चुनाव आया तो शिवराज सिंह चौहान को फिर याद आए पंडित कमल किशोर नागर

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वर्ष 2013 विधानसभा चुनाव के पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो दांव चले थे वहीं दांव वे इस चुनाव में जीत के लिए आजमा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ठीक पांच साल बाद शुक्रवार को एक बार फिर शाजापुर जिले के ग्राम सेमली धाम पहुंच गए। यहां पंडित कमल किशोर नागर का आश्रम है। मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग चालीस मिनट तक पंडित नागर से बंद कमरे मं चर्चा की। इस चर्चा के बाद वे चेहरे पर मुस्कान लेकर कमरे से बाहर निकले और सीधे हेलीकॉप्टर में बैठकर भोपाल आ गए। मुख्यमंत्री की मुस्कराहट का अर्थ यह निकाला जा रहा है कि पंडित कमल किशोर नागर ने उन्हें इस बार भी चुनाव जीतने का अशीर्वाद दे दिया है।

मालवा क्षेत्र की तेरह सीटों पर है पंडित नागर का प्रभाव – कथा वचक कमल किशोर नागर मालवा के संत के नाम से भी जाने जाते हैं। गौ संरक्षण में पंडित नागर की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। पंडित नागर का प्रभाव मालवा अंचल की तेरह सीटों पर देखने को मिलता है। गांव-गांव में पंडित नागर के अनुयायी मौजूद हैं। सितंबर माह में एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ उज्जैन में हुए संत समागम में पंडित कमल किशोर नागर भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में एट्रोसिटी एक्ट के बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का प्रस्ताव समागम में पारित किया गया था।

पंडित नागर की समागम में मौजूदगी से भाजपा की नींद उडी हुई थी। पिछला विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंडित नागर से दूरी बनाई हुई थी। पंडित नागर मुख्यमंत्री के इस रवैये से भी नाराज थे। शुक्रवार को अचानक मुख्यमंत्री सेमली धाम जा पहुंचे। बताया जाता है कि पहले तो पंडित नागर ने चुनाव में समर्थन देने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन, बाद में वे तटस्थ रहने को तैयार हो गए। पंडित नागर के नाराज होने का असर भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।

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