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83 प्रतिशत सफल रहा 'स्वच्छ भारत मिशन ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत मिशन ' को 83 प्रतिशत से अधिक लोगों ने सफल करार देते हुए कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में उनका इलाका साफ- सफाई के मामले में बेहतर हुआ है।
83 प्रतिशत सफल रहा 'स्वच्छ भारत मिशन ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत मिशन ' को 83 प्रतिशत से अधिक लोगों ने सफल करार देते हुए कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में उनका इलाका साफ- सफाई के मामले में बेहतर हुआ है।

स्वच्छता रैंकिंग में मध्य प्रदेश का इंदौर नंबर 1, भोपाल नं. 2

स्वच्छता रैंकिंग में मध्य प्रदेश का इंदौर नंबर 1, भोपाल नं. 2

केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराये गए स्वच्छ भारत अभियान के सर्वे में मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सबसे साफ साबित हुआ है। साल 2017 के स्वच्छ सर्वेक्षण के अनुसार, स्वच्छता रैंकिंग में इंदौर पहले स्थान पर रहा, तो वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल दूसरे स्थान पर रहा। वहीं सफाई के मामले में यूपी सबसे फिसड्डी साबित हुआ। देश के दस सबसे गंदे शहरों पर चार यूपी के ही थे।

टॉप फाइव शहर

इस सर्वे में मध्यप्रदेश के दो शहर इंदौर पहले नंबर पर है और दूसरे नंबर पर भोपाल है। मध्यप्रदेश ने कर्नाटक के शहर मैसूर को पिछाड़कर यह रैंक हासिल की है। मैसूर 2014 और 2016 में स्वच्छता के मामले में पहले स्थान पर था लेकिन इस साल के सर्वे में मैसूर पांचवें नंबर पर आ गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने बताया कि तीसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम और चौथे नंबर पर गुजरात का सूरत है।

दिल्ली की रैंकिंग फिसलीँ

स्वच्छ भारत अभियान 2014 में शुरू किया गया था जिसके तहत देश को स्वच्छ बनाना और 2019 तक खुले में शौच मुक्त बनाना है। वहीं नई दिल्ली इस साल टॉप फाइव शहरों की सूची से गिरकर सातवें नंबर पर आ गया है। पिछले साल नई दिल्ली नगर परिषद स्वच्छ शहरों की सूची में टॉप पांच शहरों में शामिल था।

वाराणसी में स्वच्छता के मामले में काफी सुधरा

इस सर्वे में यूपी की शहर सबसे गंदे हैं। सर्वे में यूपी के 62 शहरों को शामिल किया गया था लेकिन कोई भी शहर पहले 30 स्थानों में शामिल नहीं हो सका है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्ष्‍ोत्र वाराणसी की रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है। 2014 के सर्वे में 476 शहरों में से वाराणसी 418वें नंबर पर था लेकिन इस साल उसकी इस हालत में काफी सुधार हुआ है। इस साल के सर्वे में सबसे स्वच्छ शहरों में वाराणसी 32वें नंबर पर है।

यूपी का गोंडा शहर सबसे गंदा

यूपी का गोंडा सबसे गंदा शहर है। इस सर्वे में गोंडा 434वें नंबर पर रहा। जब महाराष्ट्र का भुसावल उससे ऊपर है। बिहार का बगहा 432, यूपी का हरदोई 431 और बिहार का कटिहार 430वें नंबर पर है।

सबसे गंदे शहरों की सूची

नार्थ इंडिया के 10 सबसे गंदे शहरों की सूची में यूपी के 5 शहर शामिल हैं। इसमें से बिहार और पंजाब के दो-दो और महाराष्ट्र का एक शहर शामिल है।

गुजरात के 12 शहर सबसे साफ शहरों में

सबसे साफ 50 शहरों में पीएम मोदी का गृह राज्य गुजरात के 12 शहर शामिल हैं।

इस आधार पर तय की शहरों की लिस्ट

शहरी विकास मंत्रालय ने सर्वे के दौरान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट कलेक्शन, शौचालयों के हालात, सफाई को लेकर लोगों की क्या सुधार हुआ, सफाई पर लोग कितना शिक्षित हुए इसको आधार बनाया गया। मंत्रालय की काउंसिल ने देश के 38 शहरों को सम्मानित करने की सिफारिश की थी। काउंसिल ने इन शहरों में जाकर सड़क से लेकर सार्वजनिक स्थानों, मार्केट, रेलवे लाइन, बस स्टैंड और सेक्टर कॉलोनियों का सर्वे कर सफाई की रिपोर्ट तैयार की थी। ये सर्वे इस साल जनवरी से फरवरी के बीच में किया गया था।

शहरों को 2000 अंकों के लिए सर्वे हुआ। इसमें निगम के अपने लेवल पर किए गए काम के लिए 900 में से अंक दिए गए। केंद्र की टीम का मूल्यांकन ने 500 में से अंक दिए गए और साफ-सफाई पर लोगों के फीडबैक पर 600 में से अंक दिए गए।

ऐसे क्लीन हुआ इंदौर

इंदौर में नगर निगम ने सैकड़ों कर्मचारियों और आधुनिक मशीनों से सफाई व्यवस्था को सुचारू रूपसे चलाया। इतना ही नहीं, इंदौर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी काफी ज्यादा काम हुआ है। इंदौर शहर और जिला दोनों ही खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। शहरी व ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया  है।

  •  शहर में घर-घर से कचरा उठाने के लिए विशेष अभियान चलाया।
  •  शहर में हर घर से कचरा उठाने के लिए नगर निगम का वाहन की मुश्तैदी।
  •  घर से कचरा उठाने के वक्त ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर लिया जाता है।
  •  रहवासी इलाके में एक बार ऒर व्यावसायिक इलाकों में दो बार दिन में कचरा कलेक्ट किया।
  •  नगर निगम और जिला प्रशासन ने विशेष जागरुकता अभियान चलाए।
  •  शहर को खुले डस्टबिन से मुक्त करने  के लिए डस्टबिन फ्री अभियान चलाया।
  •  इस अभियान के तहत सुंदर और पूरी तरह से बंद दो डस्टबिन लगाए गए, जिसमें सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकठ्ठा होता है।
  •  पांच जगहों पर ट्रांसपोर्टेशन हब बनाए गए, यहां से सारा कचरा ट्रेंचिंग ग्राउण्ड पहुंचता है।
  •  सूखा और गीला कचरा अलग-अलग होने की वजह से तुरंत प्रोसेसिंग के लिए चला जाता है।
  •  यहां कचरे से खाद बनाने के अलावा प्लास्टिक सामग्री को प्रोसेस कर सड़क बनाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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