आधार की संवैधानिकता बरकरार,बैंक खाते से आधार को जोड़ना अब जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट

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आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम फैसला सुना दिया। केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाने से पहले बहुमत का फैसला पढ़ते हुए यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से पैन को जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते से आधार को जोड़ना अब जरूरी नहीं। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आधार एक्ट के सेक्शन 33(2) को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इससे डेटा शेयरिंग पर रोक लग जाएगी। इसके अलावा सेक्शन 57 पर भी रोक लगा दी गई है। सेक्शन 57 के तहत सरकार और प्राइवेट कंपनियों को आधार का डेटा मांगने का अधिकार दिया गया है। जस्टिस एके सीकरी ये फैसला पढ़ रहे हैं।

प्राइवेट कंपनियों को बायोमैट्रिक डेटा साझा करने का अधिकार नहीं

फैसले में कहा गया कि प्राइवेट कंपनी बायोमैट्रिक डेटा साझा नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा CBSE और NEET आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं। स्कूल भी एडमिशन के लिए लिए आधार कार्ड को अनिवार्य तौर पर नहीं मांग सकते हैं। इसके लिए अवैध प्रवासियों को आधार नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके जरिए आधार से हाशिए पर जी रहे लोगों को सुविधा हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखा

सीकरी ने आधार पर फैसला पढ़ते हुए कहा कि राज्य और जनता के हित संतुलित होने चाहिए। संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पर कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखा है। आधार 12 अंको की एक संख्या है जो देश के नागरिकों के लिए पहचान के तौर पर जारी की जाती है। आधार के जरिए कई योजनाओं का फायदा सीधे लाभार्थियों को उनके बैंक अकाउंट में दिया जाता है। आधार कार्ड पर फैसला मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा और जज एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड और अशोक भूषण की बैंच ने सुनाया है। आधार के इस फैसले से सरकार और लोगों पर बड़ा असर पड़ेगा।

आधार की सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन को लेकर हमेशा सवाल उठता है। सरकार का दलील है कि आधार के जरिए कई कामों में सुविधा हुई है। अभी UIDAI देश में आधार कार्ड जारी करता है। इसमें लोगों के बायोमेट्रिक, आइरिश और फोटो की जानकारी ली जाती है। ये डेटा UIDAI के सर्वर में रहता है। जिसे भेद पाना बहुत मुश्किल है।

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