पांच हजार से कम वोट की जीत वाली विधानसभा सीटों की चिंता

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मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही पिछले चुनाव के नतीजों के आधार पर साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव का गणित लगा रही है। विधानसभा क्षेत्र में पांच हजार वोटों से कम की जीत को बॉर्डर लाइन जीत मानी जाती है। यह माना जाता है कि उम्मीदवार कड़े मुकाबले से जीतकर आया है। पिछले विधानसभा चुनाव में लगभग 44 सीटें ऐसी थीं, जिसमें कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पांच हजार से कम वोटों से चुनाव जीते थे।

दोनों राजनीतिक दल इन सीटों पर जीते विधायकों को दोबारा उम्मीदवार बनाने से डर रहे हैं । भारतीय जनता पार्टी से ऐसी सीटों पर चुनाव जीते कुछ विधायक शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में सदस्य भी हैं। भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार यह राय रखते हैं कि वर्तमान एंटी इनकंबेंसी के हालात में इन विधायकों को टिकट नहीं देना चाहिए। जिन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार 5000 कम वोटों से चुनाव जीते थे वे मेहगांव, ग्वालियर पूर्व, पोहरी सुरखी, छतरपुर, मलहरा, दमोह, हटा, गुन्नौर, सीधी, बड़वारा जबलपुर पूर्व, बरघाट, कुरवाई, शमशाबाद, ब्यावरा, शाजापुर, सोनकच्छ, मंधाता, महेश्वर, सरदारपुर और सैलाना है।

कांग्रेस के उम्मीदवार जिन सीटों पर पांच हजार से कम वोटों से जीते थे वे मनगवां, जतारा, इछावर, जबलपुर पश्चिम, गुढ़ पांण्डुर्णा, कोतमा, सिरोंज, सीहोर, भगवानपुर, दिमनी, विजयपुर, भीकनगांव परसवाड़ा, मंडला, रैगांव, हरदा, अमरवाड़ा, केवलारी मुंगावली, अटेर और बहोरीबंद हैं।

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