सुप्रीम कोर्ट के आदेश से विधानसभा चुनाव में मुश्किल हो सकती है शिवराज सिंह चौहान की राह

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एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ चल रहे सवर्ण आंदोलन के बीच पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राह मुश्किल कर दी है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था कि कोई माई का लाल पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिए अपने फैसले में पदोन्नति में आरक्षण देने न देने का फैसला राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़कर राजनीतिक दलों की मुसीबत बढ़ा दी है। कोई भी राजनीतिक दल आरक्षित वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।
मध्यप्रदेश में आरक्षण दिया तो नाराज होगा सवर्ण समाज
पदोन्नति में आक्षण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला लगभग दो साल पहले आया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को निरस्त कर दिया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारियों के संगठन अजाक्स के दबाव में फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। इस वर्ग को साधने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा बयान देते हुए कहा था कि कोई माई का लाल पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद मुख्यमंत्री पर उनके बयान के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को लागू करने के लिए दबाव बढ़ सकता है। राज्य में कुछ दिनों बाद ही विधानसभा के आम चुनाव के लिए वोट डाले जाना है। सरकार यदि पदोन्नति में आरक्षण देती है तो सवर्णों के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग भी नाराज होगा। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग कुल छत्तीस प्रतिशत है। पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग चालीस प्रतिशत है। पिछड़ा वर्ग को पदोन्नति में छोड़कर यह मामले में चौदह प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
सवर्णों को कमजोर करने के लिए पिछड़ा वर्ग थाम सकता है अजाक्स का हाथ
सापाक्स का गठन सामान्य,अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किया गया है। एट्रोसिटी एक्ट के बाद भारतीय जनता पार्टी इस कोशिश में लगी हुई है कि सपाक्स से पिछड़ा वर्ग अपने आपको अलग कर ले। पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कर्मचारियों ने मध्यप्रदेश में अपाक्स नामक संगठन बनाया हुआ है। 23 सितंबर को भोपाल में अजाक्स और अपाक्स ने एक संयुक्त कार्यक्रम कर अपनी ताकत दिखाई थी। राज्य में चुनाव से ठीक पहले अनुसूचित जाति,जनजाति और पिछड़ा वर्ग का कोई मेल होता है तो इसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ेगा। अपाक्स संगठन के प्रांताध्यक्ष भुवनेश पटेल ने कहा कि हमने कभी भी सपाक्स का समर्थन नहीं किया है। अजाक्स और अपाक्स को एक साथ लाने के लिए पिछड़ा वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत निर्धारित की है।

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