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प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2005 में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रकाशक एजेएल को एक प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन की
प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2005 में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रकाशक एजेएल को एक प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन की

ईडी ने की मोतीलाल वोरा, भूपिंदर सिंह हुड्डा से पूछताछ 

प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2005 में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रकाशक एजेएल को एक प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन की जांच के संबंध में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से पूछताछ की।

अधिकारियों से की गई पूछताछ

अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष वोरा से दो दिन पहले यहां उनके आवास पर पूछताछ की गई और हुड्डा से भी चंडीगढ़ में उसी दौरान पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दोनों कांग्रेस नेताओं के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि उनसे इस मामले में जब्त और बरामद किए गए कुछ दस्तावेजों को लेकर भी पूछताछ की गई।

कांग्रेस नेता के आवास पर पूछताछ

उन्होंने कहा कि वोरा से एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के तौर पर इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की गई। ईडी ने वोरा की उम्र के संबंध में विशेष छूट देते हुए और घर पर पूछताछ करने के उनके आग्रह पर कांग्रेस नेता से उनके आवास पर पूछताछ की।

AJL मामले में हुई पूछताछ

एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी पर संज्ञान लेते हुए गत वर्ष कथित धन शोधन के आरोपों पर हुड्डा एजेएल अधिकारियों और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी।सतर्कता ब्यूरो ने 2005 में पंचकुला में एजेएल के एक प्लॉट को कथित तौर पर पुन आवंटित करने के मामले में हुड्डा और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए थे। हुड्डा ने तब इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया था और कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया।

आखिर क्या है यह पूरा मामला

ये मामला नेशनल हेरल्ड अख़बार से जुड़ा है जिसकी स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी. उस समय से यह अख़बार कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा है | अख़बार का मालिकाना हक़ एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी ‘एजेएल’ के पास था जो दो और अख़बार भी छापा करती थी। हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘क़ौमी आवाज़’।

आज़ादी के बाद 1956 में एसोसिएटेड जर्नल को अव्यवसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट धारा 25 के अंतर्गत इसे कर मुक्त भी कर दिया गया। वर्ष 2008 में ‘एजेएल’ के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया और कंपनी पर 90 करोड़ रुपए का क़र्ज़ भी चढ़ गया। फिर कांग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई अव्यवसायिक कंपनी बनाई जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। इस नई कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे। कांग्रेस पार्टी ने इस कंपनी को 90 करोड़ रुपए बतौर ऋण भी दे दिया। इस कंपनी ने ‘एजेएल’ का अधिग्रहण कर लिया।

यंग इंडिया कंपनी का निर्माण

23 नवंबर 2010 को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड नाम की सेक्‍शन 25 कंपनी प्रकाश में आई। गांधी परिवार के वफादार सुमन दुबे और सैम पित्रोदा जैसे लोग इसके डायरेक्‍टर थे। 13 दिसंबर 2010 को राहुल गांधी को इस कंपनी का डायरेक्‍टर बनाया गया। 22 जनवरी 2011 को सोनिया भी यंग इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स में शामिल हुईं। वोरा और कांग्रेस के राज्‍यसभा सदस्‍य ऑस्‍कर फर्नांडीज भी उसी दिन यंग इंडियन के बोर्ड में शामिल किए गए। इस कंपनी के 38-38 फीसदी शेयरों पर राहुल और सोनिया की हिस्‍सेदारी है। बाकी के 24 पर्सेंट शेयर वोरा और फर्नांडीज के नाम हैं।

एजेएल, यंग इंडिया और कांग्रेस की डील

2010 में कांग्रेस ने एजेएल के हिस्‍से के 90 करोड़ रुपए के कर्ज को यंग इंडियन पर डालने का फैसला किया। इस तरह से एजेएल के कागजों में यंग इंडियन उसके कर्ज की हिस्‍सेदार हो गई। वो कर्ज जो कांग्रेस ने ही दिया था। इसके ठीक बाद, दिसंबर 2010 में इस 90 करोड़ रुपए के कर्ज के बदले एजेएल ने अपनी पूरी कंपनी यंग इंडियन को देने का फैसला किया। यंग इंडियन ने इस अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपए चुकाए। इस पूरी डील की वजह से कांग्रेस से 90 करोड़ रुपए का कर्ज लेने वाली एजेएल पूरी तरह यंग इंडियन की सहायक कंपनी में तब्‍दील हो गई। यंग इंडियन, जिसपर राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मोतीलाल वोरा और ऑस्‍कर फर्नांडीज का मालिकाना हक है।

क्या है पहेली

लोन देने और एजेएल के शेयर पूरे खेल में संस्थाएं तो तीन हैं लेकिन तीनों के कर्ता-धर्ता एक ही हैं। पहली संस्था है कांग्रेस पार्टी जिसकी अध्यक्ष हैं सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष हैं राहुल गांधी और कोषाध्यक्ष हैं मोतीलाल वोरा। दूसरी कंपनी है यंग इंडियन कंपनी में सोनिया, राहुल और मोतीलाल वोरा शामिल हैं। तीसरी कंपनी एजेएल यह कंपनी नेहरू परिवार की कंपनी है। यानी कुल मिलाकर कर्ज की मांग करने वालों, मांग को सुनने वाले और फैसला करने वाले एक ही थे। अब सवाल उठता है कि ये कौन सा कर्ज है। तो अब जरा पहेली का ये दूसरा हिस्सा समझिए। नेशनल हेरल्ड को चलाने वाली कंपनी एजेएल घाटे में थी और उसे एक बड़ा लोन चाहिए था। इस जरूरत को पूरा किया राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ने यानी कांग्रेस ने 90 करोड़ का बिना ब्याज वाला लोन एजेएल को दे दिया।

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