा 9 लोगों को ले जा रही नाव पलटी

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उत्तरप्रदेश: प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया. शनिवार सुबह संगम में श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पलट गई. इस नाव में 9 श्रद्धालु सवार थे. जैसे ही यह हादसा हुआ तुरंत एनडीआरएफ और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंच गई.कुंभ मेले के दौरान एक तरफ जहां राम मंदिर पर साधु संत मन की बात कर रहे हैं और इससे पहले राम मंदिर को लेकर दो धर्म संसद हो चुकी हैं. इस बीच प्रयागराज में यह हादसा हुआ है. हालांकि, इस साल कुंभ के लिए बड़े पैमाने सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं.

एनडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि त्रिवेणी संगम में श्रद्धालु से भरी एक नाव अचानक पलट गई. इस नाव में 9 लोग सवार थे. हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और सभी 9 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया.योगी सरकार दावा कर रही है कि इस बार भव्य अंदाज में कुंभ का आयोजन किया गया है. इसके लिए बड़ी रकम भी सरकार ने खर्च की है. साथ ही सुरक्षा व्यवस्था का भी खास ख्याल रखा गया है. हालांकि, कुंभ की शुरुआत से जनवरी महीने में ही कुंभ मेले में आगजनी की तीन घटनाएं हो चुकी हैं. इन घटनाओं में खास नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन व्यवस्था पर सवाल जरूर उठे.

आगजनी की पहली घटना 14 जनवरी को दिगंबर अखाड़े के शिविरों में हुई. यहां मेला परिसर के कई पंडाल जलकर खाक हो गए. 14 जनवरी को लगी इस आग का कराण सिलेंडर फटना निकल कर आया था. आग की इस घटना में भी किसी तरह की कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन साधुओं का सामान और रुपये खाक हो गए.

इसके बाद 16 जनवरी को स्वामी वासुदेवानंद के शिविर में आग लगी. शिविर में उस समय भंडारा चल रहा था. आग लगने से भंडारे का टेंट जलकर राख हो गया था. इसके तीन दिन बाद ही 19 जनवरी को मेले के सेक्टर-13 में सभा के पंडाल में अचानक आग लग गई. फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने आग बुझाई. यह घटना शॉर्ट सर्किट के कारण हुई बताई गई.

आगजनी की इन घटनाओं के बाद शनिवार को नाव पलटने का मामला सामने आया. हालांकि, राहत बचाव की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए हादसा होने से बचा लिया.

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युपी के जालौन हाईवे पर हुआ भयंकर हादसा, देखकर लोगो का कलेजा काप गया

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हाईवे से गुजरने वालों की मानें तो उरई मोड़ के पास करीब 200 मीटर तक हाईवे पर डिवाइडर न होना भी अक्सर हादसों का कारण साबित होता है। अक्सर वाहन इस कारण आमने सामने आ जाते हैं। ऐसे में यदि रफ्तार तेज हुई तो चालक के लिए वाहनों को संभालना मुश्किल हो जाता है। शुक्रवार के हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिसकी वजह से इतना दर्दनाक हादसा हो गया।  

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उत्तर प्रदेश के बांदा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट,चार लोगों की गई जान

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बांदा: बांदा जिले के बिसंड़ा कस्बे में एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक विस्फोट होने से चार लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।अपर पुलिस अधीक्षक लाल भरत कुमार पाल ने बताया कि बिसंड़ा कस्बे के मानस चौक में देशराज पटेल के पक्के मकान में किराए पर कोर्रही गांव निवासी नफीस खां पटाखा फैक्ट्री संचालित कर रहा था।

जिसमें गुरुवार देर शाम अचानक बारूद में आग लगने से विस्फोट हो गया, जिससे दो मंजिला पक्का मकान जमींदोज हो गया। विस्फोट में झुलस कर चार लोगों की मौत हो गई है और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है। मलबे से तीन शव देर रात निकाल लिए गए थे, जबकि एक शव तड़के निकाला गया है।

उन्होंने बताया कि मरने वालों में शाहरुख (19), सलमान (16), नफीस (35), रामभद्र (15) शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को इलाज के लिए कानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।मलबा हटाने का काम जारी है, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है।

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राम मंदिर के मुद्दे पर कुंभ में आज ‘मन की बात’ करेंगे साधु-संत

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लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) आज कुंभ में गंगा पूजन करेगा. वीएचपी के पदाधिकारी और साधु-संत संगम के एरावत गेट के पास हवन पूजन करेंगे, जिसमें मंदिर निर्माण का संकल्प लिया जाएगा. वहीं वीएचपी और आरएसएस द्वारा मंदिर मुद्दे पर बैकफुट पर चले जाने से नाराज साधु-संत आज मन की बात करेंगे. साधु-संतों का ये कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से होगा.

