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Challenge will become unemployment, public transport and health services 1574950

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Published: Sun, 25 Feb 2018 06:51 PM (IST) | Updated: Tue, 27 Feb 2018 07:27 AM (IST)

By: Editorial Team

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भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की सरकार का यह लगातार पंद्रहवां और मौजूदा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट है। पिछली सरकारों में निश्चित तौर पर प्रदेश में विकास हुआ और बदलाव भी दिखा, लेकिन बारीकी से गौर किया जाए तो प्रदेश में बेरोजगारों की बड़ी फौज खड़ी हो गई।

आम आदमी के लिए शहर से गांव तक कहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं। शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है। अधोसंरचना के क्षेत्र में भी बेहद ध्यान दिए जाने की जरूरत है। चुनावी साल में सरकार बजट में सियायत तो करेगी ही, लेकिन वोटो की राजनीति से हटकर प्रदेशहित में भी विचार करना जरूरी है।

चुनावी साल में सरकार का फोकस बजट से सियासत को साधने का है। सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेक्टर को सरकार ने इस बजट में प्राथमिकता पर रखा है। साथ में सबसे ज्यादा खर्च सोशल सेक्टर पर करने की संभावना जताई गई है। पिछले दो चुनावों को देखें तो सरकार की नैय्या सोशल इंजीनियरिंग ने ही पार लगाई है।

2008 के चुनाव में सरकार को लाड़ली लक्ष्मी और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का बेहिसाब फायदा मिला था। 2013 के चुनाव में सरकार की सीधे नकद लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के साथ तीर्थदर्शन योजना ने भाजपा की सीटों को डेढ़ सौ पार पहुंचा दिया था। 2018 में भी सरकार की मंशा साफ है।

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना, शहरी क्षेत्रों या घर से दूर रहने वाले छात्र-छात्राओं को किराया प्रदान करने वाली योजना, किसान के लिए तमाम नई योजनाओं के साथ मजदूरों को लाभ पहुंचाने पर शिवराज सरकार का फोकस रहेगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पूरी राजनीति देखी जाए तो फोकस सिर्फ महिला, बच्चे, गरीब और किसान वर्ग पर रहा है। यही वजह है कि चौहान इस बजट में भी अपना सारा खजाना इसी वर्ग के लिए खोलेंगे। हां, यह बात सही सही है कि इस बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार नई घोषणाएं कर सकती है।

इसकी वजह है कि प्रदेश स्वास्थ्य सूचकांक में 17वें स्थान पर है। केंद्रीय बजट ने पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा शुरू करने का तो ऐलान किया ही है, अब राज्य सरकार भी स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान दे सकती है।

रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर

बीते 15 साल पर नजर दौड़ाई जाए तो राज्य सरकार रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम नहीं कर पाई है। यही वजह है कि 2018 के बजट में सरकार इन दोनों क्षेत्रों को लेकर अपना व्यापक दृष्टिकोण जाहिर कर सकती है। 18 साल पहले आई पीढ़ी के लोग अब युवा हो चुके हैं, इन्हें मतदान का अधिकार भी है पर रोजगार न होने से बेहद हताश हैं। सरकार के इस बजट में युवाओं के सपने साकार करना भी एक अहम चुनौती रहेगी।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प

बाबूलाल गौर सरकार के दौरान परिवहन मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता ने प्रदेश में पांच सौ करोड़ रुपए के घाटे में चल रहे राज्य सड़क परिवहन निगम को बंद कर दिया था। तब से प्रदेश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है।

परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने ऐलान भी किया था कि सभी विभागों द्वारा परिवहन को लेकर चलाई जा रही योजनाओं को एक साथ कर सरकार परिवहन सेवा शुरू करेगी, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं उतर पाया। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि निजी ट्रांसपोर्टरों की मनमानी बढ़ गई और अब तक हजारों निर्दोष विभिन्न् बस दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं।

स्वास्थ्य सुविधाएं

प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है। न डॉक्टर हैं न ही सुविधाएं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। ऐसे में सरकार को बताना होगा कि वह आम आदमी को इलाज दिलाने के लिए क्या करेगी। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के लिए भी बजट प्रावधान किया जा सकता है।




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