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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सपाक्स प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात पर नाराज़ है सवर्ण कर्मचारी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को सपाक्स के प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री निवास में चर्चा के लिए बुलाया था। जहाँ उन्होंने अपने द्वारा दिए गए माई के लाल वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय वो नहीं था, जो सपाक्स ने निकाला है। मुख्यमंत्री से सपाक्स के प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात से सवर्ण कर्मचारी नाराज़ है। सवर्ण कर्मचारियों की नाराज़गी सपाक्स के फेसबुक पेज पर साफ़ दिखाई दे रही है।

मुख्यमंत्री से प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात पर कर्मचारियों की नाराज़गी

सपाक्स प्रतिनिधि मंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात पर सफाई देते हुए कहा है कि ” माननीय मुख्यमंत्री जी के बुलाने पर सपाक्स का प्रतिनिधिमंडल मिलने गया था अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति निम्नानुसार संलग्न है समाचार पत्रों द्वारा इसके अतिरिक्त जो भी जानकारी छापी जा रही है वह उनका स्वयं का मत है”

सपाक्स प्रतिनिधि मंडल द्वारा दी गई मुख्यमंत्री से मुलाकात पर सफाई

 

सवर्ण आंदोलन: फूट डालों चुनाव जीतों की रणनीति अपना रही है भाजपा

एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ मध्यप्रदेश में उभरे सवर्णों के आक्रोश के बाद भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के तेवर ढीले पड़ते जरूर दिखाई दे रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान को यह डर सताने लगा है कि कहीं राज्य का उच्च वर्ग दिग्विजय सिंह की तरह उन्हें भी राजनीतिक वनवास पर न भेज दे? वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी अपने दलित प्रेम के चलते ही यह कहना शुरू कर दिया था कि उन्हें सवर्णों के वोट की जरूरत नहीं है। सवर्ण आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भाजपा की रणनीति फूट डालों, चुनाव जीतो की है। इसी रणनीति के तहत पहले सपाक्स को मनाया गया है।

प्रमोशन में रिजर्वेशन पर शिवराज सिंह ने कहा था कोई माई का लाल नहीं रोक सकता

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संगठन के एक कार्यक्रम में अचानक पहुंच कर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोई माई का लाल ऐसा पैदा नहीं हुआ जो प्रमोशन मे रिजर्वेशन को समाप्त कर सके। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद ही राज्य में सामान्य, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों ने सपाक्स नाम के संगठन बनाकर लिया।

संगठन पिछले दो साल से लगातार सरकार आरक्षित वर्ग के प्रति उपजे प्रेम का विरोध कर रहा है। मैं हूं माई का लाल की टोपी लगाकर विरोध कर रहे हैं। एट्रोसिटी एक्ट में केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा संसद से पास कराए गए संशोधन विधेयक का विरोध मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा है। राज्य के कई इलाकों में हालात वर्ग संघर्ष के निर्मित हो रहे हैँ। आंदोलन का नेतृत्व करणी सेना कर रही है। सीधी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को काले झंडे दिखाने की जिम्मेदारी भी करणी सेना ने ली थी। करणी सेना और अन्य सवर्ण संगठन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं को लगातार काले झंडे दिखा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आरक्षण विरोधियों की तकरार भी हो चुकी है।

काले कपड़े और दुपट्टा पहने हैं तो उतरवा दिए जाते हैं

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट को लेकर उभरे विरोध और काले झंडों से भाजपा के नेता खासतौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहद परेशान नजर आ रहे हैं। राज्य में दो माह बाद विधानसभा के चुनाव के लिए वोट डाले जाना है। सवर्णों के विरोध से चुनावी माहौल भाजपा के खिलाफ बनता जा रहा है। राज्य में पिछले पंद्रह साल से भाजपा की सरकार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले तेरह साल से मुख्यमंत्री हैं। पंद्रह साल के लंबे शासन के कारण भी मतदाता भाजपा से नाराज दिखाई दे रहा है।

एट्रोसिटी एक्ट और प्रमोशन में रिजर्वेशन के मामले ने आग में घी का काम किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों जन आशीर्वाद यात्रा के तहत राज्य भर में सभाएं कर रहे हैँ। इन सभाओं में काले झंडे दिखाए जाने की एक घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने सभा में काले कपड़े पहनकर शामिल होने वाले पुरूषों और महिलाओं को रोकना शुरू कर दिया है। बैतूल जिले में लड़कियों से काले दुपट्टे उतरवा लिए गए थे। रतलाम में करणी सेना का विरोध इस शर्त पर रूका था कि मुख्यमंत्री उनकी मांगों पर विचार करेंगें।

सवर्ण आंदोलन को कमजोर करने की कवायद तेज

मंदसौर में किसानों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए जिस तरह मुख्यमंत्री ने भारतीय किसान संघ के आंदोलनकारियों से बात करने के बजाए भारतीय किसान संघ से बात की थी उसी तरह सवर्ण आंदोलन को बाँटने के लिए सपाक्स से बातचीत की शुरूआत मुख्यमंत्री ने की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को सपाक्स के प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री निवास में चर्चा के लिए बुलाया था।

इस चर्चा के बाद बताया गया कि मुख्यमंत्री ने माई के लाल वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय वो नहीं था, जो सपाक्स ने निकाला है। प्रमोशन में रिजर्वेशन का मामले में मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने के लिए कहा है। सपाक्स के राजनीतिक संगठन से मुख्यमंत्री की कोई बात नहीं हुई है। राजनीतिक संगठन चुनाव में अपने प्रतिनिधि उतारने जा रहा है। करणी सेना से भी अब तक कोई चर्चा मुख्यमंत्री की नहीं हुई है। मंदसौर किसान आंदोलन में भारतीय किसान संघ से समझौता कर भ्रमित करने की कोशिश का परिणाम पुलिस फायरिंग के तौर पर सामने आ चुका है।

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