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अटलजी की अंतिम यात्रा बीजेपी मुख्यालय से होगी शुरू,कई रास्ते रहेंगे बंद

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी को राष्ट्रीय सत्ता में स्थापित करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को 94 साल की उम्र में निधन हो गया। वह दिल्ली के एम्स में बुधवार रात से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। वाजपेयी खराब स्वास्थ्य की वजह से करीब पिछले दो महीने से यहां पर भर्ती थे। अटल बिहारी वाजपेयी अपनी जिंदादिली के लिए मशहूर थे। सदन में सबके चेहरे की मुस्कान बनने वाले वाजपेयी के लिए गुरुवार को पूरे देश ने शोक मनाया। उनकी हालत पिछले 24 घंटों से नाजुक बनी हुई थी। दूसरी और सभी जगह उनके लिए प्रार्थनाएं की जा रही थी। लेकिन पूरे देश की प्रार्थनाओं को उस वक्त झटका लगा जब एम्स से उनके निधन की खबर सामने आई।

एम्स के चिकित्सकों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निमोनिया से पीड़ित थे और उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने गुरुवार को वाजपेयी के निधन की घोषणा की। पूर्व प्रधानमंत्री को कई समस्याओं को लेकर 11 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अटल जी का शुक्रवार शाम 4 बजे नई दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल (विजय घाट, राज घाट) के पास अंतिम संस्कार होगा। उनकी अंतिम यात्रा दोपहर एक बजे बीजेपी मुख्यालय से शुरू होगी जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, दिल्ली गेट, नेताजी सुभाष मार्ग, निषाद राज मार्ग और शांति वन चौक से गुजरते हुए राष्ट्रीय स्मृति स्थल पहुंचेगी।

ये मार्ग रहेंगे बंद

इसके तहत कृष्‍णा मेमन मार्ग, सुनहरी बाग रोड, तुगलक रोड, अकबर रोड, तीस जनवरी मार्ग, क्‍लेरिज होटल से विंडसर प्‍लाजा के बीच जनपथ, मानसिंह रोड, शाहजहां रोड से तिलक मार्ग सी-हैक्‍सागन, आईपी मार्ग, डीडीयू मार्ग के रास्‍ते सुबह आठ बजे से बंद रहेंगे।

कैसा था अटल जी का व्यक्तित्व

अटल का व्यक्तित्व हमेशा से ही दूसरों को प्रभावित करता रहा है। एक पत्रकार, कवि और नेता के रूप में अटल जी ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। अटलजी ने खुद एक बार कहा था कि वे कभी भी नेता नहीं बनना चाहते थे, वह तो पत्रकार बनकर देश की समस्याओं को सवालों के जरिए सामने लाना चाहते थे। हालांकि देश के प्रति प्रेम से भरे अटल की किस्मत में तो प्रधानमंत्री बनना ही लिखा था।

पिता के ही साथ ही की एलएलबी की पढ़ाई

अटल बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार थे। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से पढ़ाई की थी। साल 1946 में अटल ने राजनीति शास्त्र में एमए में टॉप किया था। बाद में इसी कॉलेज से अटल ने कानून की पढ़ाई की। आपको जानकर हैरानी होगी कि अटल के पिता पंडित कृष्ण बिहारी लाल वाजपेयी भी उनके साथ एलएलबी की पढ़ाई किया करते थे।

अटल के जमाने में यह कॉलेज आगरा विश्वविद्यालय से जुड़ा था लेकिन अब यह कानपुर विश्वविद्यालय से जुड़ा है। अटल अपने पिताजी के साथ कॉलेज के हॉस्टल में रहा करते थे और दोनों लोगों की जुगलबंदी पूरे कॉलेज में मशहूर थी।

जब अटल क्लास में नहीं होते थे तो उनके पिता से प्रोफेसर पूछ लिया करते थे कि आपके साहबजादे कहां नदारद हैं पंडित जी। तब अटल के पिता कहा करते थे,कमरे की कुंडी लगाकर आते होंगे प्रोफसर साहब। लेकिन वहां के छात्रों में पिता-पुत्र के बारे में बातें होने लगी थी। जिसके कारण उन्होंने अपने सेक्शन बदल लिए थे।

अटल ने 1948 में एलएलबी में एडमिशन लिया था लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काम की वजह से उन्हें 1949 में लखनऊ जाना पड़ा और कानून की पढ़ाई बीच में छूट गई। लेकिन जब तक वह कानपुर में रहे, उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर ट्यूशन भी पढ़ाई। हालांकि ग्वालियर के राजा ने उन्हें 75 रुपए की छात्रवृत्ति दिलवाई थी। जिसे लेकर वह कानपुर पढ़ने आए थे।

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