इससे पहले शंकराचार्य के परम धर्मसंसद के बाद शुक्रवार को प्रयागराज में वीएचपी की धर्मसंसद से भी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की किसी तारीख का ऐलान नहीं हुआ. इससे वहां मौजूद कई साधुओं और लोगों ने हंगामा किया. हालांकि संघ प्रमुख ने सरकार को सावधान करते हुए कहा कि हम मन वचन और कर्म से मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा और संघ इसके लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगा.

प्रयागराज के कुंभ में विश्व हिंदू परिषद का धर्मसंसद शुक्रवार को समाप्त हो गया. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर प्रस्ताव तो पढ़ा गया लेकिन उससे पहले संत मुनियों के प्रवचन के दौरान ही भक्तों को एक तबका भड़क उठा. सवाल सिर्फ एक है कि राम मंदिर निर्माण कब होगा. वीएचपी धर्मसंसद के प्रस्ताव में राम मंदिर निर्माण के लिए कोई ठोस नीति और तारीख नहीं दिखी. लेकिन संघ प्रमुख ने इशारों में ही सही मोदी सरकार को सावधान जरूर किया.

बता दें कि मोहन भागवत के बयानों को इन दिनों काफी तवज्जों दी जाती है, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सरकार और संघ दोनों से नाराज हैं.  वो साफतौर पर कह चुके हैं कि मंदिर निर्माण ना संघ से होगा, ना सरकार से होगा.

वीएचपी की धर्मसंसद में केंद्र सरकार की तरफ से अयोध्या में गैर विवादित जमीन के लिए कोर्ट में लगाई अर्जी का स्वागत किया गया, हालांकि मंदिर निर्माण में देरी पर सरकार के खिलाफ गुस्से को स्वाभाविक भी बताया गया लेकिन मोदी सरकार के बिना भी मंदिर का निर्माण संभव नहीं है. ये भी समझाया गया.

कुंभ में दो धर्मसंसद शुरु होकर खत्म हो गए. शंकराचार्य के परम धर्मसंसद ने 21 फरवरी को अयोध्या में शिलान्यास की तारीख तय की तो वीएचपी की धर्मसंसद में प्रण है लेकिन तारीख नहीं. फिलहाल मंदिर मस्जिद विवाद के हल के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का ही इंतजार है.

वीएचपी के धर्मसंसद पर हमला बोलते हुए महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि ये धर्म संसद नहीं, राजनीति है. उन्होंने कहा कि वह 4 मार्च के बाद साधु-संतों के साथ अयोध्या जाएंगे और मुस्लिम पक्षकारों से राम मंदिर मसले पर चर्चा करेंगे. उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम पक्षकारों से कहेंगे कि वे मस्जिद की जिद छोड़ दें. गिरी ने कहा कि सरकार अब मंदिर नहीं बना सकती. अब साधु ही मंदिर बनाएंगे.

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उत्तर प्रदेश में सिपाही के बेटे को तमंचा साफ़ करते समय लगी गोली

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उत्तर प्रदेश: के बरेली में पुलिस लाइन तैनात सिपाही के बेटे की तमंचा साफ करते समय गोली लगने से मौत हो गई। जिससे परिवार में कोहराम मच गया। वही मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से तमंचा, ब्रस और रेगमाल बरामद कर लिया है। पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।  

मूलरूप से मुरादाबाद के रामनगर निवासी ज्ञानप्रकाश सिद्धू यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में उनकी ड्यूटी बरेली पुलिस लाइन में चल रही है। पिछले करीब पंद्रह वर्षों से उनका परिवार अमरोहा के सुबोध नगर कॉलोनी में रहता है। परिवार में पत्नी शशि और दो बेटे हैं। एक बेटी थी जिसकी शादी कर दी है। बड़ा बेटा दीपक गोवा में निजी कंपनी में नौकरी करता है। जबकि छोटा बेटा विश्वदीप उर्फ मनी कक्षा दस का छात्र था। दीपक की शादी की बात चल रही। लिहाजा रविवार को गोदभराई की रस्में पूरी करने के लिए लड़की के घर जाना था। इसलिए दीपक भी घर आया हुआ है।

घर में खुशी-खुशी कार्यक्रम की तैयारियां चल रहीं थीं, लेकिन शुक्रवार की सुबह विश्वदीप उर्फ मनी करीब साढ़े आठ बजे ट्यूशन पढ़कर घर पहुंचा। अपनी मां शशि से खाना के लिए कहा और सीधा मकान की तीसरी मंजिल पर बने कमरे में पहुंच गया। जहां थोड़ी ही देर बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी। परिजन ऊपर पहुंचे तो मनी लहूलुहान हालत में फर्श पर पड़ा था। यह देखकर परिजनों की चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोग भी देखकर हेरान हो गये परिजनों ने उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने मौके से तमंचा, ब्रश, रेगमाल और एक खोखा बरामद कर लिया है। छात्र की मौत के बाद सिपाही पिता और मां का रो-रोक बुरा हाल है। थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया के तमंचा साफ करते समय हादसा हुआ है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तमंचा कहां से आया इसकी जांच की जा रही है।

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