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मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा दो दिन पूर्व घोषित किए राज्य सेवा परीक्षा-2015 के परीक्षा परिणाम में हिमानी मनवारे का चयन जेल अधीक्षक के पद पर हुआ है। हिमानी
मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा दो दिन पूर्व घोषित किए राज्य सेवा परीक्षा-2015 के परीक्षा परिणाम में हिमानी मनवारे का चयन जेल अधीक्षक के पद पर हुआ है। हिमानी

लग जा गले… गाना गाया और हो गया एमपीपीएससी में सिलेक्शन, सचिव बोलीं मैं नहीं थी इंटरव्यू बोर्ड में

मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा दो दिन पूर्व घोषित किए राज्य सेवा परीक्षा-2015 के परीक्षा परिणाम में हिमानी मनवारे का चयन जेल अधीक्षक के पद पर हुआ है। हिमानी

मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा दो दिन पूर्व घोषित किए राज्य सेवा परीक्षा-2015 के परीक्षा परिणाम में हिमानी मनवारे का चयन जेल अधीक्षक के पद पर हुआ है। हिमानी मनवारे बहुमुखी प्रतिभा की धनी है। वर्तमान में वे आबकारी निरीक्षक के पद पर हरदा में पदस्थ हैं। आबकारी निरीक्षक के लिए भी उनका चयन लोकसेवा आयोग ने ही किया था। लोक सेवा आयोग द्वारा साक्षात्कार लेने के लिए जो नियम कथित तौर पर बनए गए उसके चलते हिमानी को इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष हिन्दी फिल्म ‘वो कौन थी’ का मशहूर गीत लग जा गले से फिर ये हसीं रात हो न हो… गाकर बोर्ड के समक्ष सुनाना पड़ा। इस बात का खुलासा खुद हिमानी ने जेल अधीक्षक के पद पर चयन होने के बाद एक हिन्दी अखबार को दिए साक्षात्कार में किया। राज्य सेवा की नौकरी के लिए बोर्ड के समक्ष गाना सुनाने का हिमानी का यह पहला अनुभव था। हिमानी ने साक्षात्कार के लिए ताजा घटनाक्रम से लेकर इतिहास-भूगोल तक रट डाला था। हिमानी को संगीत में विशेष रूचि है। वे तबला भी बजा लेती हैं और गाना भी गा लेती हैं। बोर्ड के एक सदस्य(हिमानी को इस सदस्य का नाम ज्ञात नहीं है) ने जब हिमानी से उनकी हॉबी के बारे में पूछा तो उन्होंने तबला और गायकी का जिक्र कर दिया। बोर्ड के सदस्य ने तुरंत एक गाना गाकर सुनाने की फरमाइश हिमानी के समक्ष रख दी। इस गाने के साथ बाद्य यंत्रों की कोई संगत नहीं थी। हिमानी के लिए बोर्ड के सदस्य की यह मांग अप्रत्याशित थी। कुछ पल में ही हिमानी ने अपने आप को संभाला और गाना शुरू कर दिया।

सचिव ने झाड़ा पल्ला

देश में अपने तरह का शायद यह पहला मामला है जिसमें सिविल सर्विस की नौकरी में चयन करने के लिए उम्मीदवार से बोर्ड के सदस्यों ने गाना गाने की फरमाइश रखी हो। आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया है कि बोर्ड के सदस्यों ने उम्मीदवार से गाने की फरमाइश तय मापदंडों और नियमों के तहत ही की है। नियम कब जारी किए गए इस बात का उल्लेख आयोग की अधिकृत वेबसाइट पर भी नहीं है। लोक सेवा आयोग की सचिव रेणू पंत ने पावर गैलरी ने गाने को लेकर उठे विवाद से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे इंटरव्यू बोर्ड में नहीं थीं। नियमों के सवाल रेणू पंत ने कहा कि उन्हें इसका कोई आईडिया नहीं है।

व्यापमं  में हो चुकी हैं गड़बड़ी

व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की तरह ही मध्यप्रदेश में लोक सेवा आयोग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रश्न पत्र लीक होने से लेकर मैरिट सूची में बदलाव के कई आरोप भी लग चुके हैं। विशेष कार्य दल (एसटीएफ) भी मामले की जांच कर रही है। लंबी कोर्ट कचहरी भी चल रही है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में व्यापमं द्वारा आयोजित की गर्इं परीक्षाओं में बड़े पैमान पर फर्जी तरीके चयन करने के हजारों मामले सामने आए हैं। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में 650 से अधिक डॉक्टरों का प्रवेश रद्द कर दिया गया है। ये वे छात्र थे, जिन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर ली थी। सरकार अब मेडिक काउसिंल आॅफ इंडिया से इनके पंजीयन रद्द करा रही है।

आयोग के अध्यक्ष की रूचि है संगीत में

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर बिपिन व्यौहार हैं। उन्होंने खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा हासिल किया है। व्यौहार कृषि संकाय से एमएससी हैं। उन्हें कृषि विपणन क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। लोक सेवा आयोग में एक दशक पूर्व तक किसी वरिष्ठ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को चेयरमैन नियुक्त किया जाता है। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद शिक्षा क्षेत्र के लोगों भी आयोग में नियुक्त किया जाने लगा है। इससे पूर्व के सालों में राजनीतिक व्यक्तियों की नियुक्ति भी आयोग में की जाती रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने इस व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव किए हैं।

पैटर्न पर मतभेद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा इंटरव्यू के लिए अपनाए गए पैटर्न से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अपर मुख्य सचिव के स्तर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी प्रशांत मेहता कहते हैं कि आयोग मर्यादा पूर्ण आचरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का टेस्ट लेना चाहिए। आयोग के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इंटरव्यू का पैटर्न उम्मीदवारों के आत्म विश्वास को जांचने के लिए अपनाया गया है। एक अन्य सदस्य ने इस पैटर्न से नाइत्तफाकी जाहिर करते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार की हॉवी का सच्चाई पता लगाने का यह उपयुक्त तरीका नहीं है। यदि कोई उम्मीदवार अपनी हॉवी डासिंग अथवा कुकिंग बताता तो क्या बोर्ड में उसे डांस करने अथवा खाना बनाने के लिए कहा जाता।

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