मध्यप्रदेश में बसपा उम्मीदवारों की पहली सूची: कांग्रेस की महागठबंधन बनाने की कोशिशों को मायावती का झटका

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिशों को बसपा प्रमुख मायावती ने जबरदस्त झटका दिया है। मायावती ने मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए अपने 22 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इस सूची में चार में से तीन मौजूदा विधायकों के नाम हैं। बसपा की पहली सूची जारी होने के बाद यह माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस से गठबंधन की संभावनाएं खत्म हो गईं हैं। वहीं मायावती ने छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन करने की घोषणा कर दी है। वहां भी कांग्रेस से समझौता नहीं किया है।

अजित जोगी ने नब्बे में से 35 सीटें मायावती के लिए छोड़ दी हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ, बसपा से समझौता करने के संकेत लगातार दे रहे थे। बसपा के बाद अब निगाह समाजवादी पार्टी पर टिकी हुईं हैं। राज्य की उत्तरप्रदेश से लगी हुए विधानसभा क्षेत्रों में बसपा और सपा का असर है।

मायावती की शर्तों पर समझौते के लिए तैयार नहीं हुई कांग्रेस

मध्यप्रदेश में कांग्रेस समझौते में शामिल होने वाले दलों के लिए सिर्फ तीस सीटें देने को तैयार थी। राज्य में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। कांग्रेस तीन दलों से गठबंधन की बात कर रही थी। बसपा एवं सपा के अलावा गोड़वाना गणतंत्र पार्टी से भी समझौते की बात चल रही थी।

कांग्रेस इन तीनों दलों को उसकी क्षमता के आधार पर सीटें छोड़ने को तैयार थी। मायावती अकेले अपने लिए पचास से अधिक सीटें मांग रहीं थीं। अखिलेश यादव और गोंडवाना गंणतंत्र पार्टी की मांग भी इतनी ही सीटों की थी। कांग्रेस सौ सीटें समझौते में देकर यह संदेश नहीं देना चाहती कि राज्य में उसकी स्थिति अकेले सरकार बनाने की नहीं है। राज्य में इन दिनों एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ सवर्ण सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहा है।

सवर्णों की नाराजगी से भाजपा को नुकसान होने की संभावना ज्यादा प्रकट की जा रही है। लेकिन, इस बात पर अभी भी संदेह है कि सवर्णों का वोट कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। राज्य में कोई ऐसा तीसरा दल नहीं है जो अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में हो। कांग्रेस के रणनीतिकारों का यह भी मानना रहा है कि मौजूदा हालात में बसपा से समझौता न करने से ही सवर्ण मतदाता कांग्रेस के पक्ष में आ सकता है। राज्य में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कुल सीटों की संख्या 35 है। इनमें से सिर्फ चार सीटें कांग्रेस के पास हैं। भाजपा के पास 28 सीटें हैं। इन सीटों पर सवर्ण कांग्रेस और बसपा में से जिस भी दल के पक्ष में मतदान करेंगे,उसे लाभ हो सकता है। संभावना यह भी प्रकट की जा रही है कि राज्य में अनुसूचित जाति वर्ग का मतदाता इस बार भाजपा को हराने के लिए वोट करेंगे। ऐसी स्थिति में वह बसपा के बजाए कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है। राज्य में बसपा का वोट शेयर सात प्रतिशत से अधिक है। पिछले दो चुनाव का ट्रेंड बसपा के घटते जनाधार की ओर इशारा करता है।

बीएसपी द्वारा घोषित की गई 22 उम्मीदवारों की सूचि

22 उम्मीदवारों की सूचि

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