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पंचांग-14 सितम्बर 2018,सिंह राशि के जातकों को आज भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी

  *««« आज का पंचांग »»»*

कलियुगाब्द………………..…..5120
विक्रम संवत्……………………2075
शक संवत्……………………...1940
मास……………………………भाद्रपद
पक्ष……………………..……….शुक्ल
तिथी……………………..……..पंचमी
दोप 02.29 पर्यंत पश्चात षष्ठी
रवि…………………………दक्षिणायन
सूर्योदय……………….06.13.17 पर
सूर्यास्त……………….06.31.15 पर
सूर्य राशि……………………..…..सिंह
चन्द्र राशि……………………..….तुला
नक्षत्र…………………..……..विशाखा
रात्रि 01.24 पर्यंत पश्चात अनुराधा
योग………………………………वैधृति
रात्रि 11.20 पर्यंत पश्चात विष्कुम्भ
करण…………………………….बालव
दोप 02.29 पर्यंत पश्चात कौलव
ऋतु………………………………..वर्षा
दिन……………………………शुक्रवार
🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
14 सितम्बर सन 2018 ईस्वी ।
🔯 *तिथि विशेष (व्रत/पर्व) -*
👳🏻‍♂ *ऋषि पंचमी -*
ऋषि पञ्चमी का व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी को सम्पादित होता है। प्रथमत: यह सभी वर्णों के पुरुषों के लिए प्रतिपादित था, किन्तु अब यह अधिकांश में नारियों द्वारा किया जाता है। हेमाद्रि ने ब्रह्माण्ड पुराण को उद्धृत कर विशद विवरण उपस्थित किया है। व्यक्ति को नदी आदि में स्नान करने तथा आह्लिक कृत्य करने के उपरान्त अग्निहोत्रशाला में जाना चाहिए, सातों ऋषियों की प्रतिमाओं को पंचामृत में नहलाना चाहिए, उन पर चन्दन लेप, कपूर लगाना चाहिए, पुष्पों, सुगन्धित पदार्थों, धूप, दीप, श्वेत वस्त्रों, यज्ञोपवीतों, अधिक मात्रा में नैवेद्य से पूजा करनी चाहिए और मन्त्रों के साथ अर्ध्य चढ़ाना चाहिए।
यह व्रत कैसे करें :-
* प्रातः नदी आदि पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
* तत्पश्चात घर में ही किसी पवित्र स्थान पर पृथ्वी को शुद्ध करके हल्दी से चौकोर मंडल (चौक पूरें) बनाएं। फिर उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें।
* इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सप्तर्षियों का पूजन करें।
_* तत्पश्चात निम्न मंत्र से अर्घ्य दें-
*’कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः।*
*जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥*
*दहन्तु पापं मे सर्वं गृह्नणन्त्वर्घ्यं नमो नमः॥*
* अब व्रत कथा सुनकर आरती कर प्रसाद वितरित करें।
* तदुपरांत अकृष्ट (बिना बोई हुई) पृथ्वी में पैदा हुए शाकादि का आहार लें।
* इस प्रकार सात वर्ष तक व्रत करके आठवें वर्ष में सप्त ऋषियों की सोने की सात मूर्तियां बनवाएं।
* तत्पश्चात कलश स्थापन करके यथाविधि पूजन करें।
* अंत में सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन करा कर उनका विसर्जन करें।
📜 *ऋषि पंचमी की व्रतकथा -*
विदर्भ देश में उत्तंक नामक एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था। उस ब्राह्मण के एक पुत्र तथा एक पुत्री दो संतान थी। विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया। दैवयोग से कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई। दुखी ब्राह्मण दम्पति कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे।
एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया। कन्या ने सारी बात मां से कही। मां ने पति से सब कहते हुए पूछा- प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है?
उत्तंक ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया- पूर्व जन्म में भी यह कन्या ब्राह्मणी थी। इसने रजस्वला होते ही बर्तन छू दिए थे। इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा-देखी ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया। इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं।
धर्म-शास्त्रों की मान्यता है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है। वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है। यदि यह शुद्ध मन से अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी।
पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया। व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई। अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला।
शास्त्रों के अनुसार ऋषि पंचमी पर हल से जोते अनाज आदि का सेवन निषिद्घ है। ऋषि पंचमी के अवसर पर महिलाएं व कुंआरी युवतियां सप्तऋषि को प्रसन्न करने के लिए इस पूर्ण फलदायी व्रत को रखेंगी।
कहा जाता है कि पटिए पर सात ऋषि बनाकर दूध, दही, घी, शहद व जल से उनका अभिषेक किया जाता है, साथ ही रोली, चावल, धूप, दीप आदि से उनका पूजन करके, तत्पश्चात कथा सुनने के बाद घी से होम किया जाएगा।
जो महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत रखेंगी, वे सुबह-शाम दो समय फलाहार कर ही व्रत को पूर्ण करेंगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में हल से जुता हुआ कुछ भी नहीं खाते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर ही व्रत किया जाता है । वे केवल फल, मेवा व समां की खीर, मोरधान से बने व्यंजनों को खाकर व्रत रखती है  तथा घर-घर में भजन-कीर्तनों का आयोजन किया जाता है ।
