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कांग्रेस को जब भी कुर्सी जाने का भय होता है, वह देश में डर का माहौल बनाने लगती है:मोदी

आज से 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 को कांग्रेस की सरकार ने आपातकाल घोषित किया था। इस मौके पर मंगलवार को मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने आपातकाल का बहिष्कार करते हुए कहा कि जब भी कांग्रेस को कुर्सी जाने का डर होता है, वह देश में डर का माहौल बनाना शुरू कर देती है। कांग्रेस के नेता ये कहना शुरू कर देते हैं कि देश तबाह हो रहा है और देश को हमीं बचा सकते हैं। इनके लिए मूल्य, परंपराएं, देश, संविधान कुछ मायने नहीं रखता।

प्रधानमंत्री ने कहा– “कांग्रेस की आलोचना मात्र करने के लिए हम काला दिन नहीं मनाते। हम देश और भावी पीढ़ी को जागरूक करना चाहते हैं। हम स्वयं को भी संविधान के प्रति समर्पित रखने के लिए इसे याद करते हैं। जिसने पराधीनता देखी नहीं है और न जानने का प्रयास किया है, उनके सामने आजादी की कितनी भी बातें क्यों न करें, वह उसे समझ नहीं सकता।”

संविधान का दुरुपयोग करने का ऐसा उदाहरण कहीं मिल सकता:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “लोकतंत्र के प्रति समर्पण को बार-बार याद करना चाहिए। ये अपने आप में संस्कार है। आज की पीढ़ी को पूछा जाए कि आपातकाल कैसा था? वो उस बारे में ज्यादा नहीं बता पाएगा। दरअसल प्यासे को पता होता है कि पानी न मिलने की तड़पन कैसी होती है। देश ने कभी सोचा तक नहीं था कि सत्ता सुख और परिवार की भक्ति के प्रति समर्पित लोग देश को सलाखों में बंद कर देंगे। लोगों को बताया जाता था कि तुम्हारा नाम मीसा में है और जल्द ही दरवाजे पर पुलिस आने वाली है। संविधान का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है, शायद ही ऐसा उदाहरण कहीं मिल सकता है।”

जिन्होंने भय का माहौल बनाया, वो दुनिया को मोदी के नाम से डरा रहे हैं
नरेंद्र मोदी ने कहा कि “वो कहते हैं कि दलित संकट में है। ये भय पैदा किया जा रहा है। दो दोस्तों के बीच में झगड़ा होता है तो उसे भी गलत तरीके से पेश किया जाता है। उनके गाने-बजाने वाले इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। जिन्होंने भय का माहौल बनाया, वो दुनिया को मोदी के नाम से डरा रहे हैं। अगर इस देश को चलाना है तो संविधान ही रास्ता हो सकता है। हमारी कोशिश होती है कि संविधान के प्रति लोगों में सम्मान का भाव पनपे।”

क्या हुआ था आपातकाल के दौरान?
इंदिरा गांधी ने भारत में 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लागू किया था। इस दौरान देश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले थे।

आपातकाल के दौरान 26 जून की सुबह तक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई समेत तमाम बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे। आपातकाल के दौराव प्रेस की आजादी पर भी हमला हुआ था और राजधानी दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित अखबारों के ऑफिसेज की बिजली काट दी गई थी। उस दौरान कई अखबारों ने मुखर होकर आपातकाल का विरोध किया था।

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