☸ शुभ अंक………………….5
🔯 शुभ रंग……………आसमानी
👁🗨 *राहुकाल :-*
प्रात: 10.50 से 12.22 तक ।
🚦 *दिशाशूल :-*
पश्चिमदिशा – यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें।
✡ चौघडिया :-
प्रात: 07.47 से 09.18 तक लाभ
प्रात: 09.18 से 10.50 तक अमृत
दोप. 12.21 से 01.52 तक शुभ
सायं 04.55 से 06.27 तक चंचल
रात्रि 09.24 से 10.52 तक लाभ ।
📿 आज का मंत्र :-
।। ॐ करिरुपाय नमः ।।
📢 संस्कृत सुभाषितानि —
सत्संगत्वे निस्संगत्वं, निस्संगत्वे निर्मोहत्वं।
निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तिः॥९॥
अर्थात :-
सत्संग से वैराग्य, वैराग्य से विवेक, विवेक से स्थिर तत्त्वज्ञान और तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है॥९॥
🍃 *आरोग्यं सलाह :-*
*खुशी के लिए सात योग  -*
*3. पद्मासन -*
पद्मासन रीढ़ की हड्डी में परिसंचरण या सर्कुलेशन को बढ़ाने, पेट के अंगों को पोषण देने और टोन करने तथा एड़ियों और पैरों को मजबूत करने और कूल्हों में लचीलापन बढ़ाने के लिए जाना जाता है। यह तनाव को कम करने में भी मदद करता है, जो हार्मोन को विनियमित करने में एक भूमिका निभाता है। पद्मासन मुख्य रूप से कूल्हों को खोलने मदद करता है, जबकि कोर और बैक को मजबूत करते हैं, जो आम तौर पर मासिक धर्म के दौरान असुविधा के बिंदु होते हैं।
⚜ आज का राशिफल :- 
🐏 *राशि फलादेश मेष :-*
विरोधी सक्रिय रहेंगे। कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। शोक समाचार मिल सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें।
🐂 *राशि फलादेश वृष :-*
उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। रोजगार में वृद्धि होगी। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। कार्य की अधिकता से थकान रहेगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। भागदौड़ रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। धनार्जन होगा।
👫 *राशि फलादेश मिथुन :-*
किसी पारिवारिक आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। विवाद न करें। रिश्तेदारों से तनाव रहेगा। पुराना रोग उभर सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
🦀 *राशि फलादेश कर्क :-*
बुरी सूचना मिल सकती है। रिश्तेदारों से तनाव रहेगा। क्रोध व उत्तेजना की अधिकता रहेगी। नियंत्रण रखें। पुराना रोग उभर सकता है। भागदौड़ रहेगी। व्यवसाय में कमी रहेगी। विवाद में न पड़ें।
🦁 *राशि फलादेश सिंह :-*
कोशिशें सफल रहेंगी। कार्यसिद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। जल्दबाजी न करें। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शत्रु शांत रहेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे।
👱🏻‍♀ *राशि फलादेश कन्या :-*
भूले-बिसरे साथी-रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। यात्रा सफल रहेगी। निवेश लाभदायक रहेगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा।
⚖ *राशि फलादेश तुला :-*
भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। रोजगार में वृद्धि होगी। भाग्योदय संभव है। प्रसन्नता रहेगी।
🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-*
फालतू खर्च होगा। आय में कमी हो सकती है। विवाद को बढ़ावा न दें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। तनाव रहेगा। डूबी हुई रकम प्राप्त होगी। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी
🏹 *राशि फलादेश धनु :-*
डूबा हुआ धन मिल सकता है। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। यात्रा सफल रहेगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। धनार्जन होगा। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।
🐊 *राशि फलादेश मकर :-*
नई योजना बनेगी। तुरंत परिणाम नहीं मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा। धनार्जन होगा। जल्दबाजी न करें। प्रसन्नता रहेगी। घर-बाहर पूछ-परख बढ़ेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। योजना फलीभूत होगी। बाहरी सहयोग से काम बनेंगे।
🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-*
तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। कोर्ट व कचहरी के काम निबटेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। लाभ होगा। धार्मिक यात्रा हो सकती है। सत्संग का लाभ मिलेगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी।
🐋 *राशि फलादेश मीन :-*
जल्दबाजी व लापरवाही से बड़ा नुकसान संभव है। वस्तुएं संभालकर रखें। विवाद न करें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। लाभ मे कमी होगी। जोखिम न लें। कुसंगति से बचें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो |

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